दक्षिण प्रशांत राष्ट्र नाउरू (South Pacific nation Nauru) ने सोमवार को घोषणा की कि वह ताइवान के साथ राजनयिक संबंध तोड़ रहा है. प्रशांत द्वीप राष्ट्र नाउरू ने कहा कि वह ताइवान से राजनयिक मान्यता हटाकर चीन से संबद्ध कर रहा है. राष्ट्रपति डेविड एडियांग ने एक आधिकारिक फेसबुक पेज पर पोस्ट किए गए एक राष्ट्रीय संबोधन में निर्णय की घोषणा की. एक मीडिया विज्ञप्ति में, नाउरू सरकार ने कहा कि वह अब ताइवान को "एक अलग देश" के रूप में नहीं बल्कि "चीन के क्षेत्र का एक अभिन्न अंग" के रूप में मान्यता देगी. नाउरू ताइवान के साथ तुरंत "राजनयिक संबंध तोड़ देगा", और "अब ताइवान के साथ कोई आधिकारिक संबंध या आधिकारिक आदान-प्रदान विकसित नहीं करेगा".
नाउरू उन कुछ देशों में से एक था जिसने राजनयिक आधार पर ताइवान को आधिकारिक तौर पर मान्यता दी थी. अब होली सी सहित केवल 12 राज्य हैं, जिन्होंने ताइवान को पूरी तरह से मान्यता दी है.
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नाउरू की आबादी लगभग 12,500 लोगों की है, और यह ताइवान के साथ लंबे समय से चले आ रहे संबंधों से मुंह मोड़ने वाला नवीनतम प्रशांत देश बना है. साल 2019 में, सोलोमन द्वीप समूह ने इसी तरह घोषणा की कि वह राजनयिक मान्यता ताइवान से चीन में स्थानांतरित कर रहा है.
अफ्रीका में, केवल इस्वातिनी (Eswatini) ने आधिकारिक तौर पर ताइवान को मान्यता दी है, जबकि लैटिन अमेरिका में, सात राज्यों के द्वीप के साथ पूर्ण राजनयिक संबंध हैं, जिनमें बेलीज, ग्वाटेमाला, हैती और पैराग्वे शामिल हैं.
दरअसल, चीन ताइवान को अपना क्षेत्र मानता रहा है, जबकि ताइवान इस दावे को खारिज करता रहा है और खुद को एक अलग राष्ट्र के तौर पर मानता है.
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(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं