जिस धर्मगुरु को मासूम लोगों ने भगवान का आशीर्वाद पाने का जरिया समझा, उसी ने उन्हें मौत के गर्त में गिरा दिया. केन्या में खुद को धर्मगुरु बताने वाले पॉल मैकेंजी को 191 हत्याओं का दोषी पाया गया है. डरावनी बात यह है कि इनमें से एक को छोड़कर बाकी सभी मासूम बच्चे थे. मैकेंजी अपना खुद का पंथ चलाता था और उसने अपने पंथ के सदस्यों को आदेश दिया था कि वे अपने बच्चों को भूखा रखकर मार डालें, ताकि वे यीशु यानी भगवान से मिल सकें. उसे 2023 में गिरफ्तार किया गया था, जब केन्या के तट के पास शाकाहोला के जंगल में उथली कब्रों से 400 से ज्यादा शव मिले थे. मैकेंजी देश भर से अपने फॉलोअर्स को वहीं ले गया था. इस खूंखार अपराधी की कहानी बड़ी डरावनी और दिल को झकझोरने वाली है.
इस हत्यारे का सिद्धांत- शिक्षा वर्जित, आधुनिक चिकित्सा बुरी
पॉल मैकेंजी के साथ-साथ उसके पंथ के 28 अन्य नेताओं को भी हत्या का दोषी ठहराया गया है. वैसे तो इस सबने खुद को निर्दोष बताया और बार-बार इस बात पर जोर दिया कि किसी को भी मरने के लिए मजबूर नहीं किया गया था. लेकिन अदालत ने ऐसा नहीं पाया. केन्या के बंदरगाह शहर मोम्बासा में अपना आठ घंटे लंबा फैसला सुनाते हुए, जस्टिस डायना मोचाचे ने कहा कि मैकेंजी के अनुयायी मानते थे कि वह जो बोलता है वह ईसा मसीह की ही वाणी है.

पॉल मैकेंजी (सबसे आगे) और उसके पंथ के 28 अन्य नेताओं को भी हत्या का दोषी ठहराया गया (फोटो- एएफपी)
मैकेंजी ने अपने पंथ में शामिल लोगों को साफ आदेश दे रखा था कि वे अपने बच्चों को भूखा रखकर मार डालें, ताकि वे यीशु से मिल सकें. उसका सिद्धांत के अनुसार शिक्षा प्राप्त करना मना था और आधुनिक चिकित्सा को बुरा माना जाता था. मैकेंजी ने अपने अनुयायियों से कहा था कि जो कोई भी भूखा रखने के निर्देश का विरोध करे, उसे लात-घूंसे मारकर जबरदस्ती स्वर्ग भेज दिया जाना चाहिए. जज ने बताया कि जिस जंगल में यह पंथ सक्रिय था, वहां किए जाने वाले दफन को शादी कहा जाता था. जो लोग मर जाते थे, उनके बारे में कहा जाता था कि उन्होंने यीशु से शादी कर ली है.
नवजात बच्चे तक को दूध पिलाने नहीं दिया था
बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार एक गवाह ने बताया कि एक गर्भवती महिला को अपने नवजात शिशु को दूध पिलाने से रोक दिया गया था, जिसकी 12 दिन बाद मौत हो गई. गवाह ने कहा कि उस मां को भी भूखे रहकर जान देने और अपने बच्चों के पीछे जाने का निर्देश दिया गया था. उस जंगल में इतनी लाशें होती थीं कि कब्रों को खोदने के काम के लिए 17 आदमियों को काम पर रखा गया था.
कैसे बना धर्मगुरू, कैसे फैलाया प्रभाव
मैकेंजी ने 2003 में 'गुड न्यूज इंटरनेशनल मिनिस्ट्रीज' की स्थापना की थी. अगले 16 सालों में यह चर्च इतना लोकप्रिय हो गया कि केन्या भर में इसकी शाखाओं से हजारों अनुयायी जुड़ गए. यहां तक की उसके चर्च का अपना 'टाइम्स टीवी' नाम का एक टेलीविजन स्टेशन था. यह चैनल मालिंदी स्थित उसके चर्च से उसके उपदेशों का प्रसारण करता था. खुद को पादरी बताने वाला यह व्यक्ति दोपहर में अपने जोशीले उपदेश शुरू करता था, जिनमें से कुछ में भूत-प्रेत भगाने जैसी बातें भी शामिल होती थीं.

शाकाहोला जंगल में मिली थीं 400 लाशें (फोटो- एएफफी)
मुख्य चर्च 2019 में बंद हो गया और पॉल मैकेंजी शाकाहोला जंगल चला गया. उसने अपने अनुयायियों को भी अपने पीछे आने के लिए कहा. वहां जंगल में किसी तरह की दवाई लेना बैन था, पढ़ाई भी बैन था. लोगों को भूखा रहने को कहा जाता था. मार्च 2023 में, जब स्थानीय चरवाहों को पहली बार लाशें मिली, तब तक सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी थी. कब्र खोदने वालों में से एक ने बताया कि हम किसी को जंगल से बाहर निकालते थे, लेकिन वे इतने कमजोर होते थे कि हमारी बांहों में ही दम तोड़ देते थे.
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