विज्ञापन

ईद इस बार खुशियों वाली नहीं- ईरान से कतर और सऊदी तक आसमान से बरस रहीं मिसाइलें, काले धुएं में छिपा चांद

US Iran War and Eid 2026: लगभग तीन हफ्ते के युद्ध के बाद ईरान की राजधानी तेहरान के बडे़ बाजार लगभग वीरान नजर आ रहे हैं. UAE और कतर ने भी घोषणा की है कि इस साल ईद-उल-फितर की नमाज पूरे देश में मस्जिदों के अंदर ही होगी.

ईद इस बार खुशियों वाली नहीं- ईरान से कतर और सऊदी तक आसमान से बरस रहीं मिसाइलें, काले धुएं में छिपा चांद
Eid 2026 celebration in Middle East: जंग के बीच मिडिल ईस्ट में कैसे मनेगी ईद
  • खाड़ी में रमजान के दौरान जारी युद्ध और मिसाइल हमलों के कारण लोगों का जीवन असामान्य और भयपूर्ण बना हुआ है
  • खाड़ी देशों में ईद की नमाज केवल मस्जिदों के अंदर ही पढ़ी जाएगी ताकि नमाजियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके
  • पाकिस्तान और अफगानिस्तान ने ईद के मौके पर पांच दिनों के लिए अस्थायी युद्धविराम की घोषणा की है
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।

Eid al-Fitr 2026 in Middle East: इस बार मिडिल ईस्ट के लिए ईद-उल-फितर का त्योहार एकदम अलग होगा. लगातार रुक-रुक कर हो रहे मिसाइल और ड्रोन हमलों, सायरनों की आवाज और अनिश्चितता के माहौल के बीच खाड़ी क्षेत्र के नागरिक और निवासी शुक्रवार, 20 मार्च को एक ऐसी ईद की तैयारी कर रहे हैं जो पहले कभी नहीं देखी गई. रोजे का पाक महीना रमजान तो खत्म हो रहा है लेकिन खाड़ी में जारी हिंसा दूर-दूर तक खत्म होती नहीं दिख रही है. खाड़ी में यह संकट तब शुरू हुआ जब इजरायल और अमेरिका ने मिलकर 28 फरवरी को ईरान पर हमला किया. इसके बाद कई हत्याएं, टारगेट बनाकर किए गए बम धमाके और ईरान की तरफ से इजरायल तथा पूरे खाड़ी क्षेत्र में जवाबी हमले हुए. इन घटनाओं की काली छाया इस पूरे पवित्र महीने पर बनी रही.

युद्ध के फैलते प्रभाव और युद्ध की अनिश्चित स्थिति ने इस क्षेत्र पर गहरा असर डाला है और यह संकट आगे और दूर तक फैल सकता है. हॉर्मुज जलडमरूमध्य लगभग ठप हो गया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को खतरा पैदा हो गया है. इस युद्ध का आर्थिक असर अब दूर-दूर तक महसूस होने लगा है, जिसमें भारत भी शामिल है, जो अरब के तेल कुओं से आने वाली ऊर्जा आपूर्ति पर काफी निर्भर करता है. कतर से आने वाली LNG (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) की आपूर्ति पर भी बड़ा असर पड़ा है. इसका असर दक्षिण एशिया के उन लाखों घरों में महसूस हो रहा है जहां खाना पकाने के लिए गैस का इस्तेमाल होता है.

इन परिस्थितियों में ईद के उत्सव से ज्यादा राहत मिलने की संभावना नहीं है. खाड़ी क्षेत्र के देशों में कई परिवार लगातार चेतावनियों के कारण ज्यादातर घरों में ही रह रहे हैं और जिनके बच्चे ऑनलाइन क्लास ले रहे हैं. लेकिन इसके बावजूद वे कभी-कभी बाहर गाड़ी चलाकर सामान्य जीवन जैसा माहौल बनाए रखने की कोशिश करते हैं. लेकिन उन्हें पता है कि ईद मनाते समय भी खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है.

ईद और खाड़ी के लोग

लगभग तीन हफ्ते के युद्ध के बाद ईरान की राजधानी तेहरान के बडे़ बाजार लगभग वीरान नजर आ रहे हैं, जबकि यहां कि गलियां आम तौर पर खचाखच भरी रहती हैं. कई दुकानें बंद हो गईं और सामानों की कीमतें बढ़ गईं. फारसी नव वर्ष और ईद-उल-फितर की छुट्टियों से पहले के दिनों में आम तौर पर बाजार व्यापारियों और गिफ्ट की खरीदारी करने वाले परिवारों से भर जाता था, लेकिन सामान्य से बहुत कम लोग खरीदारी के लिए निकल रहे हैं. रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार 40 साल की निसरीन ने कहा कि हम कुछ भी कैसे खरीद सकते हैं. निसरीन अपने दो बच्चों के लिए नई जींस के कपड़ों की खरीदारी के लिए दुकानों में घूम रही थी.

इराक में ईद से पहले खरीदारी करते लोग

इराक में ईद से पहले खरीदारी करते लोग

ईद के मौके पर खाड़ी देशों की सरकारें यह सुनिश्चित करने की पूरी कोशिश कर रही हैं कि उत्सव शांतिपूर्ण तरीके से मनाया जाए, भले ही माहौल में उत्साह कम हो. संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने घोषणा की है कि इस साल ईद-उल-फितर की नमाज पारंपरिक खुले मैदानों में नहीं बल्कि केवल मस्जिदों के अंदर पढ़ी जाएगी. UAE की जनरल अथॉरिटी फॉर इस्लामिक अफेयर्स एंड एंडोमेंट्स के अनुसार यह फैसला “नमाजियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने” के लिए लिया गया है. 

कतर ने भी घोषणा की है कि इस साल ईद-उल-फितर की नमाज पूरे देश में मस्जिदों के अंदर ही होगी. हालांकि इसके बावजूद यहां की महिलाएं आखिरी समय की खरीदारी के लिए मॉल और शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में जा रही हैं. शासक और सरकारी अधिकारी एक-दूसरे को ईद की शुभकामनाएं दे रहे हैं. प्रशासन अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था के साथ यह सुनिश्चित करने में लगा है कि सब कुछ ठीक से हो.

कुवैत के सूचना मंत्रालय ने गुरुवार सुबह कहा कि कुवैत शहर की सबसे बड़ी मस्जिद "वर्तमान परिस्थितियों" के कारण ईद-उल-फितर पर नमाजियों के लिए बंद रहेगी.

हर तरह से देखें तो यह ऐसी ईद है जिसके लिए इस क्षेत्र में किसी ने तैयारी नहीं की थी. लोग मन ही मन उम्मीद कर रहे हैं कि इस ईद पर सिर्फ शुभकामनाएं, खाना और उत्सव ही नहीं, बल्कि युद्ध खत्म होने या कम से कम युद्धविराम की खबर भी मिले. अगर ऐसा होता है तो यह उनके जीवन की सबसे बड़ी ईद बन सकती है.

यह भी पढ़ें: ईरान में हजारों सैनिक उतारकर सर्जिकल स्ट्राइक करेगा अमेरिका? जंग के 3 हफ्ते बाद ट्रंप बना रहे नया एक्शन प्लान

ईद और गाजा

गाजा में युद्ध शुरू होने के बाद पहली बार, राएदा अबू दीया ने ईद के मौके पर अपनी बेटी के लिए खास कपड़े खरीदे हैं. भले इजरायल-हमास युद्ध में अब एक नाजुक युद्धविराम कायम है, लेकिन गाजा में रहने वाले फिलिस्तीनियों को डर है कि ईरान युद्ध से दुनिया उनकी पीड़ा भूल जाएगी, और उनको मिलने वाली सहायता की लंबे समय तक कमी हो जाएगी.  अपना घर नष्ट होने के बाद एक तंबू में अपनी बेटी और पति के साथ रहने वाली 38 वर्षीय अबू दीया ने न्यूज एजेंसी एएफपी को बताया, "इस साल मैंने फैसला किया कि मैं और मेरे बच्चे खुश होंगे और जो हमारे पास उपलब्ध है, उसके साथ जश्न मनाएंगे."

वेस्ट बैंक में बच्चे ईद से पहले खिलौने वाले बंदूक खरीदते हुए (AFP)

वेस्ट बैंक में बच्चे ईद से पहले खिलौने वाले बंदूक खरीदते हुए (AFP)

"गोलाबारी पहले की तुलना में बहुत कम है." उनकी 15 साल की बेटी फिदा भी रोमांचित है. अपनी मां से मिली नई जींस, टी-शर्ट और जैकेट के बारे में विस्तार से बता रही है. उसे आज भी अपने सारे सामान से भरे पुराने कमरे की याद आती है. मां को भी उम्मीद है कि यह ईद "गाजा में मधुर जीवन की वापसी की शुरुआत" की प्रतीक होगी.

ईद, पाकिस्तान और अफगानिस्तान

पाकिस्तान और अफगानिस्तान ने ईद-उल-फितर के अवसर पर शत्रुता में “अस्थायी विराम” की घोषणा की. जंग को 5 दिनों के लिए रोक दिया गया है. यह कदम सऊदी अरब, तुर्की और कतर की अपीलों के बाद उठाया गया है. पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तारर ने स्पष्ट किया कि यह सीजफायर “18/19 मार्च की मध्यरात्रि से 23/24 मार्च की मध्यरात्रि तक” लागू रहेगा. हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि किसी भी सीमा पार हमले, ड्रोन हमले या पाकिस्तान में आतंकवादी घटना होने पर ऑपरेशन तुरंत फिर से शुरू कर दिया जाएगा.

पाकिस्तान के लाहौर में ईद के मौके पर रेलवे स्टेशन पर बढ़ी भीड़

पाकिस्तान के लाहौर में ईद के मौके पर रेलवे स्टेशन पर बढ़ी भीड़

ईद और खाड़ी में रह रहे भारत के लोग

अबू धाबी में रहने वाले एक भारतीय इंजीनियर ने अपनी पहचान गुप्त रखने की शर्त पर कहा, “सब लोग लंबे समय के असर को लेकर चिंतित हैं. उन्हें पता है कि वे इन हमलों के सीधे निशाने पर नहीं हैं, लेकिन पूरे माहौल और व्यवस्था को आगे बढ़ने के लिए भरोसा चाहिए.”

सऊदी अरब के शहर जेद्दा में काम करने वाले एक स्वास्थ्यकर्मी ने कहा कि इस क्षेत्र में रहने वाला भारतीय समुदाय काफी हद तक यहीं बना हुआ है और उसने घबराहट नहीं दिखाई है. उन्होंने कहा, “लोग जानते हैं कि यह एक गुजरने वाला दौर है और उनके हित इतने बड़े हैं कि वे इस क्षेत्र को छोड़कर नहीं जा सकते.”

उनके अनुसार यह संकट आगे चलकर नए अवसर भी पैदा कर सकता है, हालांकि अभी सबसे बड़ी चिंता तुरंत युद्ध बंद होने की है. लेकिन हाल के दिनों की घटनाओं को देखकर ऐसा नहीं लगता कि युद्ध जल्द खत्म होगा.

फिर भी कुछ लोग, जिन्हें प्लेन में सीट मिल गई है और जिन्हें वर्क फ्रॉम होम की सुविधा मिल गई है, वे अपने देश लौटने का फैसला कर रहे हैं. बुधवार को खबर आई कि एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और ओमान के लिए नियमित और विशेष उड़ानें चलाएंगे, क्योंकि खाड़ी क्षेत्र की कुछ उड़ानें अभी “अस्थायी रूप से बंद” हैं.

दोनों एयरलाइनों ने कहा कि वे जेद्दा (सऊदी अरब) और मस्कट (ओमान) के लिए अपनी नियमित उड़ानें जारी रखेंगी, जिनमें भारत और जेद्दा के बीच 16 उड़ानें भी शामिल हैं.

यह भी पढ़ें: ईद का त्योहार, अफगानिस्तान-पाकिस्तान पांच दिन के लिए हथियार रखने को तैयार

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com