Pakistan rejects signing Abraham Accords: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को पाकिस्तान ने झटका दे दिया है. ट्रंप की अपील के बावजूद पाकिस्तान ने इजरायल से रिश्ते सामान्य करने वाले समझौते- अब्राहम अकॉर्ड्स में शामिल होने को लेकर कोई प्रतिबद्धता देने से इनकार कर दिया है. पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक, वहां के रक्षा मंत्री ख्वाजा मोहम्मद आसिफ ने कहा कि इस्लामाबाद ऐसा कोई समझौता समर्थन नहीं करेगा, जो देश की “मूल विचारधाराओं” के खिलाफ हो. पाकिस्तानी चैनल समा टीवी को दिए इंटरव्यू में आसिफ से पूछा गया कि क्या अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कथित दबाव और कूटनीतिक संकेतों के बाद पाकिस्तान अब्राहम अकॉर्ड्स पर हस्ताक्षर कर सकता है.
इंटरव्यू के दौरान आसिफ ने कहा, “व्यक्तिगत तौर पर मुझे नहीं लगता कि हमें ऐसे किसी समझौते में शामिल होना चाहिए, जो हमारी मूल विचारधाराओं से टकराता हो.” इजरायल के साथ रिश्तों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने कहा, “आप उन लोगों के साथ कैसे बैठ सकते हैं, जिनकी बात पर एक दिन के लिए भी भरोसा नहीं किया जा सकता?”
ट्रंप की अपील
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कई मुस्लिम और अरब देशों से अब्राहम अकॉर्ड्स में शामिल होने की अपील की थी. उन्होंने इसे ईरान के साथ संभावित समझौते से जुड़ा एक बड़ा क्षेत्रीय समाधान बताया. ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक बहुत लंबी पोस्ट में कहा कि अब्राहम समझौते में अधिक देशों का शामिल होना मिडिल ईस्ट के लिए “ऐतिहासिक घटना” बन सकती है. उन्होंने सऊदी अरब, कतर, पाकिस्तान, तुर्किये, मिस्र, जॉर्डन और बहरीन जैसे देशों से एक साथ अब्राहम अकॉर्ड्स पर हस्ताक्षर करने की अपील की.
ट्रंप ने कहा कि यह मुद्दा उनकी सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान, कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी, पाकिस्तान सेना प्रमुख आसिम मुनीर, तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोआन, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी, जॉर्डन के राजा अब्दुल्ला द्वितीय और बहरीन के राजा हमद बिन ईसा अल खलीफा समेत कई नेताओं के साथ हुई बातचीत के बाद सामने आया. यहां खास बात थी कि पाकिस्तान के प्रतिनिधि के तौर पर उन्होंने पीएम शहबाज शरीफ का नहीं बल्कि सेना प्रमुख आसिम मुनीर का जिक्र किया था.
बता दें कि अब्राहम अकॉर्ड्स 2020 में अमेरिका की मध्यस्थता में हुए बड़े समझौते हैं, जिनके बाद इजरायल और कई अरब देशों के बीच राजनयिक, आर्थिक और सुरक्षा संबंध सामान्य हुए थे.
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