- ब्रिटेन का दावा है कि रूस की जासूसी पनडुब्बियां एक महीने से ब्रिटेन के आसपास समुद्र में सक्रिय थीं
- इन पनडुब्बियों का निशाना ब्रिटेन की डेटा और ऊर्जा के लिए अहम अंडरवॉटर केबल और पाइपलाइन थीं
- ब्रिटेन ने नॉर्वे और अन्य देशों के साथ अभियान चलाया, युद्धपोत और जहाज तैनात किए, उसके बाद ये वापस गईं
पूरी दुनिया का ध्यान जब मिडिल ईस्ट की जंग पर था, उस वक्त रूस एक नए खुफिया मिशन में जुटा था. ब्रिटेन ने इसे बड़ी अंडरवॉटर साजिश बताते हुए दावा किया है कि पिछले एक महीने से रूस की हमलावर और जासूसी पनडुब्बियां अटलांटिक महासागर में मंडरा रही थीं. इनके निशाने पर ब्रिटेन के आसपास समंदर के नीचे बिछी समुद्री केबल और पाइपलाइन थीं. इसका पता चलते ही ब्रिटिश सेना ने अपने जंगी जहाज तैनात कर दिए, जिसके बाद रूसी पनडुब्बियों को लौटने पर विवश होना पड़ा.
UK में खुफिया मिशन पर रूसी पनडुब्बियां
ब्रिटेन के रक्षा मंत्री जॉन हीली ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि पिछले एक महीने से रूस की अकुला क्लास की एक हमलावर पनडुब्बी और दो खास जासूसी पनडुब्बियां उत्तरी अटलांटिक में समुद्र के नीचे बिछी केबल्स और पाइपलाइनों के ऊपर मंडरा रही थीं. हमलावर पनडुब्बी को झांसा देने के लिए तैनात किया गया था, जबकि असली काम खुफिया पनडुब्बियां कर रही थीं. वो ब्रिटेन की समुद्री सीमा और आसपास के इलाके में नापाक गतिविधियों को अंजाम देने की फिराक में थीं.
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अंडरवॉटर केबल, पाइपलाइन कितनी अहम?
- ब्रिटिश रक्षा मंत्री का दावा है कि रूसी पनडुब्बियों के निशाने पर कथित तौर पर अंडरवॉटर फाइबर केबल और पाइपलाइन थीं.
- ये केबल्स और पाइपलाइन ब्रिटेन के इंटरनेट डेटा और ऊर्जा सप्लाई के लिए बेहद अहम हैं.
- ब्रिटेन की समुद्री सीमा और आसपास के इलाके में लगभग 60 अंडरवॉटर केबल बिछी हैं.
- यूके का रोजाना का लगभग 90 फीसदी इंटरनेट ट्रैफिक इन्हीं केबल्स के जरिए मिलता है.
- कई देशों के ग्लोबल बैंकिंग, व्यापार और इंटरनेट डेटा के लिए ये जीवन रेखा की तरह हैं.

ब्रिटेन ने ऐसे नाकाम कर दी साजिश
जॉन हीली ने दावा किया कि ब्रिटेन ने हफ्तों पहले ही रूसी पनडुब्बियों का पता लगा लिया था और हर गतिविधि पर नजर रखे हुए था. रूस के इरादों की भनक लगते ही ब्रिटेन ने नॉर्वे और अन्य सहयोगियों से संपर्क साधा और घेराबंदी शुरू कर दी. रॉयल नेवी ने इस ऑपरेशन के लिए अपने टाइप 23 फ्रिगेट HMS सेंट अल्बांस, RFA टाइडस्प्रिंग और मर्लिन हेलीकॉप्टरों को मोर्चे पर तैनात किया. P8 जासूसी विमानों से नजर रखी गई. करीब 500 सैन्यकर्मियों ने चौबीसों घंटे पनडुब्बियों की निगरानी की. जानबूझकर अपनी मौजूदगी जाहिर की ताकि रूसी सेना को पता चल जाए कि उसकी जासूसी अब गुप्त नहीं रह गई है. इसके बाद रूसी पनडुब्बियां वापस लौट गईं.

ब्रिटिश पीएम ने दी सीधी चेतावनी
प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि वह रूसी राष्ट्रपति पुतिन की आक्रामकता का खामियाजा ब्रिटेन के लोगों को नहीं भुगतने देंगे. रूस हमारे संकल्प की परीक्षा लेने की कोशिश कर रहा है. हमारी सरकार उसे बेनकाब करने से पीछे नहीं हटेंगी. उनका कहना था कि ब्रिटिश सशस्त्र बल दुनिया की बेहतरीन फौज में से एक हैं और इसे लेकर किसी के मन में कोई कोई संदेह नहीं होना चाहिए.

रक्षा मंत्री ने दी जवाबी कार्रवाई की धमकी
ब्रिटिश रक्षा मंत्री जॉन हीली ने कहा कि मैं रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से कहना चाहता हूं कि हम आपको देख सकते हैं, आपकी उन हरकतों को देख सकते हैं, जो समंदर के नीचे आप कर रह थे. आपको समझ लेना चाहिए कि अगर आप उन्हें नुकसान पहुंचाने का प्रयास करेंगे तो इसके गंभीर नतीजे होंगे. अधिकारियों का कहना है कि भले ही पनडुब्बियां लौट गई हैं, लेकिन अगर वो वापस आती हैं तो ब्रिटेन की नेवी और एयरफोर्स जवाबी कार्रवाई के लिए तैयार हैं.
क्या है रूस का खुफिया GUGI प्रोग्राम?
ब्रिटेन का दावा है कि अकुला क्लास की पनडुब्बी के अलावा बाकी दो पनडुब्बियां रूस के डीप सी रिसर्च प्रोग्राम का हिस्सा हैं, जिसे GUGI नाम से जाना जाता है. GUGI के बारे में माना जाता है कि इसका मकसद खास जहाजों और पनडुब्बियों के जरिए सैन्य क्षमताओं को बढ़ाना है. रूस इनका इस्तेमाल समुद्र के नीचे मौजूद इंटरनेट केबल्स और पाइपलाइन जैसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के सर्वे और निगरानी में करता रहा है.
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