- सर्बिया में छात्रों के नेतृत्व वाले आंदोलन ने संसदीय चुनाव जीतकर 14 साल के दक्षिणपंथी शासन का अंत किया है
- नोवी साद रेलवे स्टेशन पर 2024 में हुए हादसे ने भ्रष्टाचार के खिलाफ व्यापक छात्र आंदोलन को जन्म दिया था
- राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुसिक ने चुनाव हार स्वीकार करते हुए छात्र दल को संसद में पूर्ण बहुमत मिलने की बात कही
सर्बिया में 14 साल पुरानी सरकार को सत्ता से हटाकर अब छात्र खुद सरकार चलाएंगे. सर्बिया में छात्रों के नेतृत्व वाले आंदोलन ने संसदीय चुनाव जीत लिया है. इसके साथ ही वहां के लीडर अलेक्जेंडर वुसिक की दक्षिणपंथी पार्टी के 14 साल के शासन का अंत हो गया. राष्ट्रपति के पद से इस्तीफा देकर पीएम पद के लिए चुनाव लड़ रहे अलेक्जेंडर वुसिक ने अपनी हार मान ली है. खास बात है कि इस आंदोलन की नींव एक रेल हादसे ने रखी थी. यह जीत एक कार्यकाल के बीच में कराए गई वोटिंग (स्नैप इलेक्शन) में मिली है. इस बर्फीले देश में लगभग दो सालों से सरकार विरोधी प्रदर्शन चले थे, जो 2024 में नोवी साद रेलवे स्टेशन पर एक हादसे के बाद शुरू हुए थे. इस हादसे में 16 लोगों की मौत हो गई थी.
अलेक्जेंडर वुसिक ने चुनाव में हार स्वीकार की
यूरोन्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, सर्बिया के लंबे समय से सत्ता में रहे नेता अलेक्जेंडर वुसिक ने राष्ट्रीय संसदीय चुनावों में अपनी हार मान ली है. उन्होंने बताया कि विपक्षी 'स्टूडेंट लिस्ट' ने संसद में पूर्ण बहुमत हासिल कर लिया है. शुरुआती नतीजों के बाद देश को संबोधित करते हुए, वुसिक ने वोटों के सैंपल आंकड़ों के आधार पर अपनी पार्टी की चुनावी हार को स्वीकार किया.
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वुसिक ने कहा कि सैंपल आंकड़ों से यह साफ है कि हम चुनाव हार गए हैं. उन्होंने माना कि विपक्षी गठबंधन को निर्णायक जीत मिली है. राष्ट्रीय संसद में सीटों के संभावित बंटवारे का जिक्र करते हुए, वुसिक ने कहा कि 'स्टूडेंट लिस्ट' आसानी से अगली सरकार बना लेगी. उन्होंने कहा कि स्टूडेंट लिस्ट जीत गई है और उसे 135 से 140 सीटें मिलेंगी, जबकि हमें लगभग 105 सीटें मिलेंगी.
अलेक्जेंडर वुसिक विदेशी ताकतों को दे रहे दोष
56 साले के अलेक्जेंडर वुसिक ने अपने पूरे कार्यकाल के दौरान रूस के साथ करीबी संबंध बनाए रखे थे. वह रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के करीबी माने जाते हैं. अब चुनाव हारने के बाद उन्होंने इस नतीजे के लिए विदेशी ताकतों को जिम्मेदार ठहराया है. उन्होंने कहा, "मैं चाहता हूं कि लोग जानें कि यह एक ऐसी क्रांति की पुष्टि थी, जिसे कई यूरोपीय देशों और अमेरिका के 'डीप स्टेट' के सीधे समर्थन से अंजाम दिया गया था. वही 'डीप स्टेट' जो राष्ट्रपति ट्रंप के भी खिलाफ है."
2 साल के छात्र आंदोलन ने दिखाई ताकत
2024 के रेल हादसे के लिए बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार को जिम्मेदार ठहराया गया था. इसने सर्बिया में 2000 में तानाशाह स्लोबोदान मिलोसेविच के पतन के बाद से, अब तक के सबसे बड़े विरोध प्रदर्शनों को जन्म दिया. इसके बाद के लगभग दो सालों से, छात्र देश भर में रैलियां और मार्च निकाल रहे हैं, ताकि वे सीधे मतदाताओं तक पहुंच सकें और वुसिक की 'सर्बियन प्रोग्रेसिव पार्टी' के मीडिया तंत्र का मुकाबला कर सकें.
इस छात्र आंदोलन का एक व्यापक मंच है, जो भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने के संकल्प पर केंद्रित है. यह आंदोलन 'नोवी साद' हादसे की पारदर्शी जांच की मांग से शुरू होकर, जल्द चुनाव कराने की मांग तक पहुंच गया. लगभग दो सालों तक इस आंदोलन का विरोध करने के बाद, बढ़ते दबाव के चलते वुसिक ने पिछले महीने चुनाव कराने की घोषणा की. उन्होंने इसके लिए देश के राजनीतिक परिदृश्य में भारी उथल-पुथल का हवाला दिया. इस दक्षिणपंथी लोकलुभावन नेता ने प्रधानमंत्री पद का चुनाव लड़ने के लिए राष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया. लेकिन अब वह चुनाव हार चुके हैं.
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