भारत से पाकिस्तान के पवित्र सिख गुरुद्वारों के दर्शन करने जाने वाले तीर्थयात्रियों के लिए एक बड़ी और अच्छी खबर है. नई दिल्ली स्थित पाकिस्तान उच्चायोग ने भारतीय सिख श्रद्धालुओं को कुल 737 वीजा जारी किए हैं. ये श्रद्धालु 10 से 19 जून 2026 तक पाकिस्तान में आयोजित होने वाले सालाना उत्सव में शामिल होने जा रहे हैं. यह वार्षिक समारोह सिख धर्म के पांचवें गुरु, श्री गुरु अर्जुन देव जी के शहीदी दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित किया जा रहा है.
पाकिस्तानी उच्चायोग ने सोमवार (8 जून 2026) को एक आधिकारिक बयान जारी कर इस बात की पुष्टि की है. इस फैसले के बाद उन सैकड़ों श्रद्धालुओं का रास्ता साफ हो गया है, जो लंबे समय से इस ऐतिहासिक और आध्यात्मिक यात्रा का इंतजार कर रहे थे.
The Pakistan High Commission in New Delhi has issued 737 visas to pilgrims from India to participate in the annual festival scheduled on the eve of Martyrdom Day of Guru Arjun Dev Ji to be held in Pakistan from 10-19 June 2026.@ForeignOfficePk
— Pakistan High Commission India (@PakinIndia) June 8, 2026
पवित्र गुरुद्वारों के दर्शन करेंगे भारतीय श्रद्धालु
अपनी इस यात्रा के दौरान भारतीय तीर्थयात्री पाकिस्तान में स्थित कई ऐतिहासिक और बेहद पवित्र सिख धार्मिक स्थलों के दर्शन करेंगे. पाकिस्तान उच्चायोग की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, श्रद्धालु मुख्य रूप से गुरुद्वारा पंजा साहिब, गुरुद्वारा ननकाना साहिब (गुरु नानक देव जी का जन्मस्थान) और गुरुद्वारा करतारपुर साहिब के दर्शन करेंगे.
इन सभी गुरुद्वारों का सिख इतिहास में एक विशेष और बेहद आदरणीय स्थान है. यही वजह है कि हर साल भारत से बड़ी संख्या में लोग इन पवित्र स्थलों पर शीश नवाने की इच्छा रखते हैं. इस 10 दिवसीय यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखा जा रहा है.
1974 के द्विपक्षीय प्रोटोकॉल के तहत जारी हुए वीजा
पाकिस्तान उच्चायोग ने अपने बयान में साफ किया है कि इन वीजा का जारी होना कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं है. दरअसल, यह कदम पाकिस्तान सरकार की उस प्रतिबद्धता का हिस्सा है, जिसके तहत दोनों देशों के बीच 'धार्मिक स्थलों की यात्रा पर द्विपक्षीय प्रोटोकॉल 1974' पर हस्ताक्षर किए गए थे.
इस समझौते के तहत दोनों देश एक-दूसरे के नागरिकों को तय धार्मिक अवसरों पर पवित्र स्थलों के दर्शन करने की अनुमति देते हैं. पाकिस्तान का कहना है कि वह इस 1974 के प्रोटोकॉल को पूरी तरह लागू करने और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए लगातार काम कर रहा है.
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