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जामिया के छात्रों का प्रदर्शन 17वें दिन भी जारी, यूनिवर्सिटी ने संपत्ति को नुकसान पहुंचने का आरोप लगाया

जामिया यूनिवर्सिटी के प्रशासन के इस फैसले के बावजूद कि यूनियन के संविधान को मंजूरी मिलने के 15 दिनों के भीतर चुनाव कराए जाएंगे, छात्रों ने अपना आंदोलन वापस लेने से इनकार कर दिया है.

जामिया के छात्रों का प्रदर्शन 17वें दिन भी जारी, यूनिवर्सिटी ने संपत्ति को नुकसान पहुंचने का आरोप लगाया
जामिया के छात्रों का प्रदर्शन 17वें दिन भी जारी (फोटो- पीटीआई)

जामिया यूनिवर्सिटी में छात्रसंघ चुनाव के लिए छात्रों का प्रदर्शन थमने का नाम नहीं ले रहा. जामिया मिल्लिया इस्लामिया स्टूडेंट्स यूनियन (JMISU) को बहाल करने की मांग को लेकर चल रहा विरोध प्रदर्शन बुधवार, 28 अक्टूबर को 17वें दिन भी जारी है. यूनिवर्सिटी प्रशासन के इस फैसले के बावजूद कि यूनियन के संविधान को मंजूरी मिलने के 15 दिनों के भीतर चुनाव कराए जाएंगे, छात्रों ने अपना आंदोलन वापस लेने से इनकार कर दिया है.

जामिया के छात्रों का प्रदर्शन क्यों जारी?

प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि यूनिवर्सिटी प्रशासन को चुनाव के लिए एक निश्चित तारीख घोषित करनी चाहिए. 2006 से छात्रसंघ के चुनाव नहीं हुए हैं. उनकी मांग है कि यूनियन के संविधान को मंजूरी देने के लिए एक समय-सीमा तय करनी चाहिए.

इससे पहले सोमवार को यूनिवर्सिटी ने एक आदेश जारी किया था, जिसमें कहा गया कि यूनियन के संविधान को मंजूरी मिलने के 15 दिनों के भीतर छात्र संघ चुनाव कराए जाएंगे. इसके बावजूद छात्रों का आंदोलन जारी रहा. इस आदेश में प्रदर्शन के दौरान छात्रों को दिए गए निलंबन और 'कारण बताओ' नोटिस को भी रद्द कर दिया गया. साथ ही, आंदोलन के दौरान सुरक्षा कर्मियों के बर्ताव की जांच के लिए एक समिति बनाने की भी बात कही गई थी.

हालांकि, छात्रों का कहना है कि यह फैसला उनकी मांगों को पूरा नहीं करता है. उन्होंने सवाल उठाया कि संविधान को मंजूरी देने के लिए कोई समय-सीमा क्यों नहीं तय की गई है. अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों में से एक, रेहान खान ने सोमवार को कहा था, "हमारी पहली मांग यह थी कि छात्र संघ चुनावों को फिर से शुरू किया जाए और चुनाव की तारीखों की घोषणा की जाए."

इस मुद्दे को लेकर चार छात्र अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं.

जंग की मैदान बनी है यूनिवर्सिटी

यूनिवर्सिटी के आदेश में यह भी दावा किया गया है कि प्रदर्शनकारी छात्र, आंदोलन के दौरान प्रशासन के खिलाफ दिए गए अपमानजनक बयानों, की गई हरकतों या सोशल मीडिया पोस्ट के लिए एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सार्वजनिक रूप से माफी मांगने को तैयार हो गए हैं. आदेश में कहा गया है कि ऐसी पोस्ट को तुरंत हटा दिया जाए और यह भी कहा गया है कि इस आदेश के जारी होने के बाद प्रदर्शन खत्म कर दिया जाएगा.

सोमवार को, जब कैंपस में सुरक्षा कड़ी कर दी गई, तो प्रदर्शनकारी छात्रों और अर्धसैनिक बलों के जवानों के बीच झड़प हो गई. तनाव के चलते सभी कोर्स की कक्षाएं ऑनलाइन कर दी गई थीं. प्रशासन के खिलाफ नारे लगाने वाले छात्रों को पुलिस ने यूनिवर्सिटी में प्रवेश करने से रोक दिया.

सोमवार को जामिया नगर के सैयदा मंजिल में 'जामिया कलेक्टिव' ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इसमें पूर्व छात्र, यूनिवर्सिटी के संस्थापक परिवारों के लोग, कलाकार, वकील और छात्र नेता शामिल हुए. सभी ने प्रदर्शन कर रहे छात्रों का समर्थन किया और कैंपस में लोकतंत्र बहाल करने की मांग की. ।NSUI, AISF, SFI, AIDSO, AISA और DISHA के नेताओं ने छात्रों की मांगें रखीं और कहा कि प्रशासन को प्रदर्शनकारियों से बातचीत करनी चाहिए.

जामिया प्रशासन ने जारी की तोड़फोड़ की तस्वीरें

छात्रों और यूनिवर्सिटी के बीच जारी गतिरोध के बीच, जामिया के अधिकारियों ने बुधवार को टूटी हुई खिड़कियों की तस्वीरें शेयर कीं. साथ में आरोप लगाया कि छात्र जबरन कैंपस के कुछ हिस्सों में घुस गए, जहां उन्होंने सर्विलांस कैमरों (CCTV) और यूनिवर्सिटी की अन्य संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया. न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार अधिकारियों ने इस बात पर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी कि इस कथित नुकसान के संबंध में क्या कार्रवाई की जा रही है.

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