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किम जोंग का नया साइबर हथियार! नॉर्थ कोरिया ने बनाया ऐसा AI टूल, जो खुद करेगा हैकिंग का काम

अमेरिका और साउथ कोरिया का दावा है कि नॉर्थ कोरिया कई सालों से सरकार से जुड़े साइबर हैकिंग यूनिट्स का इस्तेमाल जासूसी, पैसों की चोरी और कमाई के लिए करता रहा है.

किम जोंग का नया साइबर हथियार! नॉर्थ कोरिया ने बनाया ऐसा AI टूल, जो खुद करेगा हैकिंग का काम
North Korea के हैकिंग ग्रूप ने हैकिंग के लिए बनाए एआई टूल्स (फोटो- एनडीटीवी)

नॉर्थ कोरिया के धुरंधर हैंकर्स आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI का अलग ही इस्तेमाल करने में लगे हैं. साउथ कोरिया की एक साइबर सुरक्षा कंपनी ने सोमवार, 10 अगस्त को कहा कि नॉर्थ कोरिया से जुड़े एक हैकिंग ग्रुप ने ऐसे AI टूल्स तैयार किए हैं, जो साइबर हमलों को अपने आप करने, चुराए गए डेटा का विश्लेषण (एनालिसिस) करने और लोगों के साथ फ्रॉड करने के लिए ज्यादा भरोसेमंद फिशिंग कैंपेन चलाने में मदद कर सकते हैं. यह रिपोर्ट न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने छापी है.

नॉर्थ कोरिया क्या कर रहा है?

साइबर सुरक्षा कंपनी जीनियंस ने बताया कि उसे सबूत मिले हैं कि नॉर्थ कोरिया से जुड़े किमसुकी नाम के हैकिंग ग्रुप ने AI मॉडल को अपने कंप्यूटर पर ही चलाने और मैनेज करने वाले कई टूल्स सेट किए थे. इनमें ओलामा, GPT4All और Msty शामिल हैं. इसके साथ ही ग्रुप ने रिट्रीवल ऑगमेंटेड जनरेशन (RAG) नाम की एक तकनीक भी इस्तेमाल की, जो डॉक्यूमेंट को खोजने और उनसे जानकारी निकालने में मदद करती है. कंपनी के मुताबिक, इन टूल्स की मदद से हैकर डॉक्यूमेंट को बाहर की AI सर्विसेज पर भेजे बिना ही प्रोसेस कर सकते हैं. यानी संवेदनशील और चोरी की गई जानकारी को किसी बाहरी AI कंपनी के पास भेजने की जरूरत नहीं पड़ेगी.

जीनियंस को ऐसे सिस्टम पर AI एजेंट बनाने वाले फ्रेमवर्क, आवाज को टेक्स्ट में बदलने वाला सॉफ्टवेयर और कर्सर भी मिला. कर्सर एक ऐसा टूल है, जो AI की मदद से कोड लिखने में सहायता करता है. कंपनी ने जिस कैंपेन की जांच की, उसे इन टूल्स से जोड़ा गया है. जीनियंस ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि इन सबूतों से पता चलता है कि किमसुकी अब सिर्फ फिशिंग के लिए नकली और फंसाने वाले मैसेज बनाने में AI का इस्तेमाल नहीं कर रहा है. यह ग्रुप मौजूदा AI मॉडल्स को मैलवेयर बनाने, चोरी किए गए डेटा की एनालिसिस करने और साइबर हमलों को अपने आप चलाने के लिए इस्तेमाल करने की क्षमता विकसित कर रहा है.

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नोट- फिशिंग कैंपेन एक सुनियोजित साइबर हमला है. इसमें फ्रॉड करने वाले धोखेबाज किसी भरोसेमंद कंपनी या बैंक का रूप लेकर आपको नकली ईमेल या मैसेज भेजते हैं. इनका असली मकसद आपके पासवर्ड, बैंक अकाउंट की जानकारी या पर्सनल डेटा को चुराना होता है.

जीनियंस ने यह भी बताया कि उसे फाइनेंस और क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े कुछ नकली डॉक्यूमेंट मिले, जो देखने में ऐसे लगते थे जैसे उन्हें AI की मदद से बनाया गया हो. कंपनी के अनुसार, इन डॉक्यूमेंट को असली निवेश रिपोर्ट और ऑफिस में इस्तेमाल होने वाले दूसरे डॉक्यूमेंट जैसा दिखाया गया था, ताकि वे भरोसेमंद लगें. हालांकि, जीनियंस के इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है.

नॉर्थ कोरिया का दागदार रिकॉर्ड

अमेरिका और साउथ कोरिया की सरकारों के साथ-साथ साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, नॉर्थ कोरिया कई सालों से सरकार से जुड़े साइबर हैकिंग यूनिट्स का इस्तेमाल जासूसी, पैसों की चोरी और कमाई के लिए करता रहा है. अमेरिका के वित्त विभाग (यूएस ट्रेजरी) ने 2023 में किमसुकी पर बैन लगाए थे. अमेरिका ने इसे नॉर्थ कोरिया की किं जोंग उन की सरकार के नियंत्रण वाला साइबर-जासूसी ग्रुप बताया था. अमेरिकी वित्त विभाग के मुताबिक, किमसुकी किम जोंग उन के रणनीतिक लक्ष्यों को पूरा करने में मदद करने के लिए खुफिया जानकारी जुटाता था.

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