'रूस पर प्रतिबंधों की बौछार': US, UK और EU के अलावा इन देशों ने भी लगाए नए कड़े प्रतिबंध

अमेरिका, ब्रिटेन के साथ इस कड़ी में यूरोपीय यूनियन, जापान, आस्ट्रेलिया और ताइवान जैसे देश भी शामिल हो गए हैं. इसके जरिए दुनिया भर के नेता क्रेमलिन पर दबाव बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं. 

'रूस पर प्रतिबंधों की बौछार': US, UK और EU के अलावा इन देशों ने भी लगाए नए कड़े प्रतिबंध

यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के बाद दुनियाभर के कई देश मास्को पर लगातार कड़े प्रतिबंध लगा रहे हैं. (फाइल फोटो)

वाशिंगटन:

यूक्रेन पर रूस के आक्रमण (Russia Attacks on Ukraine) के बाद दुनियाभर के कई देश मास्को पर लगातार कड़े प्रतिबंध लगा रहे हैं. अमेरिका, ब्रिटेन के साथ इस कड़ी में यूरोपीय यूनियन, जापान, आस्ट्रेलिया और ताइवान जैसे देश भी शामिल हो गए हैं. इसके जरिए दुनिया भर के नेता क्रेमलिन पर दबाव बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं. 

इस बीच, रूसी सेना यूक्रेन की राजधानी कीव के काफी करीब पहुंच चुकी है और कई यूक्रेनी शरणार्थी पड़ोसी देशों में शरण ले चुके हैं. मास्को पर अब तक लगाए गए कुछ प्रतिबंध इस प्रकार हैं-

अमेरिका: 
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने शुक्रवार को रूस के खिलाफ अपने प्रतिबंधों को और आगे बढ़ाते हुए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और उनके विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव की यात्रा पर भी प्रतिबंध लगा दिया. पुतिन ने जब यूक्रेन में "सैन्य अभियान" की घोषणा की थी, तब उसके कुछ घंटों बाद ही बाइडेन ने रूस के खिलाफ कड़े प्रतिबंधों की घोषणा कर दी थी. ऐसा करने वाले वो विश्व के पहले नेता थे.

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तब अमेरिका ने चार रूसी बैंकों पर वित्तीय मदद देने पर प्रतिबंध लगा दिया था. इसके अलावा अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी तक उसकी पहुंच बाधित करने और रूस के सांसदों के अमेरिका यात्रा पर बैन लगा दिया था. अमेरिका ने ऊर्जा क्षेत्र की दिग्गज कंपनी गज़प्रोम और 12 अन्य प्रमुख कंपनियों को पश्चिमी वित्तीय बाजारों में पूंजी जुटाने पर भी रोक लगा दिया था. 

अमेरिकी प्रतिबंधों में रूस को रक्षा और वैमानिकी प्रौद्योगिकी निर्यात पर रोक और यूक्रेन पर क्रेमलिन के आक्रमण का समर्थन करने और सहायता करने के आरोपी 24 बेलारूसी व्यक्तियों और संगठनों को भी दंड का सामना करना शामिल है.

यूरोपीय यूनियन:
यूरोपीय यूनियन ने भी शुक्रवार को रूसी राष्ट्रपति पुतिन और विदेश मंत्री लावरोव पर यात्रा प्रतिबंध लगा दिया है. रूस पर प्रतिबंधों के एक व्यापक पैकेज को मंजूरी देने के लिए ब्रुसेल्स में  आयोजित यूरोपीय संघ के विदेश मंत्रियों की बैठक में इस कदम पर सहमति व्यक्त की गई थी. 

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EU के नेताओं द्वारा रातों-रात शिखर सम्मेलन में प्रतिबंधों के लिए मंजूर किया गया पैकेज रूस के वित्तीय, ऊर्जा और परिवहन क्षेत्रों को प्रभावित करता है, और यूरोपीय यूनियन के बैंकों में रूस द्वारा बड़ी मात्रा में नकदी रखने की क्षमता पर अंकुश लगाता है. यूनियन ने क्षेत्र के 27 देशों में रूसी नागरिकों के प्रवेश पर भी प्रतिबंध लगा दिया है.

ब्रिटेन:
ब्रिटेन सरकार ने भी शुक्रवार रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और उनके विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव की सभी संपत्तियों को फ्रीज करने और अपने हवाई क्षेत्र से उनके विमानों के गुजरने पर प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया है.

ब्रिटिश ट्रेजरी ने दोनों लोगों के खिलाफ वित्तीय प्रतिबंध लगाने का नोटिस जारी कर दिया है. इन दोनों को उस सूची में शामिल कर लिया गया है, जिनकी संपत्ति और बैंक खाते पहले से ही फ्रीज हैं. इससे पहले, ब्रिटेन ने रूसी बैंक वीटीबी और हथियार निर्माता रोस्टेक की संपत्ति को फ्रीज कर दिया था.

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कनाडा:
कनाडाई प्रधान मंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भी शुक्रवार को अन्य वैश्विक नेताओं की ही तरह पुतिन और लावरोव पर यात्रा प्रतिबंध लगा दिए. इसके अलावा ट्रूडो ने "कनाडा के समर्थन से रूस को स्विफ्ट भुगतान प्रणाली से हटाने का संकेत दिया, जो वैश्विक बैंकिंग प्रणाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है." उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति पुतिन के आक्रमण को बढ़ावा देने के लिए बेलारूस पर भी प्रतिबंधों को मंजूरी दी जाएगी.

एशिया-पैसिफिक
भारत अब तक प्रतिबंधों में शामिल होने से बचता रहा है, जबकि जापान के प्रधान मंत्री फुमियो किशिदा ने यूक्रेन की यथास्थिति को बलपूर्वक बदलने की पुतिन के प्रयासों की आलोचना की है और सेमीकंडक्टर्स के निर्यात पर अंकुश लगाने का ऐलान किया है,  जिसकी कमी से वर्तमान में पूरी दुनिया गुजर रही है. इसके अलावा जापान ने वित्तीय संस्थानों पर भी बैन लगाया है.

पड़ोसी ताइवान ने घोषणा की है कि वह प्रतिबंधों में शामिल होगा क्योंकि क्रेमलिन की कार्रवाई "नियम-आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था के लिए सबसे गंभीर खतरा है."

ऑस्ट्रेलिया के प्रधान मंत्री स्कॉट मॉरिसन ने प्रतिबंदों को दूसरी कड़ी का ऐलान किया है. इसके तहत 25 लोगों पर यात्रा प्रतिबंध के अलावा चार वित्तीय संस्थानों और सैन्य गियर के विकास और बिक्री में संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाया गया है.

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