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भारत को महंगा तेल खरीदने के लिए मजबूर कर रहा US... रूसी विदेश मंत्री ने बताया आगे का प्लान

रूस का यह बड़ा बयान ट्रंप के उस बयान के बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के तहत नई दिल्ली ने रूस के साथ तेल व्यापार बंद करने पर सहमति जताई है.

भारत को महंगा तेल खरीदने के लिए मजबूर कर रहा US... रूसी विदेश मंत्री ने बताया आगे का प्लान
लावरोव ने दावा किया कि वाशिंगटन का उद्देश्य ऊर्जा मार्गों पर नियंत्रण करके 'आर्थिक वर्चस्व हासिल करना' है.
  • रूस ने अमेरिकी सरकार की ऊर्जा उत्पादों पर वर्चस्व स्थापित करने की नीति की कड़ी आलोचना की है
  • रूसी विदेश मंत्री ने कहा कि अमेरिका ने यूक्रेन प्रस्ताव स्वीकार करने के बाद भी रूस पर नए प्रतिबंध लगाए हैं
  • अमेरिका भारत, चीन, इंडोनेशिया और ब्राजील को रूसी सस्ती ऊर्जा खरीदने से रोकने का प्रयास कर रहा है
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रूस ने भारत और अन्य देशों को रूसी तेल खरीदने से रोकने के लिए अमेरिकी सरकार डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की कड़ी निंदा की है. रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने ट्रंप टीम पर आर्थिक वर्चस्व हासिल करने के लिए टैरिफ, प्रतिबंध और प्रत्यक्ष रोक जैसे "दबावपूर्ण" उपायों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया.

टीवी ब्रिक्स से बात करते हुए रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने दावा किया कि पिछले साल ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच अलास्का में हुई वार्ता के दौरान, मॉस्को ने यूक्रेन पर अमेरिकी प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया था. उन्होंने कहा कि अमेरिकी शर्तों को स्वीकार करने के बावजूद, वाशिंगटन ने मॉस्को पर नए प्रतिबंध लगा दिए और अन्य देशों को रूसी ऊर्जा खरीदने से रोकने की कोशिश की.

लावरोव ने क्या कहा

  1. समाचार एजेंसी स्पुतनिक के अनुसार उन्होंने कहा, "वे (अमेरिका) हमसे कहते हैं कि यूक्रेन समस्या का समाधान होना चाहिए. हमने अमेरिकी प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया... अमेरिकी रुख हमारे लिए महत्वपूर्ण था. उनके प्रस्ताव को स्वीकार करके, हमें लगा कि हमने यूक्रेनी मुद्दे को सुलझाने और व्यापक स्तर पर पारस्परिक रूप से लाभकारी सहयोग की ओर बढ़ने का काम पूरा कर लिया है." 
  2. पुतिन के सहयोगी ने कहा, “अब वास्तविकता इसके बिल्कुल विपरीत है. नए प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं और खुले समुद्र में टैंकरों के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन का उल्लंघन करते हुए 'युद्ध' छेड़ा जा रहा है. वे भारत और हमारे अन्य साझेदारों को सस्ते, किफायती रूसी ऊर्जा संसाधनों (यूरोप पर लंबे समय से प्रतिबंध लगा हुआ है) को खरीदने से रोकने की कोशिश कर रहे हैं और उन्हें अत्यधिक कीमतों पर अमेरिकी एलएनजी (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) खरीदने के लिए मजबूर कर रहे हैं. हमें इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए, भारत, चीन, इंडोनेशिया और ब्राजील की तरह, अमेरिका जैसी प्रमुख शक्तियों सहित सभी देशों के साथ सहयोग के लिए खुला रहना होगा. हम ऐसी स्थिति में हैं, जहां अमेरिकी खुद ही रास्ते में आर्टिफिशियल बाधाएं खड़ी कर रहे हैं.”
  3. लावरोव ने दावा किया कि वाशिंगटन का उद्देश्य ऊर्जा मार्गों पर नियंत्रण करके 'आर्थिक वर्चस्व हासिल करना' है. इन उपायों को दमनकारी और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा के विपरीत बताते हुए लावरोव ने कहा कि टैरिफ, प्रतिबंध, प्रत्यक्ष निषेध और कुछ देशों को अन्य देशों के साथ व्यापार करने से रोकना अनुचित है.

भारत का रुख

रूस का यह बड़ा बयान ट्रंप के उस बयान के बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के तहत नई दिल्ली ने रूस के साथ तेल व्यापार बंद करने पर सहमति जताई है. हालांकि, भारत ने यह स्पष्ट किया है कि ऊर्जा संबंधी निर्णयों में “राष्ट्रीय हित” सर्वोपरि रहेगा और इस बात पर जोर दिया कि देश की ऊर्जा नीति के मुख्य आधार “पर्याप्त उपलब्धता, उचित मूल्य निर्धारण और आपूर्ति की विश्वसनीयता” हैं. विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत तेल और गैस क्षेत्र में शुद्ध आयातक है और एक विकासशील अर्थव्यवस्था होने के नाते, उसे अपने संसाधनों की उपलब्धता और मुद्रास्फीति पर आयात निर्भरता के प्रभाव के प्रति सचेत रहना चाहिए. मंत्रालय ने आगे कहा कि भारतीय उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है.

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