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कोलंबस की 534 साल पुरानी वो गलती, जिसने 'अमेरिकियों' को 'इंडियन' बना दिया

4 जुलाई 1776 को अमेरिका ने अपनी आजादी का ऐलान किया था. आज उसकी आजादी को 250 साल हो रहे हैं.

कोलंबस की 534 साल पुरानी वो गलती, जिसने 'अमेरिकियों' को 'इंडियन' बना दिया
1492 में कोलंबस ने गलती से अमेरिका को इंडिया समझ लिया था.
नई दिल्ली:

अमेरिका को आजाद हुए आज 250 साल हो गए हैं. 1776 में 4 जुलाई को ही 13 अमेरिकी कॉलोनियों ने ब्रिटेन से अपनी आजादी का ऐलान कर दिया था. इसी आजादी के घोषणापत्र में अमेरिका को अपना नाम 'संयुक्त राज्य अमेरिका' मिला. हालांकि, आजादी की लड़ाई कुछ साल और चली और आखिरकार 3 सितंबर 1783 को अमेरिका और ग्रेट ब्रिटेन के बीच संधि ने आजादी को आधिकारिक बना दिया. लेकिन, अमेरिका 4 जुलाई को ही अपना स्वतंत्रता दिवस मनाता है.

लेकिन आज जो अमेरिकी अपने अमेरिकी होने पर इतना गर्व करते हैं, उन्हें आज भी बहुत से लोग 'इंडियंस' के नाम से ही जानते हैं. ये सदियों पुरानी हुई एक चूक का नतीजा है, जो काफी प्रचलित हो गया. इस कारण 1960 के दशक से एक नया 'नैटिव अमेरिकन' शब्द आया, जो अमेरिका के मूल निवासियों के लिए इस्तेमाल किया जाता है.

क्या थी वो ऐतिहासिक भूल?

इसके लिए इतिहास में जाना होगा. 3 अगस्त 1492 को इटली का नौजवान क्रिस्टोफर कोलंबस तीन जहाजों के बेड़े के साथ एक सफर पर निकला. 

कोलंबस का मकसद था- भारत की खोज. कोलंबस ने स्पेन की महारानी इसाबेल से कहा कि पृथ्वी गोल है और अगर हम पश्चिम की तरफ जाएंगे तो भारत पहुंच जाएंगे. 

करीब महीनेभर की यात्रा के बाद 12 अक्टूबर 1492 को वह बहामास पहुंचा. यहां उसने जिन लोगों को देखा, उनकी थोड़ी डार्क स्किन थी, बाल सीधे थे और अपनी संस्कृति और भाषा थी. कोलंबस को लगा कि उसने भारत को ढूंढ लिया. उसने अपनी डायरी में लिखा, '33 दिन की यात्रा के बाद मैं 'इंडिज' के द्वीपों पर पहुंचा. मैंने शाही झंडों के साथ अपने राजा-रानी के लिए यहां कब्जा कर लिया और किसी ने कोई आपत्ति नहीं की. इन द्वीपों पर 'इंडियन' लोग रहते हैं.'

यही उसकी सबसे बड़ी गलती थी. असल में वह कैरेबियाई द्वीप पर था, जो भारत से हजारों मील दूर है. लेकिन उस वक्त किसी को नहीं पता था. कोलंबस ने उसके बाद तीन और सफर किए, क्यूबा, हिस्पानियोला और सेंट्रल अमेरिका तक पहुंचा, लेकिन वह हमेशा यह मानता रहा कि ये सब एशिया का हिस्सा है.

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कोलंबस की 'गलती' को ही सही मान बैठी दुनिया

कोलंबस वापस यूरोप लौट गया. इस बात से बेखबर कि उसने अमेरिका को ढूंढ निकाला है. कोलंबस जब वापस गया तो स्पेन ने इन नए इलाकों को 'लास इंडियाज' नाम दे दिया. राजा और रानी ने खुद को 'किंग एंड क्वीन ऑफ द इंडिज' की उपाधि दे दी. कोलंबस को मरते दम तक पता नहीं चला कि उसने भारत नहीं, बल्कि अमेरिका को ढूंढा है.

तो आज अमेरिका का नाम कुछ और होता

दिलचस्प बात ये है कि कोलंबस के यूरोप लौटने के बाद कई और एक्सपोलरर ने बताया कि उसने जो ढूंढा है, वह इंडिया नहीं है. इटैलियन एक्सप्लोरर अमेरिगो वेस्पुची (Amerigo Vespucci) भी उस जगह आया, जहां कोलंबस आया था. अमेरिगो ने कहा कि वह नई दुनिया है. 

इसके बाद 1507 में जर्मन नागरिक मार्टिन वाल्डसिमुलर ने दुनिया का नया नक्शा बनाया. इस नक्शे में उसने नए महाद्वीप को अमेरिगो के नाम पर 'अमेरिका' नाम दे दिया. 

अब ये भी दिलचस्प बात है कि जिस जगह को कोलंबस ने गलती से ढूंढ निकाला था, उस जगह का नाम अमेरिगो के नाम पर पड़ा. 

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लेकिन 'इंडियन' शब्द से पीछा नहीं छूटा

'अमेरिका' नाम मिलने के बाद भी यहां के स्थानीय लोगों का नाम 'इंडियन' ही रह गया, क्योंकि यह शब्द काफी ज्यादा प्रचलित हो गया. यहां के लोग आज भी खुद को सामान्य रूप से संबोधित करने के लिए 'इंडियन' शब्द का ही इस्तेमाल करते हैं. 

इसका इस्तेमाल 'फेडरल इंडियन लॉ' में किया जाता है, जो अमेरिकी कानून का वह हिस्सा है जो अमेरिका के मूल निवासियों के अधिकारों और उनकी स्थिति से जुड़ा है.

ब्रिटानिका की एक रिपोर्ट बताती है कि 1960 के दशक में 'अमेरिकन इंडियन' शब्द चलन में आया. लेकिन इसका भी विरोध हुआ. अमेरिका और कनाडा में कई एक्टिविस्ट ने 'अमेरिकन इंडियन' शब्द को गलत और अपमानजनक अर्थों वाला मानकर नकारना शुरू कर दिया. इसके बजाय 'नैटिव अमेरिकन' शब्द को प्राथमिकता दी जाने लगी. हालांकि, कई मूल निवासी अभी भी खुद को 'इंडियन' ही कहते हैं.

हालांकि, कुछ लोग 'नैटिव अमेरिकन' शब्द को भी सही नहीं मानते हैं. वह इसलिए क्योंकि 'अमेरिका' नाम इटैलियन नागरिक 'अमेरिगो वेस्पुची' के नाम पर पड़ा है. लोग सवाल उठाते हैं कि उनके नाम पर इस जगह का नाम कैसे रखा जा सकता है?

नाम को लेकर ये सारा झमेला इस बात की याद दिलाता है कि इतिहास में हुई गलतियों को सदियों बाद भी सुधारना कितना मुश्किल होता है.

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