अमेरिकी की बड़ी मीडिया हस्ती और राजनीतिक टिप्पणीकार टकर कार्लसन ने दावा किया है कि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर ईरान के खिलाफ परमाणु हमला करने का दबाव डाल रहे हैं. उन्होंने दावा किया है कि अमेरिका कुछ ही दिनों में ईरान पर परमाणु हमला कर सकता है. जब इजरायल में चुनाव हो चुका है और अमेरिका में मिडटर्म का चुनाव एक दिन दूर है, तब यह बड़ा दावा किया गया है. यहां ध्यान देने की बता है कि खबर लिखे जाने तक अमेरिकी मीडिया में इसके अलावा और कोई रिपोर्ट सामने नहीं आई है जिसमें ऐसा दावा किया गया हो.
टकर कार्लसन ने क्या कहा है?
टकर कार्लसन के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लगभग 18 मिलियन फॉलोअर्स हैं. उन्होंने सोमवार को एक्स पर एक बड़ा पोस्ट डालते हुए दावा किया कि इस संभावित परमाणु हमले में ईरान में 'पिकएक्स माउंटेन' को निशाना बनाया जा सकता है. इजरायली खुफिया एजेंसियों का मानना है कि ईरान ने वहां अपना परमाणु संवर्धन (न्यूक्लियर एनरिचमेंट) कार्यक्रम फिर से शुरू कर दिया है.
उन्होंने तर्क दिया कि अमेरिका के पारंपरिक हथियार इस पहाड़ की ग्रेनाइट चट्टानों को भेदकर उन 300 फीट नीचे अंडरग्राउंड सुरंगों तक नहीं पहुंच पाएंगे, जहां कथित तौर पर परमाणु संवर्धन का काम चल रहा है. कार्लसन ने लिखा, "इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के दबाव में, ट्रंप प्रशासन कुछ ही दिनों के भीतर ईरान पर परमाणु हमला कर सकता है."
उन्होंने लिखा कि "मिडिल ईस्ट में अमेरिका के बाकी पुराने सहयोगी और अधिक युद्ध की संभावना से बुरी तरह डरे हुए हैं. 27 सितंबर को, नेतन्याहू चुपके से अबू धाबी गए ताकि ईरान पर अंतिम हमले के लिए अपनी लॉबिंग में UAE को शामिल कर सकें. अमीरात ने इससे इनकार कर दिया. आठ महीने के संघर्ष के बाद, खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्थाएं लड़खड़ा रही हैं. वैश्विक ऊर्जा और उर्वरक बाजार भी इसी स्थिति में हैं. इनके जल्द संभलने के आसार नहीं हैं. दुनिया भर में, उत्पादकों से बाकी दुनिया तक तेल पहुँचाने के लिए लगभग 850 सुपरटैंकरों का इस्तेमाल होता है. अकेले अक्टूबर में, इनमें से 11 टैंकर होर्मुज में बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए. अगर यही हाल रहा, तो वैश्विक मंदी आना तय है. परमाणु हमले से तबाही कई गुना तेजी से बढ़ेगी. 'पिकएक्स माउंटेन' पर जमीनी विस्फोट होने से जो रेडियोएक्टिव फॉलआउट फैलेगा, वह फारस की खाड़ी को प्रदूषित कर देगा, जिससे 10 करोड़ लोगों के लिए पानी की आपूर्ति ज़हरीली हो जाएगी."
"चाहकर भी तीसरा विश्वयुद्ध नहीं रोका जा सकेगा"
टकर ने आगे लिखा कि "ये तो इस क्षेत्र के लिए कुछ तात्कालिक परिणाम भर हैं. बाकी दुनिया भी उतनी ही खतरे में है. अमेरिका के अलावा किसी और देश ने कभी युद्ध में परमाणु हथियारों का इस्तेमाल नहीं किया है. हालांकि, कुछ देश ऐसा करना जरूर चाहेंगे. अगर अमेरिका ईरान पर परमाणु हमला करता है, तो यह एक नई मिसाल कायम करेगा. रूस ने कम से कम दो अन्य सरकारों से पहले ही कह दिया है कि अगर अमेरिका ईरान पर परमाणु हमला करता है, तो उन्हें भी यूक्रेन के खिलाफ परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करने की छूट मिल जाएगी. पाकिस्तान और भारत भी एक-दूसरे के खिलाफ ऐसा करने के लिए प्रेरित हो सकते हैं, और उत्तर कोरिया भी सियोल के खिलाफ ऐसा ही कर सकता है. एक बार पहला परमाणु हमला हो गया, तो तीसरा विश्व युद्ध होना तय है. वह युद्ध छोटा होगा, लेकिन निर्णायक होगा."
नोट- परमाणु हथियार के इस्तेमाल पर भारत का स्टैंड मुख्य रूप से उसकी 'नो फर्स्ट यूज' यानी पहले इस्तेमाल नहीं की नीति पर आधारित है. भारत का कहना है कि भारत कभी भी किसी देश पर पहले परमाणु हथियार से हमला नहीं करेगा. परमाणु हथियारों का इस्तेमाल केवल तभी किया जाएगा जब भारत या भारतीय सेना पर किसी अन्य देश द्वारा पहले परमाणु हमला किया जाए.
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