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9 लाख पाउंड कमाई में परिवार को मिल रही 1 वक्त रोटी, आपसी झगड़े में बदहाल देश की कहानी

संयुक्त राष्ट्र समर्थित रिपोर्टों के अनुसार, दक्षिण कोर्डोफान और उत्तरी दारफुर राज्यों में 2 लाख से अधिक लोग अकाल का सामना कर रहे हैं. रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि 2027 तक यह स्थिति आठ शहरों तक फैल सकती है.

9 लाख पाउंड कमाई में परिवार को मिल रही 1 वक्त रोटी, आपसी झगड़े में बदहाल देश की कहानी
24 अक्टूबर 2026 को वाशिंगटन मॉन्यूमेंट पर 'टर्नस्टाइल' की मेग मिल्स ने परफॉर्म किया. 'टर्नस्टाइल' ने फिलिस्तीन, सूडान और लेबनान की मदद के लिए फंड जुटाने के मकसद से इस मुफ्त कॉन्सर्ट का आयोजन किया था. (फोटो-AFP)
  • सूडान में तीन साल से गृहयुद्ध चल रहा है, जो देश की दो सशस्त्र ताकतों के बीच संघर्ष के कारण है
  • राजधानी खार्तूम में गेहूं की कीमतें दोगुनी हो गई हैं और अधिकांश बेकरियां ईंधन की कमी से बंद हैं
  • सूडानी पाउंड की गिरती कीमतों ने गेहूं और ईंधन की आपूर्ति को प्रभावित कर खाद्य सुरक्षा को गंभीर खतरा दिया है

दुनिया भर में सरकारों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. यूरोप के कई देशों में तो हिंसक प्रदर्शन हुए. वजह महंगाई से लेकर शिक्षा में सुधार और अन्य. मगर इन हिंसक प्रदर्शनकारियों को जो अभी मिल रहा है, शायद वो दुनिया के ज्यादातर मुल्कों के नागरिकों को नहीं मिल रहा. एक देश है सूडान. यहां तीन सालों से गृहयुद्ध चल रहा है. ये जनता की वजह से बल्कि देश की दो आर्म्ड फोर्सेज की वजह से चल रहा है.

सूडान में भूख का राज

सूडानी सशस्त्र बल और रैपिड सपोर्ट फोर्स की इस जंग ने सूडान को बेहाल कर दिया है. गृहयुद्ध के कारण यहां हालात सोच से परे खराब हो गए हैं. बढ़ती कीमतों और गिरती मुद्रा (करेंसी) के कारण सौसन महमूद जैसे लोगों के लिए रोटी जैसी बुनियादी ज़रूरत को खरीद पाना भी मुश्किल हो गया है. सूडान की राजधानी खार्तूम में ज्यादातर बेकरियां बंद हो गई हैं, क्योंकि गेहूं की कीमतें बहुत बढ़ गई हैं और ईंधन की भारी कमी है. 44 वर्षीय महमूद बताती हैं कि अब वे और उनके पति अपनी कुल कमाई का पूरा पैसा सिर्फ रोटी खरीदने में ही खर्च कर देते हैं.

तीन बच्चों की मां महमूद कहती हैं, "हालात अब बर्दाश्त के बाहर हो गए हैं. हमने रोटी खाना कम कर दिया है और अब दिन में सिर्फ एक बार ही रोटी खाते हैं. हमें रोटी खरीदने के लिए हर महीने 900,000 पाउंड (88 डॉलर) अलग रखने पड़ते हैं. यह लगभग मेरी और मेरे पति की कुल कमाई के बराबर है."

पिछले एक हफ्ते में खार्तूम में एक रोटी की कीमत 250 सूडानी पाउंड से बढ़कर 500 सूडानी पाउंड हो गई है, यानी यह दोगुनी हो गई है. अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने देश के कुछ हिस्सों में पहले ही घोषित हो चुके अकाल के और फैलने की चेतावनी दी है. साथ ही, लगभग 2 करोड़ (20 मिलियन) लोग गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे हैं. राजधानी में अभी भी चल रही कुछ गिनी-चुनी बेकरियों में से एक में, अबीर मोहम्मद ने बताया, "पहले हम अपने हर रोज के खाने में रोटी खाते थे, लेकिन अब ऐसा करना मुमकिन नहीं है."

सूडान अपना अधिकांश गेहूं आयात करता है, जिससे स्थानीय मुद्रा की कीमत गिरने पर गेहूं की कीमतें भी प्रभावित हो जाती हैं. पिछले एक महीने में, डॉलर के मुकाबले सूडानी पाउंड की कीमत में लगभग 25 प्रतिशत की गिरावट आई है. यह गिरकर 10,500 पाउंड प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया था, लेकिन बुधवार को इसमें थोड़ा सुधार हुआ और यह लगभग 10,200 पाउंड प्रति डॉलर पर आ गया. साल 2023 में, जब अर्धसैनिक बल 'रैपिड सपोर्ट फोर्सेज' और सेना के बीच युद्ध छिड़ा था, तब एक डॉलर की कीमत 500 सूडानी पाउंड थी.

ईंधन की भी कमी, महंगाई बेकाबू

खार्तूम के बाहर, गेहूं की अधिकांश आपूर्ति सहायता के रूप में आती है, लेकिन ईंधन की कमी, बढ़ती कीमतें और लड़ाई के कारण सड़कों के बंद होने से यह आपूर्ति लोगों तक नहीं पहुंच पा रही है. इस युद्ध ने देश को अलग-अलग गुटों के प्रभाव वाले क्षेत्रों में बांट दिया है: सेना का खार्तूम और मध्य व पूर्वी सूडान पर कब्जा है, जबकि आरएसएफ का नियंत्रण पश्चिम के विशाल दारफुर क्षेत्र और दक्षिण के कुछ हिस्सों पर है.

संयुक्त राष्ट्र समर्थित रिपोर्टों के अनुसार, दक्षिण कोर्डोफान और उत्तरी दारफुर राज्यों में 2 लाख से अधिक लोग अकाल का सामना कर रहे हैं. रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि 2027 तक यह स्थिति आठ शहरों तक फैल सकती है. करेंसी की गिरती कीमत ने ईंधन खरीदने की सरकार की क्षमता को और कमजोर कर दिया है, जबकि देश अपनी जरूरत का अधिकांश ईंधन आयात करता है.

एक पेट्रोल स्टेशन के बाहर अपनी कार में बैठे सरकारी कर्मचारी यासर मोहम्मद ने बताया, "मैं सुबह छह बजे से यहीं हूं." शाम 4:00 बजे तक, उन्होंने बताया कि उन्हें अभी तक पेट्रोल नहीं मिल पाया था और इस वजह से उनका एक दिन का काम भी छूट गया.

ओम्दुरमान के एक बाज़ार में, जहां कारोबार काफी सुस्त था, अल-मुरादी अवद ने किराने का सामान खरीदते हुए खराब जीवन-स्थितियों की शिकायत की. अवद ने कहा, "हर खाने में मिलने वाले पोषण की मात्रा कम हो गई है. एक किलो मांस की कीमत 50,000 से 70,000 पाउंड के बीच है. इतने में पहले आप दो किलो मांस खरीद सकते थे, लेकिन आज आप सिर्फ 125 ग्राम ही खरीद पाएंगे."

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