- पाकिस्तान में शिया, अहमदिया और हजारा समुदाय लगातार सांप्रदायिक हिंसा और हमलों का शिकार बन रहे हैं
- इस्लामाबाद में शिया मस्जिद पर आत्मघाती हमले में 36 लोगों की मौत और 170 से अधिक घायल हुए थे
- सरकार और सुरक्षा एजेंसियां धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और चरमपंथी दुरुपयोग के खिलाफ कार्रवाई में नाकाम
पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं. एक रिपोर्ट में कहा गया है कि शिया, अहमदिया और हजारा जैसे समुदाय बढ़ती सांप्रदायिक हिंसा के बीच लगातार निशाना बन रहे हैं और सरकार उन्हें पर्याप्त सुरक्षा देने में विफल रही है. एथेंस स्थित संस्था डायरेक्टस की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान सरकार सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों द्वारा होने वाले दुरुपयोग के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं कर पा रही है, जबकि चरमपंथी समूह धार्मिक अल्पसंख्यकों को लगातार निशाना बना रहे हैं.
रिपोर्ट में क्या-क्या?
रिपोर्ट में पिछले महीने इस्लामाबाद में एक शिया मस्जिद पर हुए आत्मघाती हमले का जिक्र किया गया है, जिसमें शिया समुदाय के 36 लोगों की मौत हो गई थी और करीब 170 लोग घायल हो गए थे. इस घटना ने पाकिस्तान में अल्पसंख्यक मुस्लिम समुदायों की असुरक्षा को उजागर किया है. रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान की आबादी में शिया समुदाय लगभग 10 से 15 प्रतिशत है, लेकिन उन्हें अक्सर बहुसंख्यक सुन्नी समूहों द्वारा उत्पीड़न और घातक हमलों का सामना करना पड़ता है.
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शिया नेता राजा नासिर अब्बास जाफरी ने कहा कि संघीय राजधानी में इस तरह का आतंकी हमला न केवल लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में गंभीर विफलता है, बल्कि यह प्रशासन और कानून-व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करता है. रिपोर्ट में कहा गया है कि शिया, हजारा, अहमदिया, इस्माइली, दाऊदी बोहरा, जिक्रि, सूफी और बरेलवी मुस्लिम समुदाय लगातार सांप्रदायिक हिंसा, भेदभावपूर्ण कानूनों और कमजोर कानूनी सुरक्षा का सामना कर रहे हैं. इनके धार्मिक स्थलों पर भी अक्सर हमले का खतरा बना रहता है.
अल्पसंख्यक मुस्लिमों पर बढ़े हैं हमले
इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान में सुन्नी चरमपंथी समूहों द्वारा अल्पसंख्यक मुस्लिम समुदायों पर हमले बढ़े हैं, जिसका एक कारण सरकार द्वारा सांप्रदायिक नफरत फैलाने वाले समूहों पर प्रभावी कार्रवाई न करना है. रिपोर्ट के अनुसार, कई मामलों में सांप्रदायिक हिंसा के आरोपियों के खिलाफ मुकदमा न चलाने से ऐसा माहौल बन गया है जिसमें ऐसे हमलों को अप्रत्यक्ष रूप से बढ़ावा मिलता है.
पाकिस्तान में अक्सर निशाने पर रहने वाले प्रमुख अल्पसंख्यक समुदायों में अहमदिया समुदाय भी शामिल है. अक्टूबर 2025 में लाहौर की एक अहमदिया मस्जिद पर गोलीबारी की घटना का जिक्र करते हुए अहमदिया मुस्लिम जमात कनाडा ने कहा कि यह पाकिस्तान में अहमदिया समुदाय के खिलाफ जारी हिंसा और राज्य-समर्थित भेदभाव का एक और उदाहरण है.
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय ने भी पहले पाकिस्तान में अहमदिया समुदाय की कब्रों और मीनारों के अपमान और पंजाब के डास्का में 100 साल पुरानी मस्जिद को ध्वस्त किए जाने की घटना की निंदा की थी. रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि पाकिस्तान में इस्माइली समुदाय भी सुन्नी चरमपंथियों के निशाने पर रहा है. लगभग एक दशक पहले कराची जा रही एक बस पर हुए हमले में कम से कम 43 इस्माइली मारे गए थे. रिपोर्ट के अनुसार, हमले के स्थान से मिले पर्चों में धमकी दी गई थी कि इस समुदाय को खत्म कर इस्लामी शरीया लागू करने तक हमलावर चैन से नहीं बैठेंगे.
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