- अमेरिका ने ईरान पर हमले से पहले नाटो और ब्रिटेन से कोई संपर्क नहीं किया था, जिससे सैन्य सहयोग की कमी दिखी
- राष्ट्रपति ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखने के लिए कई देशों से युद्धपोत भेजने की उम्मीद जताई है
- तुर्की ने ईरान संघर्ष में शामिल होने से साफ इनकार किया और अपने देश की सुरक्षा को प्राथमिकता बताया
अमेरिका ने ईरान पर हमले से पहले ना तो नाटो से संपर्क किया और ना ही अपने जिगरी ब्रिटेन से. वेनेजुएला में भी ऐसा ही हुआ था. वेनेजुएला की सफलता से उत्साहित होकर ईरान में इजरायल को साथ लेकर अमेरिका जंग के मैदान में कूद पड़ा. उम्मीद थी कि चंद दिनों में ईरान घुटनों पर आ जाएगा और अमेरिका की ताकत का लोहा चीन और रूस जैसे देश भी मान जाएंगे. मगर ईरान ने अरमानों पर पानी फेर दिए. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को सोशल मीडिया पर कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखने के लिए कई देश युद्धपोत भेजेंगे. उन्होंने आशा जताई कि चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन और अन्य देश होर्मुज ब्लॉक को खुलवाने में मदद करेंगे.
पढ़ें ट्रंप का मैसेज
ये वही ट्रंप हैं, जिन्होंने ब्रिटेन को यहां तक कह दिया था कि अब आपकी जरूरत नहीं है. अभी चंद दिनों पहले ही उन्होंने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर लिखा कि एक समय में यूनाइटेड किंगडम हमारा महान सहयोगी होता था. पर वो आज हमारे लिए मिडिल ईस्ट में दो विमानवाहक पोत भेजने पर अभी भी गंभीरता से विचार कर रहा है. यह ठीक है. प्रधानमंत्री स्टार्मर को मैं बता देना चाहता हूं कि अब हमें उनकी जरूरत नहीं है. ट्रंप ने आगे कहा कि लेकिन हम ये बातें याद जरूर रखेंगे. हमें ऐसे लोगों को कोई जरूरत नहीं है जो युद्ध को जीतने के बाद हमारे साथ शामिल होना चाहें.

अब क्यों सभी को बुला रहे ट्रंप
मजेदार बात ये है कि ट्रंप अब चीन से भी आशा जता रहे हैं कि वो ईरान के खिलाफ अपने युद्धपोत भेजेगा. वही चीन जिसको घेरने में ट्रंप दिन-रात एक किए रहते हैं. टैरिफ की शुरूआत उसी से की और अब क्रिटिकल मिनिरल्स से लेकर दुनिया के सप्लाई चेन का राजा बने चीन को पटखनी देने के लिए वेनेजुएला से लेकर पनामा और ग्रीनलैंड पर निगाहें गड़ाए हुए हैं. ट्रंप को ये भी अच्छी तरह से पता है कि ईरान और चीन के संबंध बहुत अच्छे हैं और चीन कभी ईरान के खिलाफ अमेरिका का साथ नहीं देगा. पर फिर भी वो खुलेआम आशा जता रहे हैं. दरअसल, ऐसा कर ट्रंप होर्मुज के ठप होने का ठिकरा अपने सिर से हटाकर दूसरे देशों के सिर मढ़ना चाहते हैं. इससे दबाव बढ़ने पर वो कह सकेंगे कि उन्होंने तो सबको बुलाया पर कोई आया ही नहीं. खास बात ये है कि ट्रंप को खुद उनकी सेना ने भी गच्चा दे दिया. जब ट्रंप ने कहा था कि यूएस नेवी होर्मुज से सभी फंसे जहाजों को एस्कॉर्ट करेगी. मगर अमेरिकी सेना ने कह दिया कि अभी ये मुमकिन नहीं. तो अब ट्रंप ने बॉल फेंकी है.

तुर्की नहीं होगा जंग में शामिल
ट्रंप ने बॉल तो फेंक दी मगर कोई उसे कैच करने को तैयार नहीं है. यहां तक कि उनके सहयोगी देश भी नहीं. नाटो में अमेरिका के पार्टनर तुर्की ने इस जंग से पल्ला झाड़ दिया है. तास न्यूज एजेंसी के अनुसार, तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने रमजान के महीने में आयोजित होने वाले इफ्तार भोज में कहा कि तुर्की सभी खतरों का सामना करने के लिए तैयार है और ईरान को लेकर चल रहे संघर्ष में शामिल होने से बचने के लिए आवश्यक एहतियात बरत रहा है. ईरान द्वारा तुर्की के ऊपर गिराई गई मिसाइल का जिक्र करते हुए एर्दोगन ने कहा, "हम अपने हवाई क्षेत्र के उल्लंघन के किसी भी खतरे से निपटने के लिए आवश्यक सुरक्षा उपाय कर रहे हैं, जैसा कि कल रात हुआ था. हमारा मुख्य कार्य अपने देश को इस खतरे से बचाना है." तुर्की के रक्षा मंत्रालय ने शुक्रवार को बताया कि भूमध्य सागर में नाटो बलों ने ईरान से दागी गई और तुर्की के हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने वाली एक मिसाइल को नष्ट कर दिया. 4 मार्च के बाद से यह तीसरी ऐसी घटना है. तुर्की ने तो फिर भी साफ कर दिया है मगर बाकी देशों ने तो ट्रंप के होर्मुज दावत पर बयान तक जारी नहीं किए हैं. साफ है अकेले-अकेले चले ट्रंप अब युद्ध में अकेला पड़ते दिख रहे हैं.
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