गर्मियों में आइसक्रीम तो खूब खा रहे होंगे? लेकिन क्या आपने कभी ऐसी आइसक्रीम के बारे में सुना है जो धूप में भी आसानी से नहीं पिघलती? अमेरिकी आइसक्रीम अपनी मलाईदार और हल्की बनावट के लिए जानी जाती है. इटालियन जिलेटो को धीमी रफ्तार से मथा जाता है फिर आइसक्रीम तैयार होती है और हमारी देसी भारतीय कुल्फी तो गाढ़ी और लाजवाब होती ही है. लेकिन तुर्की की 'मराश दोंदुरमा' इन सबसे बिल्कुल जुदा है. इस आइक्रीम को च्युइंग गम की तरह खींचा जा सकता है. इसकी खासियत है कि ये पिघलती नहीं है.
इस अनोखी आइसक्रीम का असली सीक्रेट छिपा है एक खास जंगली ऑर्किड की जड़ों में, जिसे सालेप कहा जाता है. तुर्की की राजधानी इस्तांबुल की इस्तिकलाल एवेन्यू या ओरताकोय स्क्वायर जैसी मशहूर जगहों पर पारंपरिक कढ़ाईदार वास्कट और लाल रंग की तुर्की टोपी पहने वेंडर्स आपको नजर आ जाएंगे.

Photo Credit: Pixabay
ये वेंडर अपनी लंबी धातु की छड़ों से दोंदुरमा आइसक्रीम को किसी रंग-बिरंगे आटे की तरह गूंथते और घुमाते हैं. जब कोई ग्राहक इनके पास जाता है, तो ये वेंडर एक मजेदार खेल शुरू कर देते हैं. कभी आइसक्रीम थमाते हैं, तो कभी पलक झपकते ही उसे हवा में गायब कर देते हैं. लेकिन सवाल फिर से वही कि आखिर ये आइसक्रीम पिघलता क्यों नहीं है?
वो 'वैज्ञानिक सीक्रेट' जिसके कारण नहीं पिघलती आइसक्रीम
अब बात करते हैं उस वैज्ञानिक कारण की जिसकी वजह से यह आइसक्रीम इतनी सख्त और खिंचने वाली बनती है. पारंपरिक तौर पर दोंदुरमा को केवल दूध, चुकंदर की चीनी और सालेप से बनाया जाता है.

Photo Credit: Pixabay
सालेप के इतना कीमती होने की वजह इसमें मौजूद ग्लूकोमैनन नाम का एक मॉलिक्यूल है. इस मॉलिक्यूल की खासियत यह है कि इसका महज एक ग्राम अपने वजन से दो सौ गुना ज्यादा पानी को बांध सकता है.
यह प्रकृति में पानी को सोखने और बांधने वाले सबसे शक्तिशाली तत्वों में से यह एक है. यही कारण है कि यह आइसक्रीम को एक गाढ़ी, खिंचने वाली और बिना पिघले टिके रहने वाली बनावट देता है. यही वजह है कि शुद्ध सालेप पाउडर की कीमत 200 डॉलर (लगभग 16-17 हजार रुपये) प्रति किलोग्राम से भी ज्यादा है.
यह भी पढ़ें: पृथ्वी का सबसे छोटा द्वीप, 'एक गलत कदम और सीधे पानी में'...महज 310 वर्ग मीटर है क्षेत्रफल?
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं