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ग्रेट निकोबार परियोजना: क्यों अहम है भारत का यह महत्वाकांक्षी समुद्री और रणनीतिक प्लान?

ग्रेट निकोबार में विकसित होने वाला नया ढांचा भारतीय नौसेना और अन्य सुरक्षा बलों को तेजी से संचालन करने में मदद करेगा. मानवीय सहायता, आपदा राहत और खोज एवं बचाव अभियानों को भी बेहतर तरीके से अंजाम दिया जा सकेगा.

ग्रेट निकोबार परियोजना: क्यों अहम है भारत का यह महत्वाकांक्षी समुद्री और रणनीतिक प्लान?
  • केंद्र सरकार ग्रेट निकोबार द्वीप पर ट्रांसशिपमेंट पोर्ट, हवाई अड्डा और नौसैनिक एयर स्टेशन विकसित कर रही है.
  • ग्रेट निकोबार सिक्स डिग्री चैनल के करीब है, जो दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है.
  • परियोजना से भारतीय नौसेना की समुद्री निगरानी क्षमता बढ़ेगी और क्षेत्रीय सुरक्षा मजबूत होगी.

भारत सरकार ग्रेट निकोबार द्वीप को देश के बड़े रणनीतिक और आर्थिक केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना पर काम कर रही है.  इस परियोजना के तहत एक अंतरराष्ट्रीय ट्रांसशिपमेंट पोर्ट, नया हवाई अड्डा और नौसैनिक एयर स्टेशन, एक आधुनिक टाउनशिप तथा बिजली संयंत्र बनाए जाएंगे. सरकार का कहना है कि इससे भारत की समुद्री ताकत बढ़ेगी और विदेशी बंदरगाहों पर निर्भरता कम होगी. 

क्यों महत्वपूर्ण है ग्रेट निकोबार?

ग्रेट निकोबार द्वीप दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में से एक के बेहद करीब स्थित है. यह सिक्स डिग्री चैनल से केवल 40 किलोमीटर दूर है. यह समुद्री मार्ग अदन की खाड़ी से लेकर मलक्का जलडमरूमध्य तक जाता है. दुनिया के करीब दो-तिहाई तेल टैंकर और कंटेनर जहाजों का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है. सरकार का मानना है कि इस क्षेत्र में हथियारों की तस्करी, मादक पदार्थों की तस्करी और अवैध घुसपैठ जैसी चुनौतियां बढ़ी हैं. साथ ही कई देशों ने हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी सैन्य और आर्थिक मौजूदगी मजबूत की है. ऐसे में यह परियोजना भारत की समुद्री निगरानी क्षमता को बढ़ाने में मदद करेगी. 

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सेना और नौसेना को क्या होगा फायदा?

ग्रेट निकोबार में विकसित होने वाला नया ढांचा भारतीय नौसेना और अन्य सुरक्षा बलों को तेजी से संचालन करने में मदद करेगा. मानवीय सहायता, आपदा राहत और खोज एवं बचाव अभियानों को भी बेहतर तरीके से अंजाम दिया जा सकेगा. सरकार का कहना है कि यह परियोजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की "महासागर" नीति के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य क्षेत्रीय सुरक्षा और विकास को बढ़ावा देना है. 

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नया हवाई अड्डा क्यों बनाया जाएगा?

केंद्र सरकार ने हाल ही में भारतीय नौसेना के संचालन नियंत्रण में एक नए ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट को मंजूरी दी है. यह हवाई अड्डा समुद्री निगरानी बढ़ाने के साथ-साथ पर्यटन को भी बढ़ावा देगा. भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण का अनुमान है कि वर्ष 2040 तक इस एयरपोर्ट की क्षमता सालाना 13.5 लाख यात्रियों को संभालने की होगी. सरकार का मानना है कि इससे ग्रेट निकोबार अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर अपनी पहचान बना सकेगा. 

नया स्थान क्यों चुना गया?

हवाई अड्डे के लिए पांच संभावित स्थानों का अध्ययन किया गया था. इनमें कैंपबेल बे स्थित आईएनएस बाज भी शामिल था. विशेषज्ञों ने भू-आकृति, पर्यावरण, जनजातीय आबादी और वन्यजीवों पर प्रभाव जैसे कई पहलुओं का आकलन किया. इसके बाद गलाथिया बे को सबसे उपयुक्त स्थान माना गया. सरकार के अनुसार, आईएनएस बाज का विस्तार करने में कई तकनीकी और पर्यावरणीय बाधाएं थीं. वहां पहाड़ों की कटाई, समुद्र में ड्रेजिंग और मौजूदा ढांचे को हटाने की जरूरत पड़ती. 

पर्यावरण को लेकर क्या चिंताएं हैं?

इस परियोजना को लेकर पर्यावरण समूहों ने कई सवाल उठाए हैं. सरकार का कहना है कि पर्यावरण प्रभाव आकलन पूरी तरह कानूनी नियमों के तहत किया गया है. इस प्रक्रिया में भारतीय प्राणी सर्वेक्षण, भारतीय वन्यजीव संस्थान और सलीम अली सेंटर फॉर ऑर्निथोलॉजी एंड नेचुरल हिस्ट्री जैसी संस्थाओं को शामिल किया गया. एक आकलन के मुताबिक, द्वीप के कुल क्षेत्रफल का बड़ा हिस्सा अब भी राष्ट्रीय उद्यानों, जैवमंडल आरक्षित क्षेत्रों, जंगलों और जनजातीय संरक्षण क्षेत्रों के रूप में सुरक्षित रहेगा. 

वन्यजीव संरक्षण के लिए क्या योजना है?

सरकार ने वन्यजीव और पर्यावरण संरक्षण के लिए 30 वर्षों की विशेष योजना बनाई है. इस पर 2,220 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जाएंगे. इस योजना में लेदरबैक कछुओं, निकोबार मेगापोड पक्षियों और मगरमच्छों के संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा. साथ ही प्रवाल भित्तियों और मैंग्रोव जंगलों को भी संरक्षित किया जाएगा. राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) भी परियोजना की पर्यावरणीय मंजूरियों को बरकरार रख चुका है. 

जनजातीय समुदायों पर क्या असर होगा?

सरकार का कहना है कि परियोजना के कारण किसी भी जनजातीय समुदाय का जबरन विस्थापन नहीं होगा. वन अधिकार कानून के तहत आवश्यक परामर्श प्रक्रिया पूरी की गई है. अंडमान आदिम जनजाति विकास समिति, निकोबारी ट्राइबल काउंसिल और जनजातीय मामलों के मंत्रालय से भी चर्चा की गई है. 

रोजगार के नए अवसर

सरकार का दावा है कि इस परियोजना से क्षेत्र में एक लाख से अधिक रोजगार के अवसर पैदा होंगे. निर्माण, पर्यटन, परिवहन और सेवा क्षेत्र में भी नई नौकरियां पैदा होने की संभावना है. सरकार के अनुसार ग्रेट निकोबार परियोजना राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ आर्थिक विकास और रोजगार सृजन का भी बड़ा माध्यम बनेगी. 

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