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3 साल से फरार शिकारी बिल्ली का एनकाउंटर, हर बार फॉरेस्ट गार्ड्स को दे देती थी चकमा

न्यूजीलैंड में 3 साल से चकमा दे रही इस बिल्ली को 'नाइन लाइव्स' नाम दिया गया था क्योंकि लोग मानते थे कि यह हर बार मरकर जिंदा हो जा रही.

3 साल से फरार शिकारी बिल्ली का एनकाउंटर, हर बार फॉरेस्ट गार्ड्स को दे देती थी चकमा
न्यूजीलैंड में 3 साल की मशक्कत के बाद पकड़ी और मारी गई यह बिल्ली (फोटो- पेस्ट फ्री पुरेरुआ)

एक ऐसी खूंखार बिल्ली थी जिसकी तलाश 3 साल से पुलिस कर रही थी. इस बिल्ली का नाम था 'नाइन लाइव्स' क्योंकि लोग कहते थे कि उसके पास सचमुच नौ जिंदगियां हैं. तीन साल तक उसे पकड़ने की हर कोशिश नाकाम रही. उसके लिए कई बार जाल बिछाए गए, लेकिन वह हर बार चकमा देकर गायब हो जाती थी. वन्यजीव विशेषज्ञ भी उसकी चालाकी से हैरान थे. आखिरकार तीन साल बाद  'नाइन लाइव्स' की कहानी खत्म हो गई है. उसे मौत के घाट उतार दिया गया है. आखिर न्यूजीलैंड के एक इलाके में इस बिल्ली ने कैसे इतना आतंक मचा रखा था कि उसे पकड़ने की कोशिश 3 साल से चल रही थी. आखिर उसने कौन सा ऐसा गुनाह किया था कि उसे पकड़ते ही उसे मार दिया गया. चलिए जानते हैं.

शिकारी बिल्ली का गुनाह, अब गोली मारी गई

द गार्डियन की एक रिपोर्ट के अनुसार यह बिल्ली न्यूजीलैंड की एक खास तरह की दुर्लभ बत्तखों को खत्म करने की हद तक शिकार कर रही थी. माना जाता है कि नॉर्थ आइलैंड के ऊपरी हिस्से में प्यूरेरुआ प्रायद्वीप पर घूमने वाली इस बड़ी ग्रे टैबी बिल्ली ने न्यूजीलैंड की मुख्य भूमि पर पाई जाने वाली सबसे दुर्लभ बत्तख की दर्जनों (यानी उनकी कुल आबादी का 1%) और साथ ही कई कीवी चूजों, स्थानीय गेको और अन्य स्थानीय वन्यजीवों को मार डाला था.

इस रिपोर्ट के अनुसार संरक्षण प्रोजेक्ट 'पेस्ट फ्री प्यूरेरुआ' के प्रोजेक्ट मैनेजर एंडी मेंटर ने कहा कि हम इस सफलता को हल्के में नहीं ले रहे हैं क्योंकि इसने हमें लंबे समय तक उलझन में डाल रखा था. न्यूजीलैंड दुनिया के उन देशों में शामिल है, जहां सबसे ज्यादा लोग बिल्लियां पालते हैं. जंगली और पालतू बिल्लियों का वहां के वन्यजीवों पर क्या असर पड़ता है, इस बात को लेकर लंबे समय से तीखी बहस चल रही है. सोशल मीडिया पर कुछ लोग 'नाइन लाइव्स' के मारे जाने से दुखी हैं और उनका कहना है कि उसे जिंदा रहना चाहिए था. वहीं, कुछ लोग इसे बड़ी सफलता बता रहे हैं.

मौत के बाद भी 'नाइन लाइव्स' को लेकर बहस खत्म होने वाली नहीं है. उसकी बॉडी को सुरक्षित रखा जाएगा, ताकि लोगों को यह बताया जा सके कि जंगली बिल्लियों का स्थानीय जीवों पर कितना बड़ा असर पड़ सकता है. 'नाइन लाइव्स' पहली बार साल 2023 में नॉर्थलैंड के पुरेरुआ प्रायद्वीप में दिखाई दी थी. इसके बाद उसे पकड़ने की कोशिशों का एक लंबा और मुश्किल खेल शुरू हो गया. 

बत्तख लाई जाती, एक ही बिल्ली मार जाती

पुरेरुआ में वन्यजीव संरक्षण से जुड़े संगठन ने यह सोचकर 20 दुर्लभ पाटेके बत्तखों को छोड़ा था कि इलाके में जंगली बिल्लियों की समस्या पर काबू पा लिया गया है. लेकिन सिर्फ एक हफ्ते के भीतर पहली बत्तख मरी हुई मिली. कैमरों की मदद से एक खास निशानों वाली बिल्ली की पहचान हुई, जिसे बाद में 'नाइन लाइव्स' नाम दिया गया. इसके बाद उसने कई और बत्तखों को मार डाला. उसे पकड़ने के लिए अतिरिक्त जाल, उपकरण और नाइट कैमरे लगाए गए, लेकिन वह हर बार बच निकली. 2024 में जब 20 और बत्तखों को छोड़ा गया, तब भी वही बिल्ली फिर दिखाई दी और उनमें से 15 को मार डाला. अब उसे जाल में फंसाकर गोली मारी गई है.

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