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पेट्रोल के लिए 18-18 घंटे इंतजार... पुतिन के रूस में कैसे हुई तेल-गैस की किल्लत? समझिए

यूक्रेन के ड्रोन अब रूस के अंदर जाकर उसकी तेल रिफाइनरियों को निशाना बना रहे हैं. इस कारण रूस में तेल-गैस का संकट खड़ा हो गया है.

पेट्रोल के लिए 18-18 घंटे इंतजार... पुतिन के रूस में कैसे हुई तेल-गैस की किल्लत? समझिए
रूस में पेट्रोल के लिए लंबी-लंबी लाइनें लग रही हैं.
AFP
  • रूस में यूक्रेन युद्ध के चलते तेल रिफाइनरियों पर ड्रोन हमलों से तेल-गैस की किल्लत हो गई है
  • रूस के कई शहरों में फ्यूल पंपों के बाहर लंबी-लंबी कतारें लग गई हैं, लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है
  • यूक्रेन के ड्रोन हमलों के कारण रूस की कई प्रमुख तेल रिफाइनरियां बंद हो गई हैं,
नई दिल्ली:

रूस कभी दुनिया का सबसे बड़ा ऑयल एक्सपोर्टर हुआ करता था, लेकिन अब यहीं पर तेल-गैस का सबसे बड़ा संकट खड़ा हो गया है. रूस से खबरें आ रही हैं कि लोगों को गाड़ियों में भरवाने के लिए पेट्रोल-डीजल और गैस नहीं मिल रही है. संकट के कारण फ्यूल पंपों पर लड़ाई तक हो रही है. आलम ये है कि सरकार को फ्यूल पंपों पर गार्ड्स को तैनात करना पड़ रहा है.

रूस में आए इस तेल संकट का सबसे बड़ा कारण यूक्रेन युद्ध है. यूक्रेन ने बीते कुछ हफ्तों में रूस की तेल रिफाइनरियों को निशाना बनाया गया है. इस कारण वहां अब तेल और गैस की किल्लत होने लगी है.

स्थानीय रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि लोगों को पेट्रोल-गैस के लिए 18-18 घंटों तक लाइन में लगकर इंतजार करना पड़ रहा है.

कैसे हालात हैं रूस में?

यूक्रेन ने एक महीने में रूस के अंदरूनी इलाकों पर ड्रोन अटैक किए हैं. इनमें रूस की तेल रिफाइनरियों को बड़ा नुकसान पहुंचा है.

रूस के कई हिस्सों में फ्यूल पंपों के बाहर लंबी-लंबी लाइनें दिखाई दे रही हैं. यूक्रेन से लगभग 5 हजार किलोमीटर दूर इरकुत्स्क में फ्यूल पंपों के बाहर इतनी लंबी लाइनें लग रही हैं कि स्थानीय प्रशासन को पोर्टेबल टॉयलेट लगाने पड़े हैं.

एक रूसी महिला अलोना सादोवनिकोवा ने न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया कि वह, उनके पति और उनका 18 महीने का बच्चा शुक्रवार रात 11 बजे लाइन में लगे थे और अगले दिन शाम 5 बजे जाकर उन्हें गैस मिली. 

रूस में तेल और गैस की किल्लत के बीच जमाखोरी और ब्लैक मार्केटिंग भी हो रही है. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, रूस के क्रास्नोडार में पुलिस ने दो लोगों को हिरासत में लिया है, जिनकी कार में 1 हजार लीटर पेट्रोल मिला था और उन पर इसे ज्यादा कीमत पर बेचने का शक था. 

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लेकिन रूस में ऐसी दिक्कत क्यों?

रूस दुनिया का न सिर्फ सबसे बड़ा ऑयल एक्सपोर्टर है, बल्कि दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उत्पादक भी है. लेकिन यूक्रेन के ड्रोन हमलों ने रूस में तेल का संकट खड़ा कर दिया है.

यूक्रेन ने जून में रूस की चौथी सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी नोरसी पर कई बार ड्रोन हमले किए. 'द मॉस्को टाइम्स' के मुताबिक, 24 जून को एक ड्रोन हमले में नोरसी रिफाइनरी की एक यूनिट तबाह हो गई थी. इसके बाद नोरसी पर एक और बड़ा ड्रोन हमला हुआ था. नतीजा ये हुआ कि 2 जुलाई तक नोरसी ने गैस और डीजल की बिक्री बंद कर दी.

नोरसी रूस की 5वीं रिफाइनरी है जो ड्रोन हमलों के कारण बंद पड़ गई है. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, इसकी मरम्मत के काम में एक साल लग सकता है.

ड्रोन हमलों के कारण गजप्रोम नेफ्ट की मॉस्को रिफाइनरी ने 16 जून से रिफाइनिंग का काम रोक दिया था. इसके अलावा, वोल्गोग्राड रिफाइनरी 1 जून, कुइबिशेव रिफाइनरी 10 जून और टैनेको रिफाइनरी 12 जून से बंद है.

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रूस पर कैसे असर पड़ा?

यूक्रेन हमलों के कारण रूस पर बड़ा असर पड़ा है. रूस के डिप्टी पीएम अलेक्जेंडर नोवाक ने न्यूज एजेंसी TASS को बताया था कि रूस के पास घरेलू बाजार में सप्लाई करने के लिए काफी फ्यूल है लेकिन पेट्रोल को लेकर मची हलचल की वजह से मांग 20 से 30% बढ़ गई है.

उन्होंने कहा था कि जरूरतों को पूरा करने के लिए सिस्टम के लॉजिस्टिक्स कनेक्शन को फिर से व्यवस्थित किया जा रहा है. उन्होंने इस बात के संकेत भी दिए थे कि घरेलू सप्लाई बरकरार रखने के लिए डीजल के एक्सपोर्ट पर रोक लगाई जा सकती है.

इतना ही नहीं, रूस ने हाल ही में तेल रिफाइनरियों को ज्यादा सल्फर वाले गैस और डीजल को बनाने की इजाजत दे दी है, ताकि सप्लाई हो सके. ये छूट दिसंबर तक रहेगी.

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी कुछ दिन पहले इस बात को माना था कि यूक्रेन हमलों के कारण तेल की कमी हो रही है. उन्होंने कहा था, 'एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर होने वाले हमले मुश्किलें पैदा करते हैं. ये बात साफ है.' उन्होंने कहा था कि 'अभी कुछ कमी तो दिख रही है लेकिन हालात गंभीर नहीं है.'

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भारत से खरीद रहा तेल?

भारत कभी सबसे ज्यादा तेल रूस से खरीदता था लेकिन अब भारत ही रूस को तेल भेज रहा है. 2 जुलाई को केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा था कि अगर जरूरत पड़ी तो हम रूस को फ्यूल की सप्लाई कर सकते हैं.

रूसी राष्ट्रपति दफ्तर क्रेमलिन ने पिछले हफ्ते कहा था कि रूस दूसरे देशों के संपर्क में है और सही कीमतों पर फ्यूल के एक्सपोर्ट को लेकर बातचीत कर रहा है.

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि भारत ने रूस को कम से कम 60 हजार मीट्रिक टन तेल भेजा है. एक सूत्र ने बताया कि भारत से रूस को दो टैंकर भेजे गए हैं.

सूत्रों का कहना है कि रूस अलग-अलग देशों से कुल 4 लाख टन तेल आयात करने की तैयारी कर रहा है, जिनमें बेलारूस भी शामिल है. ये इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि रूस में तेल-गैस की रोज की खपत 1.10 लाख टन तक पहुंच जाती है.

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