अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद गालिबाफ
- अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर कुछ घंटों में खत्म होने वाला है, आगे वार्ता होगी या नहीं, अभी साफ नहीं है
- खबरें हैं कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस्लामाबाद वार्ता के लिए बुधवार को पहुंच सकते हैं
- ईरान ने कहा है कि वह धमकी भरे माहौल में वार्ता नहीं करेगा और जंग में नए पत्ते खोलने को तैयार है
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हमें बताएं।अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर कुछ ही घंटों में खत्म होने वाला है. इसे आगे बढ़ाया जाएगा या नहीं, फिलहाल साफ नहीं है. अनिश्चिचता इस पर भी है कि बुधवार को पाकिस्तान के इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान के बीच दूसरे दौर की वार्ता होगी या नहीं. दोनों ही समझौता चाहते हैं, लेकिन अपने रुख से टस से मस होने को तैयार नहीं हैं. तेवर और तीखी बयानबाजी इस आग में घी का काम कर रही है. हालांकि उम्मीद की लौ अभी बुझी नहीं है. आइए बताते हैं वार्ता को लेकर ताजा अपडेट्स-
- खबरें हैं कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस वार्ता के लिए बुधवार को इस्लामाबाद पहुंच सकते हैं. अल जजीरा ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि वेंस मंगलवार शाम को वॉशिंगटन से रवाना हो सकते हैं और देर रात या फिर बुधवार सुबह पाकिस्तान पहुंचेंगे. उनके साथ ट्रंप के दो विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और दामाद जेरेड कुशनर भी पाकिस्तान जा सकते हैं. अमेरिका के कई सैन्य विमान पहले ही पाकिस्तान में उतर चुके हैं.
- इधर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप विरोधाभासी बयान दे रहे हैं. उन्होंने रविवार को कहा था कि जेडी वेंस पाकिस्तान जाने के रास्ते में हैं. हालांकि कुछ देर बाद ये बात गलत साबित हो गई क्योंकि वेंस व्हाइट हाउस में नजर आए थे. इसके बाद ट्रंप ने संकेत दिए थे कि ईरान से सीधे बात करने के लिए वह खुद इस्लामाबाद आ सकते हैं. ट्रंप ने द न्यूयॉर्क पोस्ट से कहा था कि मुझे उनसे मिलने में कोई समस्या नहीं है.
- वार्ता को लेकर अमेरिका भले ही तैयार नजर आ रहा है, लेकिन ईरान का कहना है कि वह धमकी भरे माहौल में बातचीत नहीं करेगा. प्रमुख वार्ताकार मोहम्मद बागेल गालिबाफ ने साफ कह दिया है कि ईरान अब जंग में नए पत्ते खोलने की तैयारी कर रहा है. ईरानी न्यूज एजेंसियां बता रही हैं कि अभी तक ईरान सरकार ने अभी तक इस्लामाबाद वार्ता के लिए अपना दल भेजने या न भेजने को लेकर कोई फैसला नहीं किया है.
- इस्लामाबाद वार्ता की राह में होर्मुज स्ट्रेट की नाकाबंदी और ट्रंप का बड़बोलापन फिलहाल सबसे बड़ा रोड़ा नजर आ रहा है. ट्रंप की सेना द्वारा ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी को लेकर ईरान बेहद नाराज है. ईरान के होर्मुज स्ट्रेट खोलने के ऐलान के बाद भी ट्रंप ने साफ कह दिया था कि जब तक पक्की डील नहीं हो जाती घेराबंदी जारी रहेगी. देर रात अमेरिकी सेना ने ईरान के एक बड़े जहाज को भी कब्जे में ले लिया.
- डोनाल्ड ट्रंप की तीखी बयानबाजी जारी है. कुछ देर पहले ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक लाइन की पोस्ट में ईरान पर सीजफायर तोड़ने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि ईरान ने अनगिनत बार युद्धविराम का उल्लंघन किया है. इससे पहले ट्रंप ने साफ कह दिया था कि सीजफायर को आगे बढ़ाने की संभावना बहुत कम है. मीडिया से बातचीत में उन्होंने ये भी कहा कि अगर सीजफायर खत्म हो जाता है तब बहुत से बम फटने के लिए तैयार हैं.
- ईरान के एक अधिकारी के हवाले से वॉशिंगटन पोस्ट ने कहा है कि दोनों पक्ष समझौते की रूपरेखा पर काफी हद तक सहमत हैं, लेकिन सार्वजनिक रूप से ट्रंप की तीखी बयानबाजी और वार्ता को दबाव में ईरान के सरेंडर के तौर पर दिखाने की कोशिश माहौल बिगाड़ रही हैं. मध्यस्थ पाकिस्तान भी प्रयास में है वार्ता दोनों के लिए विन-विन सिचुएशन के रूप में नजर आए.
- पाकिस्तान में वार्ता की तैयारियां पूरी हैं. बताया जा रहा है कि 10 हजार से ज्यादा सुरक्षाकर्मी विदेशी डेलिगेट्स की सिक्योरिटी के लिए तैनात किए गए हैं. कुछ खबरें बताती हैं कि अमेरिका और ईरान की सिक्योरिटी टीमें पहले से ही इस्लामाबाद में मौजूद हैं और सुरक्षा बंदोबस्त देख रही हैं. पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने भी मंगलवार को अमेरिका और ईरान के राजदूतों से मुलाकात कर चर्चा की है.
- वार्ता की स्थिति फिलहाल ऐसी है कि अमेरिका और ईरान दोनों समझौता भी करना चाहते हैं, और झुकते हुए भी नहीं दिखना चाहते. इस्लामाबाद डेलिगेशन भेजने को लेकर भी यही स्थिति है. दोनों ही एकदूसरे का इंतजार कर रहे हैं कि पहले टीम कौन भेजेगा. अमेरिका पहले अपना प्रतिनिधिमंडल भेजना नहीं चाह रहा है क्योंकि उसे लग रहा है कि अगर ईरान ने ऐन मौके पर गच्चा दे दिया तो वार्ता की मेज पर अकेले बैठे अमेरिका की बहुत बुरी फजीहत हो जाएगी.
- उपराष्ट्रपति वेंस की अगुआई में विटकॉफ और कुशनर समेत अन्य अधिकारियों के दल ने पिछली बार इस्लामाबाद में ईरान से वार्ता की थी. 21 घंटे तक चली माथापच्ची के बाद कोई नतीजा नहीं निकल सका था. अमेरिका ने ईरान के सामने अपनी परमाणु सामग्री सौंपने, 20 साल तक परमाणु कार्यक्रम बंद करने, बिनी किसी शर्त के होर्मुज स्ट्रेट खोलने जैसी कड़ी शर्तें रखी थीं. वहीं ईरान 5 साल के लिए परमाणु कार्यक्रम रोकने, परमाणु हथियार न बनाने का वादा करने और सशर्त होर्मुज खोलने के लिए राजी था. लेकिन बात नहीं बनी.
- अमेरिका-ईरान के इस झगड़े को सुलझाने के लिए कई अन्य देश भी आगे आए हैं. कतर ने कहा है कि होर्मुज संकट को सुलझाने की जिम्मेदारी किसी एक देश की नहीं बल्कि सबकी साझा जिम्मेदारी है. कतर ने कहा है कि वह मामले को लेकर अमेरिका और गल्फ के अन्य देशों के सीधे संपर्क में है. उधर जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल ने भी कहा है कि अमेरिका वार्ता के लिए तैयार है, उनके उपराष्ट्रपति इस्लामाबाद आने के इच्छुक हैं. ईरान को इस अवसर का रचनात्मक उपयोग करना चाहिए. संवाद से ही तनाव कम किया जा सकता है.
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