रक्सौल–हल्दिया एक्सप्रेसवे बिहार-यूपी बॉर्डर से पश्चिम बंगाल के हल्दिया पोर्ट को जोड़ने वाला आर्थिक गलियारा है. यह उत्तर प्रदेश-बिहार के बॉर्डर से झारखंड, बंगाल के साथ नेपाल तक तेज आवाजाही का साधन बनेगा. रक्सौल–हल्दिया एक्सप्रेसवे (Raxaul–Haldia Expressway) भारतमाला परियोजना के तहत ग्रीनफील्ड एक्सेस कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे है.यह एक्सप्रेसवे नेपाल सीमा पर बिहार के रक्सौल शहर को बंगाल के प्रमुख समुद्री बंदरगाह हल्दिया पोर्ट तक कनेक्टिविटी देगी.यह शुरुआती चरण में 4 लेन का एक्सप्रेसवे होगा, जिसे 6 लेन तक विस्तार दिया जा सकते है. भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) इस एक्सप्रेसवे का निर्माण कर रहा है.
- 695 से 700 किलोमीटर लंबाई एक्सप्रेसवे की
- 35 से 40,000 करोड़ रुपये लागत
- बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल से कनेक्शन
रक्सौल–हल्दिया एक्सप्रेसवे की कनेक्टिविटी
- पटना–पूर्णिया एक्सप्रेसवे: बिहार के राज्यों के एक्सप्रेसवे को इंटरचेंज मिलेगा. तीन अन्य एक्सप्रेसवे से कनेक्टिविटी होगी.
- वाराणसी–कोलकाता एक्सप्रेसवे: पश्चिम बंगाल और झारखंड में यह वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे नेटवर्क से जुड़ेगा.
- इंडो-नेपाल बॉर्डर पर एकीकृत चेक पोस्ट रक्सौल से जुड़कर यह इंटरनेशनल इकोनॉमिक कॉरिडोर का हिस्सा बनेगा.
- गंगा एक्सप्रेसवे के एक्सटेंशन, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से भी क्रॉस करेगा और इससे उत्तर प्रदेश को भी फायदा होगा.
बिहार में 290 किमी लंबाई
बिहार में रक्सौल जो इंडिया-नेपाल बॉर्डर पर है, वहां से शुरू होगा. पूर्वी चंपारण जिले के रक्सौल से शिवहर,मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, बेगूसराय, लखीसराय, जमुई जिले से गुजरेगा. बिहार के उत्तर से दक्षिण-पूर्वी हिस्से को सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी. गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे के अलावा ये एक और एक्सप्रेसवे है, जो बिहार से बंगाल तक कनेक्टिविटी देगा.
झारखंड में 120 किमी तक लंबाई
झारखंड में देवघर, दुमका और जामताड़ा तक ये एक्सप्रेसवे जाता है और इसकी लंबाई 100 से 120 किमी है. संथाल परगना क्षेत्र में औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा. एनएचएआई इसे अलग-अलग फेज में पूरा करेगा.
पश्चिम बंगाल में 280-300 किमी
पश्चिम बंगाल में 280 से 300 किमी इसकी लंबाई है. पश्चिम बर्धमान (आसनसोल, दुर्गापुर के समीप से ये बांकुरा जिले, पश्चिम मेदिनीपुर और पूर्व मेदिनीपुर जिले से गुजरेगा.हल्दिया पोर्ट इस एक्सप्रेसवे का आखिरी बिंदु होगा.
रक्सौल–हल्दिया एक्सप्रेसवे का फायदा
इस एक्सप्रेसवे से नेपाल के साथ अंतरराष्ट्रीय व्यापार आसान होगा. चारोंओर जमीन से घिरे नेपाल का अधिकांश आयात-निर्यात कोलकाता के हल्दिया पोर्ट से होता है. एक्सप्रेसवे से नेपाल से हल्दिया बंदरगाह तक माल ढुलाई का समय 30 घंटे से कम होकर 10-12 घंटे रह जाएगा. अभी नेशनल हाईवे (NH-31, NH-2) पर भारी ट्रैफिक से आवाजाही, लॉजिस्टिक्स खर्च काफी ज्यादा रहता है. नया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे 120 किमी प्रति घंटे की रफ्तार देगा.
रक्सौल–हल्दिया एक्सप्रेसवे से बिहार-झारखंड को फायदा
यह एक्सप्रेसवे बिहार और झारखंड के इंडस्ट्रियल हब को सीधे हल्दिया पोर्ट से जोड़ेगा. निर्यात कारोबार को गति मिलेगी.पूर्वी भारत में इंडस्ट्रियल कॉरिडोर का नेटवर्क बनाने में जुटी सरकार का लक्ष्य पूरा होगा.लॉजिस्टिक्स पार्क, इंडस्ट्रियल क्लस्टर और फूड प्रोसेसिंग यूनिट एक्सप्रेसवे किनारे बनने से युवाओं को रोजगार मिलेगा. इस प्रोजेक्ट के लिए डीपीआर और भूमि अलाइनमेंट सर्वे का काम चल रहा है. बिहार और पश्चिम बंगाल के संबंधित जिलों में भूमि अधिग्रहण के लिए गजट नोटिफिकेशन और सीमांकन का काम हो रहा है.यह भारतमाला-2 का अहम प्रोजेक्ट जिससे पूर्वी भारत की अर्थव्यवस्था की तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी.
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