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सऊदी अरब ने 6 महीने में 100 लोगों को फांसी पर लटकाया, 65 तो ड्रग्स के चक्कर में मरे- इनमें 7 पाकिस्तानी

सऊदी अरब में सबसे अधिक फांसी ड्रग्स से जुड़े अपराधों में दी जाती है. पिछले साल तो वहां 356 लोगों को फांसी दी गई थी.

सऊदी अरब ने 6 महीने में 100 लोगों को फांसी पर लटकाया, 65 तो ड्रग्स के चक्कर में मरे- इनमें 7 पाकिस्तानी
सऊदी अरब ने 6 महीने में 100 लोगों को फांसी पर लटकाया (फोटो- NDTV)
  • सऊदी अरब में मंगलवार को 7 लोगों को फांसी दी गई. इसमें से 5 को ड्रग्स की तस्करी के मामले में दोषी ठहराया गया था
  • इस साल सऊदी अरब में फांसी दिए गए लोगों की कुल संख्या 100 हो गई है
  • इनमें 43 विदेशी नागरिक शामिल हैं, 7 पाकिस्तान से हैं

सऊदी अरब में मंगलवार, 23 जून को 7 लोगों को फांसी दी गई. इसके साथ ही इस साल सऊदी अरब में फांसी दिए गए लोगों की कुल संख्या 100 हो गई. यानी अभी साल के 6 महीने भी नहीं बीते हैं और सऊदी अरब में 100 लोगों को फांसी भी दी जा चुकी है. न्यूज एजेंसी AFP ने सऊदी अरब की सरकार की तरफ से समय-समय पर की गई फांसी की घोषणाओं के आधार पर गिनती करके यह आंकड़ा बताया है.

इस रिपोर्ट के अनुसार मंगलवार को जिन 7 लोगों को फांसी दी गई, उनमें से 5 को ड्रग्स की तस्करी के मामले में दोषी ठहराया गया था. इस साल ड्रग्स से जुड़े अपराधों में फांसी पाने वालों की संख्या 65 हो गई है. ध्यान देने वाली बात है कि इनमें 43 विदेशी नागरिक शामिल हैं. यह आंकड़ा गृह मंत्रालय के आंकड़ों पर आधारित है.

इस साल अब तक फांसी पाए 100 लोगों में केवल 48 अपराधी सऊदी अरब के नागरिक हैं. इसके अलावा इसमें 12 इथियोपियाई, 7 पाकिस्तानी, 6 सूडानी, 4 यमनी और 4 सीरियाई नागरिक शामिल हैं. सऊदी में सबसे अधिक फांसी ड्रग्स मामले में ही दी जाती है. बता दें कि साल 2025 में सऊदी अरब ने 356 लोगों को फांसी दी थी. इनमें 243 लोगों को ड्रग्स से जुड़े अपराधों में फांसी दी गई थी. एमनेस्टी इंटरनेशनल ने 1990 से रिकॉर्ड रखना शुरू किया था और तब से यह सबसे बड़ा आंकड़ा था.

करीब तीन साल तक रोक लगाए रखने के बाद सऊदी अरब ने 2022 के आखिर में ड्रग्स से जुड़े अपराधों के लिए फिर से मौत की सजा लागू कर दी थी.

मानवाधिकार संगठन जता रहे चिंता

सोमवार को दी गई फांसी को लेकर मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इसे एक डरावना पड़ाव बताया. एमनेस्टी ने कहा कि सऊदी अरब के अधिकारियों ने मौत की सजा का अनुचित और गैरकानूनी इस्तेमाल किया है. लंदन स्थित इस मानवाधिकार संगठन ने कहा, "ड्रग्स से जुड़े मामलों में सऊदी अरब द्वारा मौत की सजा के कठोर इस्तेमाल का सबसे ज्यादा असर विदेशी नागरिकों पर पड़ा है. कई मामलों में मुकदमे भी बेहद अनुचित तरीके से चलाए गए."

संगठन ने यह भी कहा, "यह बेहद चिंता की बात है कि दक्षिण-पश्चिम सऊदी अरब के खमीस मुशैत हिरासत केंद्र के एक वार्ड में बंद कम से कम 63 इथियोपियाई नागरिकों को केवल ड्रग्स से जुड़े मामलों में जल्द फांसी दिए जाने का खतरा हो सकता है."

एमनेस्टी इंटरनेशनल के अनुसार, पिछले तीन सालों में दुनिया में सबसे ज्यादा फांसी देने वाले देशों में सऊदी अरब तीसरे स्थान पर रहा है. उससे आगे चीन और ईरान हैं. इस खाड़ी देश को मौत की सजा के इस्तेमाल को लेकर लगातार आलोचना का सामना करना पड़ा है. मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि इसका इस्तेमाल जरूरत से ज्यादा किया जाता है और यह दुनिया के सामने एक आधुनिक इमेज पेश करने की देश की कोशिशों से बिल्कुल अलग दिखता है.

हालांकि, सऊदी अरब के अधिकारियों का कहना है कि सार्वजनिक व्यवस्था (पब्लिक ऑर्डर) बनाए रखने के लिए मौत की सजा जरूरी है. उनका यह भी कहना है कि सभी कानूनी अपीलों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही इस सजा का इस्तेमाल किया जाता है.

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