- पाकिस्तान में अवैध प्रवासियों पर अब सख्ती होगी. 11 जुलाई से गिरफ्तारी के आदेश दिए हैं.
- अफगानी शरणार्थियों पर पाकिस्तान सरकार की तरफ से सख्ती दिखनी शुरू हो गई है.
- जिनके पास वैध दस्तावेज नहीं होंगे उनकी गिरफ्तारी कर उन्हें डिपोर्ट किया जाएगा.
पाकिस्तान में बिना वैध वीजा या बिना कानूनी दस्तावेजों के रह रहे अवैध प्रवासियों को तुरंत गिरफ्तार करने और जबरन डिपोर्ट करने के निर्देश जारी किए गए हैं. जिसमें मुख्य रूप से अफगान नागरिक शामिल हैं. पाकिस्तान सरकार ने 10 जुलाई तक ऐसे सभी लोगों को स्वेच्छा से देश छोड़ने के लिए कहा था. लेकिन इसके बाद भी जो लोग रह रहे होंगे उनके खिलाफ अब कार्रवाई की जाएगी. पाकिस्तान सरकार की गैर-कानूनी विदेशियों की वापसी योजना (IFRP) के तहत गृह मंत्रालय ने शनिवार से देश में बिना वैध वीजा के रह रहे लोगों के खिलाफ देशव्यापी कार्रवाई और तुरंत गिरफ्तारी का आदेश दिया है.
5000 लोग हर दिन पाकिस्तान से लौट रहे
संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (UNHCR)के प्रतिनिधियों ने बताया है कि हाल के चार महीनों में 400000 से ज़्यादा अफगान प्रवासी वापस लौटे हैं. रोज़ाना लगभग 5,000 लोग वापस आ रहे हैं. अभी पाकिस्तान में 8,00,000 से ज़्यादा अफगान नागरिक हैं. जिनके पास 'प्रूफ ऑफ रजिस्ट्रेशन' कार्ड हैं और 6,00,000 जिनके पास 'अफगान सिटिजन कार्ड'हैं. इसके अलावा 1,00,000 से ज़्यादा लोग ऐसे हैं जो 2021 में हुए राजनीतिक बदलावों के बाद आए थे. हालाँकि अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने पाकिस्तानी सरकार से आग्रह किया है कि वे सभी प्रवासियों को सुरक्षा के लिए खतरा न मानें फिर भी तय की गई सख़्त कार्रवाई जारी रहेगी.
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पाकिस्तान के सभी प्रांतों में योजना लागू
पाकिस्तान के गृह मंत्रालय ने 'अवैध विदेशी स्वदेश वापसी योजना' (IFRP) के इस नए चरण को पूरी ताकत से लागू करने के निर्देश दिए हैं. सभी प्रांतीय सरकारों, कानून प्रवर्तन एजेंसियों और स्थानीय प्रशासनों के लिए अब यह अनिवार्य कर दिया गया है कि वे रोजाना पकड़े गए प्रवासियों और डिपोर्टेशन की प्रगति रिपोर्ट सीधे संघीय सरकार को सौंपें. देश भर में बनाए गए डिटेंशन और होल्डिंग सेंटर्स को अलर्ट पर रखा गया है, जहां से कानूनी प्रक्रिया पूरी कर प्रवासियों को सीमा पार भेजा जा रहा है.
1 जुलाई को हुई थी रिव्यू मीटिंग
1 जून 2026 को हुई एक हाई-लेवल रिव्यू मीटिंग के बाद, गृह मंत्रालय ने सभी प्रांतों के साथ-साथ गिलगित-बाल्टिस्तान,पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर और इस्लामाबाद कैपिटल टेरिटरी के अधिकारियों को स्वदेश वापसी की प्रक्रिया तेज करने का निर्देश दिया. 11 जुलाई, 2026 से, स्थानीय अधिकारियों को गृह मंत्रालय को रोज़ाना रिपोर्ट देनी होगी, जिसमें बिना वैध वीज़ा वाले नागरिकों की संख्या, उनके ख़िलाफ़ की गई कार्रवाई और उनकी मौजूदा स्थिति की जानकारी देनी होगी.
पाकिस्तान की यह सख़्त कार्रवाई यह दिखाती है कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति असल में कैसे काम करती है. हालांकि सार्वजनिक मंचों पर अक्सर वैश्विक एकजुटता की बात होती है, लेकिन जब किसी देश को आंतरिक सुरक्षा और आर्थिक दबावों का सामना करना पड़ता है, तो राष्ट्रीय हित ही नीति तय करने का मुख्य आधार होते हैं.
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अफगानिस्तान से पाकिस्तान आए थे लोग
दरअसल, अप्रैल 1978 में सोवियत समर्थक तख्तापलट के बाद और बाद में 1979 में सोवियत कब्जे के दौरान लाखों अफगानी नागिरक लगातार पाकिस्तान की तरफ आए थे. जिनमें से कई लोग यही रहते हैं. लेकिन दशकों से रह रहे लोगों को भी अब बाहर निकाला जा रहा है. इस वापसी अभियान को जो बात खास बनाती है, वह यह है कि यह पाकिस्तान के ऐतिहासिक डिप्लोमैटिक रुख से कितना अलग है. सालों से इस्लामाबाद दूसरे देशों की तरफ से सख्त बॉर्डर कंट्रोल लागू करने की मुखर आलोचना करता रहा है. लेकिन अपने देश में खुद वह ऐसा ही कर रहा है. यूरोपीय देशों ने जब अवैध प्रवासियों की आमद के खिलाफ अपनी सीमाओं को सख्त करने की कोशिश की तो पाकिस्तान ने इसकी आलोचना की थी. लेकिन, आज पॉलिसी की स्क्रिप्ट बदल गई है. अपनी ही लंबे समय से चली आ रही रिफ्यूजी आबादी से निपटने के लिए पाकिस्तान ने वही तर्क अपनाए हैं. जिनकी उसने कभी आलोचना की थी.
दरअसल, पाकिस्तान ने मार्च और अप्रैल 2025 में अफगान सिटिजन कार्ड धारकों के लिए समय सीमा तय कर दी थी. जिसके बाद अगस्त 2025 में संयुक्त राष्ट्र के 'प्रूफ ऑफ रजिस्ट्रेशन' कार्ड धारकों की मोहलत भी खत्म हो गई थी. 2026 में आखिरी चरण शुरू कर दिया था. जिसके तहत 10 जुलाई 2026 उन सभी प्रवासियों के लिए आखिरी मौका था, जो बिना किसी दस्तावेज के या एक्सपायर्ड वीजा के पाकिस्तान में रह रहे थे.
पाकिस्तान का दावा
पाकिस्तानी सरकार का दावा है कि यह कदम देश की आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने, तस्करी रोकने और चरमराते आर्थिक संसाधनों पर बढ़ते बोझ को कम करने के लिए उठाया गया है. अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि वैध वीजा और कानूनी दस्तावेजों के साथ पाकिस्तान में रह रहे विदेशी नागरिकों को घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन नियमों का उल्लंघन करने वालों के साथ अब कोई नरमी नहीं बरती जाएगी.
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