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तुर्की, मिस्र को हक तो ईरान होर्मुज से क्यों नहीं वसूल सकता टोल? स्वेज, पनामा नहर से बोस्फोरस तक जहाजों की आवाजाही पर टैक्स

Hormuz Strait Iran-USA: डील फेल होने से बौखलाए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट पर नाकेबंदी की धमकी दी है तो खामेनेई के देश ने होर्मुज पर अपने एकाधिकार की भी बात दोहराई है. ईरान का साफ कहना है कि वह इस रूट से गुजरने वाले जहाजों से प्रति बैरल तेल पर 1 डॉलर टोल लेने पर विचार कर सकता है.

तुर्की, मिस्र को हक तो ईरान होर्मुज से क्यों नहीं वसूल सकता टोल? स्वेज, पनामा नहर से बोस्फोरस तक जहाजों की आवाजाही पर टैक्स
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  • अमेरिका-ईरान की वार्ता असफल होने के बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर टोल वसूलने की संभावना जताई है
  • अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के अनुसार प्राकृतिक जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों से टोल वसूलना अवैध है
  • मिस्र की स्वेज नहर और पनामा की पनामा नहर जैसे मानव निर्मित नहरों पर टोल वसूलना कानूनी रूप से मान्य है
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नई दिल्ली:

इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान की वार्ता विफल होने के बाद दोनों देशों के बीच तल्खी बढ़ गई है. डील फेल होने से बौखलाए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट पर नाकेबंदी की धमकी दी है तो खामेनेई के देश ने होर्मुज पर अपने एकाधिकार की भी बात दोहराई है. ईरान का साफ कहना है कि वह इस रूट से गुजरने वाले जहाजों से प्रति बैरल तेल पर 1 डॉलर टोल लेने पर विचार कर सकता है. ईरान की होर्मुज पर पकड़ के बीच कुछ ऐसे देश भी हैं जो उसी की राह पर चलकर ट्रांजिट पैसेज के नाम पर टोल वसूलते हैं. तुर्की और पनामा उनमें से कुछ देश हैं. तो ऐसे में सवाल उठता है कि अगर तुर्की और पनामा जैसे देश ट्रांजिट पैसेज के नाम पर शुल्क वसूलते हैं तो ईरान होर्मुज स्ट्रेट पर टोल लागू क्यों नहीं कर सकता?

ये देश भी वसूलते हैं टैक्स, आसान भाषा में समझिए समुद्री कानून

अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून काफी जटिल हैं. दुनिया के अधिकांश समुद्री रास्तों (Straits) से गुजरने के लिए 'ट्रांजिट पैसेज' (Transit Passage) के अधिकार के तहत कोई भी देश टोल नहीं वसूल सकता, लेकिन कुछ मानव निर्मित नहरें और विशेष संधियों वाले रास्ते इसके अपवाद हैं.

स्वेज नहर (Suez Canal), मिस्र 
➔यह पूरी तरह से मिस्र के नियंत्रण में है. यह भूमध्य सागर और लाल सागर(Red Sea) को जोड़ता है. यहां जहाज के आकार, वजन और प्रकार के आधार पर लाखों डॉलर का टोल वसूला जाता है। (अप्रैल 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, मिस्र ने कचरा प्रबंधन जैसे नए शुल्क भी लागू किए हैं).

पनामा नहर (Panama Canal)
➔अटलांटिक और प्रशांत महासागर को जोड़ने वाली यह नहर पनामा सरकार के लिए आय का मुख्य स्रोत है. यहां 'स्लॉट नीलामी' और ट्रांजिट फीस के रूप में भारी वसूली होती है.

तुर्की स्ट्रेट्स (Bosphorus & Dardanelles)
➔उत्तर-पश्चिमी तुर्की में स्थित दो रणनीतिक जलमार्ग—बोस्फोरस (Bosphorus) और डार्डानेल्स (Dardanelles)—हैं, जो काला सागर को मरमारा और एजियन सागर (भूमध्य सागर) से जोड़ते हैं.हालांकि ये प्राकृतिक रास्ते हैं, लेकिन 1936 की मॉन्ट्रो कन्वेंशन (Montreux Convention) के तहत तुर्की को यहां से गुजरने वाले जहाजों से सैनिटरी निरीक्षण, लाइटहाउस और बचाव सेवाओं के नाम पर शुल्क लेने का अधिकार है. (हाल ही में तुर्की ने इन शुल्कों में कई गुना बढ़ोतरी की है).

कोरिंथ नहर (Corinth Canal), ग्रीस
➔यह एक छोटी नहर है जहां से गुजरने के लिए ग्रीस टोल वसूलता है.

वे अंतरराष्ट्रीय 'स्ट्रेट' जहां टोल नहीं लिया जाता
UNCLOS (United Nations Convention on the Law of the Sea) के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय नेविगेशन के लिए उपयोग किए जाने वाले प्राकृतिक रास्तों में 'ट्रांजिट पैसेज' का अधिकार होता है, जिसका अर्थ है कि तटीय देश वहां टोल नहीं वसूल सकते.

मलक्का जलडमरूमध्य (Strait of Malacca): 
➔इंडोनेशिया, मलेशिया और सिंगापुर इसके किनारे हैं, लेकिन वे यहां से गुजरने वाले जहाजों से कोई टोल नहीं लेते.

होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz): 
➔अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार यहां टोल लेना अवैध है.हालांकि, हालिया (अप्रैल 2026) भू-राजनीतिक तनाव के बीच ईरान ने टोल वसूलने की मांग या प्रस्ताव रखा है, जिसका अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय समुदाय कड़ा विरोध कर रहे हैं.

जिब्राल्टर जलडमरूमध्य (Strait of Gibraltar): 
➔स्पेन और मोरक्को के बीच स्थित इस रास्ते पर कोई टोल नहीं है.

इंग्लिश चैनल (English Channel)
➔ब्रिटेन और फ्रांस इसके किनारे हैं, यहां भी कोई टोल नहीं वसूला जाता.

इन्हें भी समझिए
➔तटीय देशों के क्षेत्रीय समुद्र (12 समुद्री मील) से गुजरते समय कुछ प्रतिबंध हो सकते हैं।

➔होर्मुज या मलक्का जैसे रास्तों में जहाजों को बिना किसी बाधा या 'टोल' के निरंतर और त्वरित पारगमन का अधिकार है.

➔ स्वेज और पनामा जैसी नहरें 'Internal Waters' मानी जाती हैं, इसलिए वहां के देश अपनी मर्जी से टोल वसूल सकते हैं.

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क्या कहता है कानून? 

अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून को नियंत्रित करने वाला संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन (UNCLOS) कहता है कि किसी जलडमरूमध्य के किनारे बसे देश जहाजों को सिर्फ वहां से गुजरने की अनुमति के बदले शुल्क नहीं मांग सकते. हालांकि, ये देश कुछ सीमित सेवाओं के लिए शुल्क ले सकते हैं, जैसे
➔जहाज को रास्ता दिखाने (पायलटेज) की सेवा
➔टग बोट की मदद
➔बंदरगाह से जुड़ी सेवाएं

लेकिन ये शुल्क भी किसी खास देश के जहाजों पर ज्यादा नहीं लगाए जा सकते यानी सभी देशों के लिए नियम समान होने चाहिए. नहरों (Canals) और जलडमरूमध्यों (Straits) के नियम अलग‑अलग होते हैं.नहरें प्राकृतिक नहीं होतीं, बल्कि इंसान बनाते हैं इसलिए उन पर अलग नियम लागू होते हैं.

ईरान की मांग स्वीकारी जाएगी?

ईरान की यह मांग अमेरिका और अन्य देशों को स्वीकार नहीं है. संघर्ष शुरू होने से पहले यह संकरा समुद्री रास्ता सभी जहाजों के लिए सुरक्षित था और यहां से गुजरने पर कोई शुल्क नहीं लिया जाता था. अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून भी कहता है कि किसी जलडमरूमध्य के किनारे बसे देश केवल गुजरने की अनुमति देने के बदले शुल्क नहीं मांग सकते,लेकिन अमेरिका और इजरायल की ओर से हफ्तों तक ईरान पर सैन्य कार्रवाई किए जाने के बाद, यह कहना मुश्किल है कि ईरान की इस मांग पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय क्या कदम उठा पाएगा.

ईरान और ओमान के बीच केवल 34 किलोमीटर चौड़ा होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को हिंद महासागर से जोड़ता है. यह रास्ता दुनिया की लगभग पांचवां (20%) तेल आपूर्ति और उर्वरक जैसे अन्य जरूरी सामानों के परिवहन का मुख्य मार्ग है. रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान चाहता है कि अमेरिका और इजरायल के साथ होने वाला कोई भी स्थायी शांति समझौता ऐसा हो, जिससे युद्ध समाप्त हो और तेहरान को इस जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क वसूलने की अनुमति मिल सके.

ईरान की मांग का पड़ोसी देशों पर क्या असर पड़ेगा?

रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, आधुनिक इतिहास में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ है कि किसी देश ने किसी जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए एकतरफा रूप से शुल्क लगाने की मांग की हो. होर्मुज़ जलडमरूमध्य से ऊर्जा निर्यात पर निर्भर खाड़ी देशों के लिए यह स्थिति खास तौर पर चिंता की वजह बन गई है. संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने कहा है कि यह जलमार्ग किसी एक देश के कब्जे में नहीं रखा जा सकता और किसी भी युद्ध‑समझौते में मुक्त और सुरक्षित नौवहन शामिल होना चाहिए. वहीं कतर के विदेश मंत्रालय ने कहा कि क्षेत्र के सभी देशों को इस जलडमरूमध्य का स्वतंत्र रूप से इस्तेमाल करने का अधिकार है और किसी भी तरह की वित्तीय व्यवस्था पर बातचीत तभी होनी चाहिए जब पहले इसे पूरी तरह फिर से खोल दिया जाए.

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