विज्ञापन

अमेरिका में 2 साल पर क्यों होते हैं चुनाव? कल मिडटर्म इलेक्शन की वोटिंग, ट्रंप की अग्निपरीक्षा पर भारत की नजर

3 नवंबर को अमेरिका में मिडटर्म चुनाव हैं. इससे तय होगा कि संसद, गवर्नर और स्थानीय पदों पर किसका कंट्रोल रहेगा. सीनेट और हाउस दोनों में कड़ी टक्कर है. यहां 4 सवाल और उनके जवाब के जरिए अमेरिका के पूरे मिडटर्म चुनाव को समझिए.

अमेरिका में 2 साल पर क्यों होते हैं चुनाव? कल मिडटर्म इलेक्शन की वोटिंग, ट्रंप की अग्निपरीक्षा पर भारत की नजर
US Midterm Election Explained in Hindi: अमेरिका में मिडटर्म चुनाव के लिए कल डाले जाएंगे वोट

अमेरिका में कल यानी 3 नवंबर को मिडटर्म चुनाव के लिए वोटिंग होने जा रही है. यह चुनाव अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार के लिए बहुत अहम होने जा रहा है. इसी चुनाव के जरिए अमेरिका की जनता यह तय करेगी कि डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के हाथ में संसद के दोनों सदनों का कंट्रोल रहेगा या नहीं. ट्रंप ने इस चुनाव में एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया है, लेकिन सर्वे में उनकी पार्टी पिछड़ती नजर आ रही है. सवाल है कि आखिर मिडटर्म चुनाव क्या होता है? इसमें जनता किसे चुनती है? ट्रंप सरकार और अमेरिका की राजनीति के लिए इस बार का चुनाव इतना अहम क्यों है? इस बार के चुनाव में क्या मुद्दे हैं? आखिर में हम यह भी बताएंगे कि भारत की नजर भी इस चुनाव पर क्यों होगी.

अमेरिका में मिडटर्म इलेक्शन क्या होता है?

3 नवंबर को अमेरिकी नागरिक कांग्रेस (अमेरिका संसद) के सदस्यों को चुनेंगे. यानी यह चुनाव सांसदों का है. अमेरिका की संसद में दो सदन हैं- हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट. हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स को आप लोकसभा कह सकते हैं और सीनेट को राज्यसभा. अमेरिका में संसद के लिए चुनाव हर दो साल में होते हैं, और जब ये राष्ट्रपति के चार साल के कार्यकाल के बीच में होते हैं, तो इन्हें 'मिडटर्म' कहा जाता है.

अमेरिका की संसद का एक मुख्य काम संघीय कानून बनाना और उन्हें पारित करना है. संघीय कानून मतलब ऐसे कानून जो पूरे देश में लागू होते हैं. मिडटर्म के नतीजों से ही यह तय होगा कि अमेरिका में किस राजनीतिक दल का कांग्रेस पर नियंत्रण होगा-  ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी या विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी. अगर ट्रंप की पार्टी के पास कंट्रोल बना रहा तो राष्ट्रपति के लिए अपनी योजनाओं को लागू करना आसान होगा और अगर डेमोक्रेटिक पार्टी बहुमत ले लेती है तो ट्रंप के लिए अपने कानूनों को पास कराना मुश्किल होगा.

इतना ही नहीं मिडटर्म के नतीजों को इस बात के जनादेश के रूप में भी देखा जाता है कि अमेरिका के लोग अब तक राष्ट्रपति के कामकाज से कितने खुश हैं.

मिडटर्म में किसका चुनाव हो रहा?

कांग्रेस के निचले सदन यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के सभी 435 सदस्यों का चुनाव होगा. भारत में लोकसभा सांसद का कार्यकाल 5 सालों का होता है लेकिन अमेरिका के हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के सांसदों का कार्यकाल दो साल का होता है. इतना ही नहीं सीनेट (उच्च सदन) की 100 में से 35 सीटों के लिए भी चुनाव होंगे. अमेरिका में सीनेटरों का कार्यकाल छह साल का होता है. 

मिडटर्म इलेक्शन के साथ ही अमेरिका के बड़े हिस्से में वोटर राज्य-स्तरीय राजनेताओं को भी चुनेंगे. कैलिफोर्निया, फ्लोरिडा, जॉर्जिया और मिशिगन में गवर्नर पद के चुनावों पर सबसे ज्यादा नजर रहेगी.

ट्रंप के लिए यह चुनाव इतना अहम क्यों है?

भारत की तरह अमेरिका में भी सरकार के तीन हिस्से होते हैं- कांग्रेस, राष्ट्रपति और न्यायपालिका. कानून बनाने का काम कांग्रेस का है और इसलिए उसपर कंट्रोल बहुत मायने रखता है. अभी हाउस और सीनेट दोनों सदन पर ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी का कब्जा है, लेकिन बहुमत बहुत कम है.

हाउस में उनके पास 218 सीटें हैं, जो बहुमत के लिए कम से कम जरूरी आंकड़ा है. साथ में एक निर्दलीय सदस्य जो उनके साथ है. सीनेट में उनके पास 53 सीटें हैं. विपक्षी डेमोक्रेट्स को सीनेट पर कंट्रोल पाने के लिए 51 सीटें करनी होंगी, ताकि 50-50 की स्थिति होने पर उपराष्ट्रपति के वोट से हारने से बच सकें. अगर डेमोक्रेट्स पार्टी संसद पर अपना कंट्रोल कर लेती है तो वे अपने कानून ला सकेंगे और ट्रंप सरकार के फैसलों को रोक भी सकेंगे.

अगर डेमोक्रेट्स किसी भी एक सदन में जीत जाते हैं, तो वे कमेटियों के जरिए ट्रंप सरकार की जांच कर सकते हैं - जैसे भ्रष्टाचार के आरोप, व्हाइट हाउस में नया बॉलरूम बनाने का विवाद और ICE एजेंट्स की कार्रवाई. डेमोक्रेटिक पार्टी में इस बात पर भी बहस है कि क्या ट्रंप पर महाभियोग चलाया जाए, यानी कांग्रेस में उन पर आरोप लगाकर राजनीतिक ट्रायल किया जाए या नहीं. 

दूसरी तरफ अगर रिपब्लिकन पार्टी का ही कांग्रेस पर कंट्रोल बना रहता है, तो ट्रंप अपने कार्यकाल के बाकी समय तक अपनी योजनाओं पर आगे बढ़ते रहेंगे.

भारत की नजर क्यों होगी?

विदेश मामलों के जानकार वाएल अव्वाद ने न्यूज एजेंसी ANI से कहा है कि अगर मिडटर्म चुनाव में रिपब्लिकन जीतते हैं और ट्रंप के हाथ में पूरी ताकत बनी रहती है, तो इसका भारत पर बुरा असर पड़ सकता है, खासकर H-1B वीजा, टैरिफ और सख्त इमिग्रेशन नियमों को लेकर. उन्होंने कहा कि अमेरिका भारत को Quad और इंडो-पैसिफिक में एक जरूरी रणनीतिक साझेदार मानता है, लेकिन ट्रंप की नीतियां अक्सर इस साझेदारी से अलग रही हैं. अव्वाद के मुताबिक, अगर ट्रंप पूरी ताकत के साथ बने रहते हैं तो वे सख्त इमिग्रेशन और वीजा नियम लागू करेंगे, जिसका भारत पर निगेटिव असर पड़ेगा. हालांकि, कुल मिलाकर अमेरिका भारत के साथ रिश्ते बनाकर रखना चाहता है और भारत भी इस चुनाव पर बारीकी से नजर रख रहा है.

यह भी पढ़ें | अमेरिकी चुनाव में डमी कैंडिटेड पर बवाल; वोट कटने के डर से ट्रंप परेशान, हेमा मालिनी-राहुल गांधी की सीट याद आयी

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
US Midterm Election, US Midterm Election 2026, Donald Trump
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com