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ईरान के परमाणु बम बनाने लायक शुद्ध यूरेनियम का क्या होगा? यह रही शांति डील की सबसे अहम बात

अमेरिका और ईरान के बीच जंग आधिकारिक रूप से खत्म हो चुकी है. दोनों देशों ने 14 प्वाइंट वाले मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) पर साइन कर दिया है.

ईरान के परमाणु बम बनाने लायक शुद्ध यूरेनियम का क्या होगा? यह रही शांति डील की सबसे अहम बात
US Iran Deal: अमेरिका और ईरान में शांति डील पर मुहर (फोटो- NDTV)
  • अमेरिका और ईरान ने शांति डील पर मुहर लगाई, इस MoU में कुल 14 प्वाइंट हैं
  • इसके साथ 60 दिनों का सीजफायर शुरू होगा जिसमें दोनों देश आगे फाइनल डील के लिए परमाणु वार्ता करेंगे
  • MoU के तहत ईरान के लगभग बम बनाने लायक स्तर के यूरेनियम को कम संवर्धित (लोअर ग्रेड के) यूरेनियम में बदला जाएगा

अमेरिका- ईरान की जंग अब आधिकारिक रूप से खत्म हो चुकी है. दोनों देशों के राष्ट्रपति, डोनाल्ड ट्रंप और मसूद पेजेशकियान ने अलग-अलग इंग्लिश और फारसी में 14 प्वाइंट वाले मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) पर साइन किया है. अब इसके साथ 60 दिनों का सीजफायर शुरू होगा जिसमें दोनों देश आगे फाइनल डील के लिए परमाणु वार्ता करेंगे. इन सबके बीच सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर ईरान के पास मौजूद उन परमाणु बम बनाने लायक शुद्ध (संवर्धित या एनरिच्ड) यूरेनियम का क्या होगा, जो पिछले साल से अमेरिकी हमलों के बाद न्यूक्लियर ठिकानों के नीचे दबे पड़े हैं.  MoU के 8वें प्वाइंट में इसको लेकर आगे की प्लानिंग बताई गई है.

ईरान के एनरिच्ड यूरेनियम का क्या होगा?

ईरान के साथ समझौते के इस आधिकारिक दस्तावेज में कहा गया है कि लगभग बम बनाने लायक स्तर के यूरेनियम को कम संवर्धित (लोअर ग्रेड के) यूरेनियम में बदला जाएगा. इस प्रक्रिया को डाउन-ब्लेंडिंग (Down-blending) कहा जाता है. यह काम अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की निगरानी में होगा और वहीं पर होगा जहां वे दबे पड़े हैं. यानी ईरान के अंदर ही. बता दें कि IAEA संयुक्त राष्ट्र (UN) की परमाणु निगरानी संस्था है.

ईरान ने यह भी वादा दोहराया है कि वह कभी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा.

ट्रंप ने इसपर क्या कहा?

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के पास मौजूद बहुत अधिक शुद्ध यूरेनियम को नष्ट करना उतना महत्वपूर्ण नहीं है, जितना यह सुनिश्चित करना कि ईरान परमाणु हथियार न बना सके. बुधवार को पेरिस में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप से पूछा गया कि 'परमाणु मामले की बची हुई समस्या' को सुलझाना कितना जरूरी है. इस पर उन्होंने कहा, "यह उतना महत्वपूर्ण नहीं है, क्योंकि उस यूरेनियम तक पहुंचना बहुत मुश्किल है."

ट्रंप ने आगे कहा, "मुझे नहीं लगता कि कोई भी आसानी से उस तक पहुंच सकता है. हम पहुंच सकते हैं, लेकिन इसके लिए बहुत मेहनत और काफी समय लगेगा."

इसके बाद उन्होंने पिछले साल ईरान के परमाणु ठिकानों पर अमेरिका के हमलों का जिक्र करते हुए कहा, "B-2 बॉम्बर प्लेन और उन शानदार पायलटों ने अपना काम कर दिया. अब आप समझते हैं कि उन्होंने अपना काम पूरा किया. ट्रंप ने फिर कहा कि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ईरान के पास परमाणु हथियार न हो.

यह भी पढ़ें: अमेरिका-ईरान की जंग खत्म होने पर मुहर, प्रेसिडेंट ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति पेजेशकियां ने शांति समझौते पर किए दस्तखत


 

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Ashutosh Kumar Singh
Chief Sub Editor
आशुतोष कुमार सिंह NDTV इंडिया के साथ बतौर चीफ सब-एडिटर काम करते हैं. इससे पहले द क्विंट के साथ असिस्टेंट एडिटर के रूप में काम कर चुके हैं. देहाती यादो... और पढ़ें
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