- अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान के इस्लामाबाद में शनिवार को वार्ता आयोजित की जाएगी
- वार्ता सेरेना होटल या प्रधानमंत्री आवास में हो सकती है, जहां दोनों देशों के प्रतिनिधि मौजूद रहेंगे
- ईरान की तरफ से संसद अध्यक्ष और विदेश मंत्री सहित कई वरिष्ठ अधिकारी वार्ता में भाग लेंगे
अमेरिका और ईरान के बीच शनिवार को पाकिस्तान के इस्लामाबाद में वार्ता होगी. रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि इस्लामाबाद का सेरेना होटल प्रतिनिधिमंडलों की मेजबानी करेगा. राजधानी के रेड जोन में विदेश मंत्रालय के बगल में स्थित ये होटल महत्वपूर्ण सरकारी इमारतों और दूतावासों के बीच स्थित है. इस होटल को बुधवार शाम से रविवार तक के लिए बुक कर लिया गया है और मेहमानों से होटल खाली करा लिया गया है. ये भी बताया जा रहा है कि चूंकि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री मेजबान हैं, इसलिए बातचीत हिलटॉप पर स्थित प्रधानमंत्री आवास में भी हो सकती है. सूत्रों के अनुसार, ईरान की तरफ से ईरानी संसद के अध्यक्ष और पूर्व सैन्य कमांडर मेजर जनरल कलिबफ मुहम्मद बाकिर कलिबफ, विदेश मंत्री अब्बास अराघची, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव, उप विदेश मंत्री और इस्लामाबाद में ईरान के राजदूत मौजूद होंगे.
क्या आमने-सामने होगी बातचीत?
वहीं अमेरिका की तरफ से उप राष्ट्रपति जेडी वेंस, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शीर्ष दूत स्टीव विटकॉफ और दामाद जेरेड कुशनर इस युद्धविराम वार्ता में हिस्सा लेंगे. सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ शनिवार सुबह सबसे पहले वार्ता की औपचारिक शुरूआत करेंगे. वो दोनों पक्षों के साथ अलग-अलग प्रारंभिक बैठकें करेंगे. इसके बाद पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार दोनों देशों के नेताओं के बीच अलग-अलग कमरे में समन्वय बनाने की कोशिश करेंगे. एक बार दोनों के बीच समन्वय बन जाने पर ही आमना-सामना कराया जाएगा. पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर इस मीटिंग का हिस्सा होंगे या नहीं, इस बारे में अब तक कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है.

कितने बजे बातचीत शुरू होगी और कब तक चलेगी
माना जा रहा है शनिवार सुबह बातचीत नौ बजे के आसपास औपचारिक रूप से शुरू होगी और उस दिन मुख्य बातों पर ही फोकस रहेगा. एक बार सहमति बनने के बाद हो सकता है कि दोनों टीम वहां से रवाना हो जाएं और आगे की बातचीत के लिए फिर से दोनों देशों के अधिकारी एक-एक प्वाइंट पर डिस्कस करें. ये भी दावा किया जा रहा है कि ये वार्ता लगातार दो से तीन दिन तक चल सकती है. इसके साथ ही पाकिस्तान ने ऐसी व्यवस्था की है कि ईरान और अमेरिका से कोई भी अधिकारी या नेता बगैर वीजा पाकिस्तान आ सकता है. मतलब इमरजेंसी में अगर ईरान या अमेरिका के किसी नेता या अधिकारी को पाकिस्तान आना पड़ा तो उन्हें वीजा लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी.
क्यों पाकिस्तान बरत रहा गोपनियता
सबसे खास बात ये है कि शुक्रवार को खबरें आईं थीं कि ईरान का प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान पहुंच गया है, मगर अब तक कोई दावा नहीं कर रहा है कि ईरान की तरफ से वार्ता के लिए कौन पहुंचा है. वहीं अमेरिका से आज ये कंफर्म किया गया कि वेंस पाकिस्तान के लिए रवाना हो चुके हैं. माना जा रहा है कि पाकिस्तान में सुरक्षा कारणों और अमेरिका-ईरान में विश्वास की कमी के कारण ज्यादा गोपनियता बरती जा रही है और किसी भी तरह की जानकारी नहीं दी जा रही है. पाकिस्तान को भी पता है कि अगर उसकी जमीन पर किसी भी नेता को कुछ भी हुआ तो वो देश पाकिस्तान को कभी माफ नहीं करेगा. यही कारण है कि खुद मुनीर और शहबाज शरीफ एक-एक बात का ध्यान रख रहे हैं. वहीं अमेरिका और ईरान फिलहाल अपनी तरफ से धमकियां देकर अपनी शर्तें मनवाने के लिए लगातार दबाव बना रहे हैं.
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