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आतंकवाद और सुरक्षा के नाम पर अपनों का ही संहार! पाकिस्तान की सैन्य नीति ने ली 26 बेगुनाहों की जान

पाकिस्तान सरकार और उसकी सेना का 'आतंकवाद-रोधी' मुखौटा अब पूरी तरह उतर चुका है, क्योंकि बम और मोर्टार अब आतंकियों के ठिकानों पर नहीं, बल्कि उन रिहायशी इलाकों और गाड़ियों पर गिर रहे हैं, जहां मासूम बच्चे खेल रहे होते हैं.

आतंकवाद और सुरक्षा के नाम पर अपनों का ही संहार! पाकिस्तान की सैन्य नीति ने ली 26 बेगुनाहों की जान
सुरक्षा के नाम पर अपनों की जान ले रहा पाकिस्तान
  • पाकिस्तानी सेना ने सुरक्षा के नाम पर अपनी ही जनता और पड़ोसी मुल्क के निर्दोष नागरिकों को मार दिया
  • अफगानिस्तान में 20-21 फरवरी की रात हुए हमले में 17 नागरिकों की मौत हुई, जिनमें 11 बच्चे शामिल थे
  • पाक के खैबर जिले की तिराह घाटी में मोर्टार हमले से 5 की मौत, सुरक्षा बलों की फायरिंग में चार और मौतें हुईं
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नई दिल्ली:

पाकिस्तान की सैन्य सत्ता ने एक बार फिर सुरक्षा के नाम पर अपनी ही जनता और पड़ोसी मुल्क के निर्दोष नागरिकों के खून से अपने हाथ रंगे हैं. हवाई हमलों ने पाकिस्तान के उस खोखले दावे की पोल खोल दी, जिसमें वह सिर्फ 'आतंकियों' को निशाना बनाने की बात करता है. पाकिस्तान ने 20 -21 फरवरी 2026 की रात को अफ़ग़ानिस्तान के नंगरहार प्रांत के बेसूद इलाके में हवाई हमले किए. पाकिस्तान की ओर से दावा किया गया कि ये हमले तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के ठिकानों पर किए गए लेकिन स्थानीय अफगान अधिकारियों और क्षेत्रीय सूत्रों के मुताबिक यह हमला एक रिहायशी परिसर पर हुआ. इस हमले में 17 नागरिकों की मौत हुई, जिनमें 11 बच्चे शामिल थे. इस घटना के बाद इलाके में भारी तनाव फैल गया.

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48 घंटों के अंदर दो देशों में 26 पख्तूनों की जान

24 घंटे के भीतर हिंसा पाकिस्तान की सीमा के अंदर भी दिखाई दी. खैबर ज़िले की तिराह घाटी में एक नागरिक वाहन पर मोर्टार गिरा, जिसमें पांच पख्तूनों की मौत हो गई. मरने वालों में दो बच्चे भी थे. इस घटना के बाद स्थानीय लोग विरोध के लिए एक सैन्य चौकी के बाहर इकट्ठा हुए. घटना स्थल पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि प्रदर्शनकारी निहत्थे थे. इसी दौरान सुरक्षा बलों की फायरिंग में चार और लोगों की मौत हो गई और पांच लोग घायल हो गए. इस तरह सिर्फ 48 घंटों के अंदर दो देशों में कुल 26 पख्तूनों की जान चली गई.

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ये घटनाएं किसी एक दिन की अलग घटना नहीं मानी जा रही हैं. जनवरी 2025 से पाकिस्तान के भीतर आतंकवाद-रोधी अभियानों में 168 से अधिक पख्तूनों के मारे जाने की रिपोर्ट सामने आई है. इन मौतों में महिलाए और बच्चे भी शामिल बताए गए हैं. इसके अलावा, सितंबर 2025 से फरवरी 2026 के बीच अफ़ग़ानिस्तान में पाकिस्तानी सैन्य कार्रवाइयों में कम से कम 88 पख्तूनों नागरिकों की मौत की सूचना है.

आतंकवाद के नाम पर ले रहा अपनों की जान

सरकार इन सभी अभियानों को राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई बताती है. उनका कहना है कि सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय आतंकी समूहों के खिलाफ सख्त कदम उठाना जरूरी है. दूसरी ओर आलोचकों का तर्क है कि इन अभियानों में बड़ी संख्या में आम नागरिक प्रभावित हो रहे हैं और अधिकतर घटनाएं पश्तून बहुल क्षेत्रों में हो रही हैं. उनका कहना है कि इन इलाकों में लंबे समय से भारी सैन्य तैनाती, चेकपोस्ट, कर्फ़्यू और सख्त सुरक्षा उपाय लागू हैं, जिससे आम लोगों का जीवन प्रभावित होता है.

हालिया घटनाओं ने फिर से यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या यह केवल आतंकवाद-रोधी नीति है, या फिर एक ऐसा सुरक्षा ढाचा बन चुका है, जिसमें आम नागरिक भी लगातार हिंसा और असुरक्षा का सामना कर रहे हैं.

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जनवरी 2025 से अब तक गई 168 से अधिक पख्तूनों की जान

ये घटनाएं महज़ एक सैन्य चूक नहीं, बल्कि उस संस्थागत विफलता का प्रमाण हैं जो जनवरी 2025 से अब तक 168 से अधिक पख्तूनों की जान ले चुकी है. पाकिस्तान सरकार और उसकी सेना का 'आतंकवाद-रोधी' मुखौटा अब पूरी तरह उतर चुका है, क्योंकि बम और मोर्टार अब आतंकियों के ठिकानों पर नहीं, बल्कि उन रिहायशी इलाकों और गाड़ियों पर गिर रहे हैं, जहां मासूम बच्चे खेल रहे होते हैं. बच्चों की चीखें और पख्तूनों का यह आक्रोश अब पाकिस्तान के सत्ता प्रतिष्ठान से जवाबदेही की मांग कर रहा है.

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