- ईरान पर हमला करने के बाद अमेरिका और इजरायल एक लंबी और थका देने वाली जंग में फंस सकते हैं
- नाटो और यूरोप अब तक ईरान पर अमेरिकी हमले में शामिल नहीं हुए हैं और ट्रंप ने उनसे कोई सलाह नहीं ले रहे
- रूस और चीन ईरान पर हमले के बाद अमेरिका-यूरोप के उलझने से फायदा उठा सकते हैं, जिससे यूक्रेन संकट पर असर पड़ेगा
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल के साथ मिलकर ईरान पर हमला कर उसके सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को मार दिया. जाहिर है ये अमेरिका और इजरायल के लिए बड़ी सफलता है. मगर, इसी के साथ अमेरिका और इजरायल एक लंबी और थका देने वाली जंग में कूद पड़े हैं. ये दावा खुद अमेरिकी थिंक टैंक ने भी किया है. यही कारण है कि अमेरिकी संसद आज ट्रंप के ईरान पर किए जा रहे हमले को रोकने के लिए युद्ध शक्तियों से संबंधित प्रस्ताव पर मतदान करने की तैयारी कर रही है. अगर संसद ने ट्रंप को युद्ध से रोक दिया तो उनके लिए फजीहत वाली स्थिति हो सकती है.
मरीन अधिकारी का हाथ तोड़ा
यूनाइटेड स्टेट्स सीनेट की सशस्त्र सेवा समिति (Armed Services Committee) की सुनवाई के दौरान तो ईरान पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के विरोध में एक पूर्व मरीन अधिकारी ने प्रदर्शन किया. इस दौरान झड़प में एक अमेरिकी सांसद ने उनका हाथ तोड़ दिया. यही नहीं इस लड़ाई से नाटो और यूरोप भी दूरी बनाए हुए हैं.
🚨🚨🚨 BREAKING
— Morgan J. Freeman (@mjfree) March 4, 2026
U.S. MARINE: “NO ONE WANTS TO DIE FOR ISRAEL”
U.S. Marine Brian McGinnis got dragged out of a senate hearing for standing up and saying what everyone is thinking.
Reports are that they BROKE his hand.
This is an American patriot. pic.twitter.com/yLVLVFjLzG
क्यों साथ नहीं नाटो-यूरोप
ट्रंप ने ईरान पर अटैक से पहले न तो नाटो से बात की और न ही यूरोप से. नाटो-यूरोप अब तक तो युद्ध में नहीं कूदे हैं, लेकिन अगर ट्रंप ने दबाव बनाया तो उन्हें भी मैदान में आना ही पड़ेगा. ट्रंप फिलहाल अकेले इस युद्ध को समाप्त करना चाहते हैं, मगर अगर युद्ध लंबा खींचा और अमेरिका को अपनी फौज ईरान में उतारनी पड़ी तो फिर नाटो और यूरोप को भी इसमें शामिल करने की पूरी संभावना है. इसका सबसे बड़ा खामियाजा ईरान पर अटैक खामेनेई की मौत का जश्न मना रहे यूक्रेन को भुगतना पड़ सकता है. कारण अगर अमेरिका और नाटो-यूरोप ईरान के साथ भिड़े तो फिर उसकी मदद कौन करेगा. कौन उसे हथियारों की सप्लाई करेगा. जाहिर है ईरान पर हमले से सबसे ज्यादा चिंतित यूक्रेन को होना चाहिए था, लेकिन उसके बयान से जाहिर है कि वो इसे रूस के एक करीबी सहयोगी पर किया गया हमला सिर्फ मान कर बयान दे रहा है.

रूस-चीन की कैसे लगी लॉटरी
ईरान पर हमले के बाद रूस और चीन की लॉटरी लग चुकी है. अफगानिस्तान से निकलने के बाद अमेरिका यूक्रेन को हथियार सप्लाई तक सीमित था. यूरोप भी हथियार और पैसे के जरिए यूक्रेन को मदद कर रहा था. यही कारण है चार साल बाद भी रूस अब तक यूक्रेन को हरा नहीं पाया है. हां, बर्बाद जरूर कर चुका है. अब अगर अमेरिका और यूरोप ईरान में उलझ गए तो रूस के लिए मिशन यूक्रेन आसान हो जाएगा. वो ईरान को इतनी जल्दी हारने नहीं देगा. इसके लिए वो वही रास्ता अपना सकता है, जो अब तक अमेरिका और यूरोप यूक्रेन में अपना रहे थे.
रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने गुरुवार को कहा कि मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान के खिलाफ किसी भी अमेरिकी-इजरायल सैन्य अभियान को "असंभव" बनाने के लिए मॉस्को हर संभव प्रयास करेगा.
चीन भी इस काम में ईरान की मदद कर सकता है. कारण वो भी यही चाहेगा कि अमेरिका-यूरोप ईरान में लंबे समय तक उलझे रहें. इससे एक तरफ तो चीन को अपनी ताकत बढ़ाने में मदद मिलेगी. दूसरी ओर ताईवान को लेकर भी उसके सामने आने वाली अड़चन कमजोर होगी.
सैन्य एक्सपर्ट भी बता रहे भूल
दुनिया के कई सैन्य एक्सपर्ट भी खामेनेई की हत्या को अमेरिका की भूल बता रहे हैं. उनका मानना है कि अगर खामेनेई जिंदा रहते तो उन पर दबाव बनाकर अमेरिका और इजरायल किसी समझौते पर पहुंच सकते थे. फिलहाल तो स्थिति ये है कि खामेनेई ने जिसे जो ऑर्डर दे दिया है, अब वो आखिरी सांस तक पूरा करेगा. ईरान में बगैर जमीन पर उतरे अमेरिका और इजरायल की सेना बस उसे बर्बाद कर सकती है, लेकिन इसके चलते इजरायल और अमेरिका के खाड़ी के सैन्य ठिकानों पर अब ईरान के हमले रुकने वाले नहीं. ऐसे में मिडिल ईस्ट लंबे समय के लिए जंग में झोंक दिया गया है. खाड़ी देश लंबे समय तक अस्थिर रहेंगे. वहीं यूरोप में तेल और गैस की कीमतें आसमान छुएंगी और इसके चलते महंगाई की मार झेलनी पड़ेगी. अमेरिका के लिए भी किसी अन्य मामले में दखल देना मुश्किल हो जाएगा. एक्सपर्ट का ये भी मानना है कि अगर जंग लंबी चली तो नवंबर में होने वाले अमेरिका के मध्यावधि चुनाव में ट्रंप की पार्टी को झटका लग सकता है.
ये भी पढ़ेंः
मिडिल ईस्ट वॉर के बीच भारत ने खामेनेई के निधन पर जताया शोक, जयशंकर ने की विदेश मंत्री से बात
पाकिस्तान की चिंता है कि खत्म नहीं होती, अब भारत-कनाडा को लेकर हुआ चिंतित
चीन आर्थिक मोर्चे पर हुआ कमजोर, 1991 के बाद पहली बार किया ऐसा, 2030 का टारगेट तय
ईरान-इजरायल-अमेरिका-रूस-यूक्रेन जंगों के बीच किम को युद्ध का इंतजार, अब क्रूज मिसाइलें दागीं
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं