साउथ कोरिया के सुप्रीम कोर्ट ने लिथियम बैटरी बनाने वाली कंपनी 'एरीसेल' (Aricell) के प्रमुख को चार साल की जेल की सजा सुनाई है. इस कंपनी की फैक्ट्री में सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम न होने के कारण साल 2024 में वहां भीषण आग लग गई थी, जिसमें 23 कर्मचारियों की मौत हो गई थी और नौ लोग घायल हो गए थे. अब मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने एरीसेल के CEO पार्क सून-क्वान को यह सजा सुनाई.
इससे पहले शुरुआत में सून-क्वान को एक जिला अदालत ने 15 साल की जेल की सजा सुनाई थी. उन पर सियोल से 45 किलोमीटर दक्षिण में स्थित ह्वासेओंग की फैक्ट्री में सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपनी जिम्मेदारियों का उल्लंघन करने का आरोप था. यह जुर्म सीरियस एक्सीडेंट्स पनिशमेंट एक्ट यानी गंभीर दुर्घटना दंड अधिनियम के तहत आता है.
मालिकों को जिम्मेदार ठहराने का कानून, एरीसेल के CEO जद में
यह कानून 2022 में लागू हुआ था. जब जिला अदालत ने सून-क्वान को 15 साल की सजा सुनाई थी तो वह किसी CEO को दी गई यह अब तक की सबसे सख्त सजा थी. हालांकि, अपील कोर्ट ने सजा को घटाकर चार साल की जेल कर दिया. कोर्ट ने सून-क्वान और उनके बेटे (जो कंपनी में मैनेजिंग डायरेक्टर हैं) को एक मुख्य आरोप से बरी कर दिया. यह आरोप था कि उन्होंने फैक्ट्री की दूसरी मंजिल पर इमरजेंसी एग्जिट नहीं बनवाया था. कोर्ट ने कहा कि सुरक्षा नियमों में हर मंजिल पर एग्जिट होना अनिवार्य नहीं है.
अब सुप्रीम कोर्ट ने फैसले को बरकरार रखा
अपील कोर्ट ने सजा घटाते समय मृतकों के परिवारों के साथ कंपनी द्वारा किए गए समझौतों को भी ध्यान में रखा था. अब आज यानी मंगलवार, 20 अक्टूबर को साउथ कोरिया के सुप्रीम कोर्ट ने अपील कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा. सुप्रीम कोर्ट ने सून-क्वान के बेटे के लिए सात साल की जेल की सजा भी तय कर दी. जिला अदालत ने उसे शुरुआत में 15 साल की जेल की सजा सुनाई थी.
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