- कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने छात्रों को लेकर सरकार पर निशाना साधा है.
- नीट पेपर लीक और अन्य मुद्दों पर हो रहे छात्र आंदोलनों को सरकार की नीतियों का कारण बताया है.
- सोनिया गांधी ने शिक्षा बजट, निजीकरण को बढ़ावा देने जैसे मुद्दों को उठाया है.
कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने छात्रों का मुद्दा उठाते हुए सरकार की नीतियों पर सीधा हमला बोला है. उन्होंने एक लेख के जरिए अपना संदेश दिया है. जिसमें सोनिया गांधी ने देश की शिक्षा व्यवस्था में आए संकट और छात्रों के बढ़ते आक्रोश को सरकार की जनविरोधी नीतियों का परिणाम बताया है. उन्होंने लिखा कि पिछले कुछ हफ्तों से देश भर में युवा छात्र परीक्षा पेपर लीक और शिक्षा प्रणाली के पतन के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं. उनकी मांगे भी क्लीयर हैं, जिसमें सरकार से जवाबदेही और शिक्षा में ठोस सुधार की बात कही गई है. लेकिन सरकार ने इन युवाओं के साथ संवाद नहीं किया, बल्कि दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के जरिए बल प्रयोग किया है. प्रदर्शनकारी छात्रों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोलों का इस्तेमाल कर उनकी आवाज को दबाने की कोशिश की गई, जो सरकार की मानसिकता को दर्शाता है.
शिक्षा बजट में हो रही कटौती: सोनिया गांधी
सोनिया गांधी ने लिखा 'सरकार ने बजट में स्कूली शिक्षा और उच्च शिक्षा के आवंटन में भारी कटौती की है. जबकि सरकारी स्कूलों और विश्वविद्यालयों की उपेक्षा कर निजीकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे शिक्षा आम परिवारों की पहुंच से बाहर हो गई है. इसी तरह से नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) जैसी संस्थाओं पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि केंद्रीकरण और निजी ठेकेदारों पर निर्भरता के कारण देश में पेपर लीक एक आम बात बन गई है. पिछले कुछ सालों में दर्जनों पेपर लीक की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिससे होनहार छात्रों का भविष्य अंधकारमय हो रहा है.'
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सोनिया गांधी ने उठाया रोजगार का मुद्दा
कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष ने लिखा 'बढ़ती बेरोजगारी और रोजगार की कमी को लेकर लिखा कि स्नातक और उच्च शिक्षित युवाओं में बेरोजगारी दर चिंताजनक स्तर पर पहुंच चुकी है. राजनीतिक आधार पर कुलपतियों और शिक्षकों की नियुक्तियों ने विश्वविद्यालयों में पढ़ाई के स्तर को गिरा दिया है.'
छात्रों हितों की रक्षा करना हमारा काम
सोनिया गांधी ने कहा कि छात्रों के साथ खड़ा होना और उनके भविष्य की रक्षा करना नैतिक, राजनीतिक और संवैधानिक दायित्व है. उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्रीय गृह मंत्री के प्रत्यक्ष अधिकार क्षेत्र में कार्यरत पुलिसकर्मियों द्वारा छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ की गई 'बर्बरता' इस सरकार के लिए कोई नयी बात नहीं है. हम सभी को अच्छी तरह याद है कि 2020 में नागरिकता (संशोधन) अधिनियम-राष्ट्रीय नागरिक पंजी (सीएए-एनआरसी) के विरोध प्रदर्शनों के दौरान सशस्त्र पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों ने विश्वविद्यालय परिसरों में किस तरह कार्रवाई की थी. भारत की महिला पहलवानों के साथ हुई अस्वीकार्य ज्यादतियों को भी कभी भुलाया नहीं जा सकता है.
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