- सऊदी ने पाकिस्तान, बांग्लादेश, मिस्र और कतर समेत अन्य 13 देशों के साथ मिलकर एक नया नौसैनिक गठबंधन बनाया है
- इसका मकसद लाल सागर और अदन की खाड़ी जैसे रणनीतिक इलाकों से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा करना है
- यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब ईरान समर्थित हूती लड़ाके सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकाबंदी कर रहे हैं
दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों पर बढ़ते खतरे के बीच सऊदी अरब ने बड़ा कदम उठाया है. सऊदी ने पाकिस्तान, बांग्लादेश, मिस्र और कतर समेत अन्य 13 देशों के साथ मिलकर एक नया नौसैनिक गठबंधन बनाने का फैसला किया है. इसका मकसद बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य, लाल सागर और अदन की खाड़ी जैसे रणनीतिक इलाकों से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा करना है. ईरान समर्थित हूती लड़ाकों के हमलों और अमेरिका-ईरान जंग की वजह से होर्मुज में पैदा हुए संकट ने दुनिया भर में तेल और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है.
यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब ईरान समर्थित हूती लड़ाके सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकाबंदी कर रहे हैं, जिससे समुद्री व्यापार लगातार प्रभावित हो रहा है. वहीं, होर्मुज बंद होने की वजह से भी जहाजों की आवाजाही में दिक्कतें आ रही हैं. इन सुरक्षा खतरों ने दुनिया भर में तेल और गैस की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है और कच्चे तेल की कीमतें 90 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं.
कौन हैं यह 14 देश?
सऊदी रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, इस गठबंधन के संस्थापक सदस्य देशों में सऊदी अरब, कुवैत, बहरीन, कतर, पाकिस्तान, तुर्किये, मिस्र, जॉर्डन, यमन, बांग्लादेश, नाइजीरिया, सूडान, जिबूती और सोमालिया शामिल हैं.
इस समझौते को रियाद में हुई एक सैन्य बैठक में अंतिम रूप दिया गया. इस बैठक में 43 देशों के रक्षा प्रमुख और प्रतिनिधि शामिल हुए. यूरोपियन यूनियन के प्रतिनिधियों ने भी इसमें हिस्सा लिया. मंत्रालय के अनुसार, बैठक में मौजूद अधिकारियों ने प्रस्तावित नियमों और ढांचे पर आमने-सामने और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए चर्चा की.
सऊदी रक्षा मंत्रालय ने यह भी कहा कि भविष्य में दूसरे देश भी अपनी-अपनी सरकारी मंजूरी की प्रक्रिया पूरी करने के बाद इस सुरक्षा गठबंधन में शामिल हो सकेंगे. सऊदी के रक्षा अधिकारियों ने इस साझेदारी को पूरी तरह रक्षात्मक पहल बताया है. उनका कहना है कि यह गठबंधन किसी खास देश या संगठन के खिलाफ नहीं बनाया गया है. उन्होंने भरोसा दिलाया कि इसके तहत उठाए जाने वाले सभी कदम अंतरराष्ट्रीय कानूनों के मुताबिक होंगे और सभी सदस्य देशों की संप्रभुता का सम्मान किया जाएगा.
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