अमेरिका और ईरान के बीच 17 जून को 14 प्वाइंट के एक मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टेंडिंग (एमओयू) पर सहमति बनी थी. इसके बाद भी होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही को लेकर दोनों देश आमने-सामने आ गए. दोनों ने इक दूसरे के जहाजों और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया.दोनों देशों ने एक दूसरे पर संघर्ष विराम का उल्लंघन करने का आरोप लगाया.गलतफहमियों को दूर करने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का पहला चरण स्वीट्जरलैंड में आयोजित किया गया था. पाकिस्तान और कतर इसमें मध्यस्थ की भूमिका में थे. तनाव कम करने के लिए अमेरिका और ईरान मंगलवा से कतर की राजधानी दोहा में तकनीकी स्तर की बातचीत कर रहे हैं. यह बातचीत बुधवार को भी जारी रही. बातचीत के केंद्र में होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही और ईरान की फ्रीज की हुई संपत्तियों को फ्री करना शामिल है.
अमेरिका-ईरान में एमओयू
यह तकनीकी बातचीत 17 जून को हुए एमओयू पर आधारित है. इस एमओयू का मकसद फरवरी में शुरू हुए युद्ध को रोकना और होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों का सुचारू संचालन है. इस एमओयू के तहत दोनों देश युद्धविराम को 60 दिन के लिए बढ़ाने पर सहमति हुए थे. इस दौरान वे विस्तार से बातचीत भी करेंगे. युद्धविराम और होर्मुज स्ट्रेट के अलावा बातचीत के अन्य प्रमुख मुद्दों में ईरान की विदेशों में फ्रीज संपत्तियां, ईरान पर लगी पाबंदियां और ईरान का परमाणु कार्यक्रम प्रमुख हैं.
इस बातचीत के लिए अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुश्नर दोहा पहुंचे हैं. लेकिन वो इन तकनीकी वार्ताओं में शामिल नहीं हैं. दोनों ने मंगलवार को कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान बिन जासिम अल थानी से भेंट की थी. इस बातचीत में दोनों देशों के वार्ताकार सीधे तौर पर नहीं मिल रहे हैं. इसकी जगह वो इस वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे पाकिस्तान और कतर के अधिकारियों के जरिए अपनी बात रख रहे हैं.एमओयू पर दस्तखत होने के बाद भी दोनों देशों में तनाव बना हुआ है. इसकी वजह होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही, ईरान पर अमेरिकी हमला, बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ईरानी हमला और लेबनान में इजरायल की सैन्य कार्रवाई है.
अमेरिका का क्या कहना है
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा है कि बातचीत का नतीजा चाहे जो भी हो, ट्रंप प्रशासन मजबूत स्थिति में है. उन्होंने कहा कि अमेरिका चाहता है कि बातचीत सफल हो, लेकिन अगर नहीं भी होता है तो भी अमेरिका की स्थिति ईरान से कहीं बेहतर रहेगी. अमेरिका का दावा है कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम और उसकी सैन्य क्षमता लगभग खत्म हो चुकी है.अमेरिका का कहना है कि अगर स्थायी समझौता हो जाता है, तो ईरान में बड़े और स्थायी बदलाव देखने को मिलेंगे.
ईरान का कहना है कि वह कतर की मध्यस्थता में अमेरिका के साथ हुए समझौते को लागू करने और अपनी जमी हुई संपत्तियां वापस पाने के लिए अप्रत्यक्ष बातचीत करेगा. ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने कहा कि पहले कदम के तौर पर अमेरिका को ईरान के छह अरब डॉलर के जमे हुए फंड जारी करने चाहिए.
किसके पास है ईरान का फ्रीज फंड
ईरान के फ्रीज फंड पर कतर के प्रधानमंत्री के सलाहकार और विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता डॉक्टर माजिद बिन मोहम्मद अल अंसारी ने मंगलवार को कहा था कि यह फंड 2023 के अमेरिका-ईरान समझौते से जुड़ा है.इसमें कतर में मानवीय चैनल स्थापित किया गया था. कतर इन फंड्स का मालिक नहीं है बल्कि समझौते के तहत खातों का प्रबंधन करने वाला वित्तीय मध्यस्थ है. फंड्स का ट्रांसफर दोनों पक्षों की सहमति और वार्ता की प्रगति पर निर्भर करता है, जो अभी नहीं हुई है.
ये भी पढें: तमिलनाडु में विजय सरकार गिराने की साजिश? TVK के विधायक को 35 करोड़ रुपये का मिला ऑफर, तीन गिरफ्तार
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं