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यूरोप फिर बनने जा रहा महाशक्ति, बना दुनिया के लिए हथियारों का सौदागर... रिपोर्ट

यूरोप ने सिक्योरिटी एक्शन फॉर यूरोप (SAFE) में 150 अरब यूरो (175 अरब डॉलर) का निवेश किया है, जो सदस्य देशों को अन्य सदस्य देशों से हथियार खरीदने के लिए दिया जाने वाला एक कम लागत वाला लोन कार्यक्रम है. इसमें से 113 अरब यूरो (113 अरब डॉलर) से अधिक सदस्य देशों को आवंटित किए जा चुके हैं.

यूरोप फिर बनने जा रहा महाशक्ति, बना दुनिया के लिए हथियारों का सौदागर... रिपोर्ट
  • यूरोपीय संघ के 27 सदस्य देशों के हथियार निर्यात में पिछले पांच वर्षों में 36 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई
  • रूस के हथियार निर्यात में पिछले पांच वर्षों में 64 प्रतिशत की गिरावट आई है और उसके ग्राहक उसे छोड़ रहे हैं
  • यूरोप अभी भी अमेरिका पर हथियारों और सुरक्षा तकनीक के मामले में काफी हद तक निर्भर है, खासकर पूर्वी यूरोप में
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यूरोप को कभी सुपरपावर यानी महाशक्ति का दर्जा प्राप्त था, मगर दूसरे विश्वयुद्ध के बाद अमेरिका और रूस ने ये उससे ये ताज छीन लिया. 90 आते-आते अमेरिका इकलौती महाशक्ति बन गया मगर 2000 के बाद चीन का उभार होने लगा. रूस भी अपनी खोई ताकत पाने लगा. इस बीच यूरोप कहीं खो सा गया. यूक्रेन युद्ध ने पिछले पांच वर्षों में यूरोप को एक उभरते हुए हथियार निर्माता और निर्यातक के रूप में विकसित होने में भी मदद की है.

सिपरी रिपोर्ट का दावा

  1. स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) ने सोमवार को जारी अपनी एनुअल आर्म्स ट्रांसफर रिपोर्ट में कहा कि यूक्रेन युद्ध के दौरान, 2021-25 की अवधि में यूरोपीय देशों में प्रमुख हथियारों का आयात 2016-20 की पिछली पांच वर्षीय अवधि की तुलना में तीन गुना से अधिक हो गया. इन हथियारों में से लगभग आधे - 48 प्रतिशत - अमेरिका से आए, जो दर्शाता है कि यूरोप हथियारों के मामले में अधिक आत्मनिर्भर बनने में विफल हुआ है. सिपरी के अनुसार, पोलैंड और यूनाइटेड किंगडम यूरोप के सबसे बड़े हथियार आयातक हैं. हालांकि, ये पूरी तस्वीर नहीं है.
  2. अल जजीरा के अनुसार, सिपरी की प्रमुख शोधकर्ता कैटरीना जोकिक ने कहा, "पिछले पांच वर्षों में यूक्रेन के हथियार आयात ने यूरोपीय आयात में कुल वृद्धि का 43 प्रतिशत हिस्सा बनाया है." उन्होंने कहा कि यह आंकड़ा केवल अमेरिका से यूक्रेन को सीधे आयात को मापता है. इसमें अन्य यूरोपीय देशों द्वारा यूक्रेन की ओर से किए गए आयात शामिल नहीं हैं. इसलिए वास्तविकता में, यूरोप के आयात में यूक्रेन की जरूरतों का अनुपात और भी अधिक रहा है. यूरोपीय आयात में वृद्धि के इस मुख्य आंकड़े के पीछे यूरोप की एक और तस्वीर छिपी है.
  3. सिपरी रिपोर्ट में कहा गया है, "संयुक्त रूप से, यूरोपीय संघ के 27 सदस्य देशों के हथियार निर्यात में 36 प्रतिशत की वृद्धि हुई है." यह वृद्धि दर इसी अवधि में अमेरिका की 27 प्रतिशत और चीन की 11 प्रतिशत की वृद्धि दर से कहीं अधिक है. पिछले पांच वर्षों में यूरोपीय संघ के संयुक्त हथियार निर्यात का वैश्विक हथियार निर्यात में 28 प्रतिशत हिस्सा रहा, जो इसके आयात की लगभग बराबरी करता है. ये विश्व के कुल आयात का एक तिहाई है. SIPRI के अनुसार, वैश्विक बाजार का यह 28 प्रतिशत हिस्सा "रूस के निर्यात की तुलना में चार गुना और चीन के निर्यात की तुलना में पांच गुना अधिक है."
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रूस का बाजार धराशायी हो रहा 

इसी बीच, यूरोप के सबसे बड़े दुश्मन के रूप में देखे जाने वाले रूस के हथियार निर्यात में पिछले पांच वर्षों में उससे पहले के पांच वर्षों की तुलना में 64 प्रतिशत की गिरावट आई है. यूरोप में अमेरिकी सेना के पूर्व कमांडर जनरल बेन हॉजेस ने कहा, "उनके निर्यात में गिरावट का एक कारण यह है कि उन्हें खुद ही अपने बनाए हथियारों की अभी सख्त जरूरत है." उन्होंने अल जजीरा को बताया, "अब कोई भी रूसी हथियार नहीं खरीदना चाहता, क्योंकि यह साबित हो चुका है कि वे उतने अच्छे नहीं हैं... उनकी तकनीक यूक्रेनी तकनीक से मात खा चुकी है."

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जोकिक ने कहा कि रूस के प्रमुख ग्राहक उसका साथ छोड़ रहे हैं. चीन ने अपने रक्षा उद्योग को बढ़ावा दिया है और हथियार उत्पादन में आत्मनिर्भर हो गया है. कुछ समय पहले तक चीन कम से कम अपने फाइटर जेट्स के लिए रूसी इंजन आयात करता था मगर अब उनके पास अपना खुद का डिजाइन किया हुआ इंजन है, इसलिए उन्हें इसकी वास्तव में अब जरूरत नहीं है."

क्या अमेरिका यूरोप पर अपना दबदबा बनाए रखेगा?

जोकिक ने कहा कि यूरोप कई कारणों से अमेरिका पर निर्भर है. उन्होंने बताया कि कुछ वस्तुएं, जैसे कि मल्टीपल-लॉन्च रॉकेट सिस्टम यूरोप में नहीं बनते. इसके अलावा, सर्वश्रेष्ठ श्रेणी की तकनीक हासिल करने की होड़ भी है. जोकिक ने कहा, "सभी देश ऐसी तकनीक को प्राथमिकता देते हैं, जिसे वो सबसे शानदार मानते हैं, इसलिए कई वायु सेनाएं एफ-35 जेट हासिल करना चाहती हैं, भले ही उनमें से कुछ इसके सभी लाभों का उपयोग न कर सकें." उन्होंने कहा कि एक अन्य उदाहरण युद्ध में सिद्ध हो चुकी पैट्रियट एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम है, लेकिन शायद सबसे बड़ा कारण अमेरिका के साथ सुरक्षा साझेदारी को मजबूत करने की इच्छा है. अमेरिका को आज भी सबसे बड़ा डिफेंस पार्टनर माना जाता है. खास कर यूरोपीय संघ के पूर्वी हिस्से में. उदाहरण के लिए, पोलैंड, जो कहता है कि वह यूरोप की सबसे बड़ी थल सेना का निर्माण कर रहा है. वो अपने सशस्त्र बलों को लगभग पूरी तरह से अमेरिकी हथियारों से लैस कर रहा है.

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हालांकि, यह स्थिति बदल सकती है.

यूरोपीय संघ के पिछले सहायता पैकेजों के उलट, ब्रसेल्स अब यूक्रेन पर यूरोप में खरीदे जा सकने वाले हथियारों को प्राथमिकता देने पर जोर दे रहा है. ऐसा इसलिए है, क्योंकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में अमेरिका की तरफ से यूक्रेन को सहायता देना बंद करने के बाद, यूरोपीय संघ यूक्रेन का सबसे बड़ा मददगार बन गया है. यूरोप ने अब तक 195 अरब यूरो (230 अरब डॉलर) की सहायता भेजी है और अगले दो वर्षों में यूक्रेन को 90 अरब यूरो (106 अरब डॉलर) का कर्ज देने की मंजूरी दी है. इस रकम का अधिकांश हिस्सा अब यूरोपीय संघ में वापस चला जाएगा.

होजेस ने कहा कि एक डिफेंस पार्टनर के रूप में अमेरिका की छवि को भी नुकसान पहुंचने की संभावना है. उन्होंने कहा, "ट्रांसअटलांटिक (NATO) संबंध अभी भी मौजूद हैं, लेकिन वे पहले जैसे नहीं हैं और शायद कभी पहले जैसे नहीं होंगे. यूरोपीय देशों को यह एहसास हो रहा है कि अगर एक अमेरिकी राष्ट्रपति कह सकता है, 'भाड़ में जाओ तुम लोग', तो उन्हें अमेरिका पर अपनी निर्भरता कम से कम करनी होगी."

'खतरे टलने वाले नहीं हैं'

होजेस रूस के हमले के बीच ट्रंप के अकेला छोड़ने के फैसले, नाटो पर उनके अविश्वास और इस वर्ष नाटो सहयोगी देश ग्रीनलैंड पर हमला करने की उनकी धमकी का जिक्र कर रहे थे. उन्होंने कहा, “रूस के यूक्रेन युद्ध और मिडिल ईस्ट में चल रही लड़ाई को देखते हुए, खतरे कम नहीं होने वाले हैं. इसलिए अधिकांश यूरोपीय देशों का अब संभावित खतरों के प्रति अधिक गंभीर और यथार्थवादी दृष्टिकोण है और उन्हें अपनी क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता महसूस हो रही है, खासकर तब जब उन्हें लगता है कि अमेरिका पहले की तरह सक्रिय, सक्षम या भरोसेमंद नहीं है. आपको यूरोप में अब विकास देखने को मिलेगा और निवेशक अब यूरोप के डिफेंस सेक्टर में निवेश करने के लिए अधिक इच्छुक हैं. पहले यूरोप के निवेशक पेंशन फंड, बीमा कंपनियां पर ज्यादा ध्यान देते थे और डिफेंस सेक्टर से दूर रहते थे.”

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यूरोप ने सिक्योरिटी एक्शन फॉर यूरोप (SAFE) में 150 अरब यूरो (175 अरब डॉलर) का निवेश किया है, जो सदस्य देशों को अन्य सदस्य देशों से हथियार खरीदने के लिए दिया जाने वाला एक कम लागत वाला लोन कार्यक्रम है. इसमें से 113 अरब यूरो (113 अरब डॉलर) से अधिक सदस्य देशों को आवंटित किए जा चुके हैं. खर्च और धारणा में इन बदलावों में से कोई भी अभी तक SIPRI के आंकड़ों में नहीं है.  जोकिक ने कहा, "हम अभी जो देख रहे हैं, वह यूरोपीय वेपन सिस्टम के लिए नए ऑर्डर दिए जा रहे हैं, जिनमें प्रमुख रूप से जर्मनी से एरिस्टाइड एयर डिफेंस सिस्टम या फ्रांस से सीजर हॉवित्जर शामिल हैं, जिससे पता चलता है कि यूरोपीय संघ के जरिए इस तरह का समर्थन यूरोपीय संघ के भीतर खरीद को बढ़ावा देने में भूमिका निभाता है."

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