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प्लेन वालों के महंगे गिफ्ट भी माफ, गरीब के 1KG चीनी पर भी टैक्स! भारत के समान पर कस्टम वसूली पर नेपाली जनता क्यों है नाराज?

Nepal New Custom Duty: नेपाल के आम नागरिकों के बीच सबसे ज्यादा नाराजगी इस बात को लेकर है कि नियम सबके लिए बराबर नहीं हैं. उनका कहना है कि जो लोग विदेश से हवाई यात्रा कर लौटते हैं, उन्हें महंगे गैजेट्स और उपहारों पर कानूनी छूट मिलती है और हमपर ये कानून थोंपा जाता है.

प्लेन वालों के महंगे गिफ्ट भी माफ, गरीब के 1KG चीनी पर भी टैक्स! भारत के समान पर कस्टम वसूली पर नेपाली जनता क्यों है नाराज?
नेपाल-भारत की खुली सीमा और वहां के सामाजिक-आर्थिक संबंधों को समझे बिना लिया गया यह फैसला अब बालेन सरकार के लिए गले की फांस बनता जा रहा है.

Nepal New Custom Duty: नेपाल सरकार की ओर से सीमा पर 100 नेपाली रुपये से अधिक के सामान पर सीमा शुल्क (कस्टम ड्यूटी) लगाने के फैसले ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है. इसे लेकर सीमावर्ती इलाकों में जबरदस्त गुस्सा है. लोग इस बात से हैरान और नाराज हैं कि हवाई जहाज से आने वाले रईसों को महंगे मोबाइल, सोना और शराब पर छूट मिल रही है, लेकिन जमीन के रास्ते पैदल आने वाले गरीब को 2 किलो चीनी पर भी टैक्स देना पड़ रहा है.

नेपाल-भारत की खुली सीमा और वहां के सामाजिक-आर्थिक संबंधों को समझे बिना लिया गया यह फैसला अब बालेन सरकार के लिए गले की फांस बनता जा रहा है. सरकार का तर्क है कि वह राजस्व बढ़ाने और 'अनौपचारिक अर्थव्यवस्था' को मुख्यधारा में लाना चाहती है, लेकिन हकीकत यह है कि इस नियम ने सीमा पर रहने वाले आम लोगों की कमर तोड़ दी है.

सरकारी आंकड़ों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं (IMF, वर्ल्ड बैंक) के मुताबिक नेपाल की करीब 37 प्रतिशत अर्थव्यवस्था गैर-पंजीकृत है. इसे टैक्स के दायरे में लाना जरूरी है, लेकिन सरकार ने अरबों की राजस्व चोरी रोकने के लिए आधुनिक तकनीक अपनाने के बजाय आम जनता के झोले और थैले चेक करना शुरू कर दिया है. इससे लोगों के लगता है कि नई सरकार आम लोगों पर नजर गड़ाए हैं लेकिन उन लोगों को बख्श रही है जो अमीर है और हवाई जहाज से सफर करते हैं.

अमीरों को छूट, गरीबों को लूट?

नेपाल के आम नागरिकों के बीच सबसे ज्यादा नाराजगी इस बात को लेकर है कि नियम सबके लिए बराबर नहीं हैं. नेपाली मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनका कहना है कि जो लोग विदेश से हवाई यात्रा कर लौटते हैं, उन्हें महंगे गैजेट्स और उपहारों पर कानूनी छूट मिलती है. वहीं दूसरी ओर, सीमावर्ती इलाकों का मजदूर या आम आदमी अगर भारत से अपने घर के लिए 100 नेपाली रुपया से ज्यादा का राशन लेकर आता है, तो उसे अपराधी की तरह देखा जाता है.

ऐसा लगता है कि बालेन सरकार ने इस बात पर कोई ध्यान नहीं दिया कि भारत और नेपाल की सरहद वाले इलाके में लोग शादी करते हैं. इसे 'बेटी-रोटी' संबंध कहा जाता है. यानी अब लोगों को अपनी ससुराल से मिलने वाले गिफ्ट या प्रवासी मजदूरों द्वारा अपने बच्चों के लिए लाए गए कपड़ों पर टैक्स देना होगा. इससे स्थानीय निवासियों में अंसतोष पनप रहा है.

सरकार का एक तर्क यह भी है कि सीमा पर सख्ती से नेपाल के घरेलू उत्पादों को बढ़ावा मिलेगा. लेकिन सच्चाई इससे कोसों दूर है. भारत ने अपने नागरिकों के लिए खाद्यान्न पर GST दरें बहुत कम रखी हैं, जिससे राशन सस्ता मिलता है. सीमावर्ती नेपाली नागरिकों के लिए भारतीय बाजार अपनी बचत करने और गुजारा करने का सबसे बड़ा सहारा हैं.

नेपाली मीडिया रिपोर्ट में यह भी कहा जा रहा है कि जब तक नेपाल सरकार अपने यहां उत्पादन लागत कम नहीं करती और आपूर्ति व्यवस्था दुरुस्त नहीं करती, तब तक सिर्फ सीमा शुल्क का डंडा चलाने से महंगाई ही बढ़ेगी. इससे सबसे ज्यादा चोट गरीब की रसोई पर पड़ रही है. सस्ते विकल्प के अभाव में सीमा पर की गई सख्ती केवल आम जनता की जेब ढीली कर रही है, जबकि बड़े पैमाने पर होने वाली तस्करी पर इसका कोई खास असर नहीं दिख रहा है.

रोटी-बेटी के रिश्ता पर गहरा असर

नेपाल और भारत का रिश्ता त्रेतायुग के राम-सीता के समय से चला आ रहा 'रोटी-बेटी' का रिश्ता है. सीमा के दोनों तरफ रहने वाले लोग एक ही परंपरा को मानने वाले लोग हैं. सीमा के पास हर रोज शादियां और रिश्तेदारियां होती हैं.

100 नेपाली रुपये जैसी मामूली रकम पर टैक्स की सख्ती ने इस ऐतिहासिक भरोसे और आपसी सद्भाव को चोट पहुंचाई है.जब बेटियां अपने मायके से उपहार लेकर लौटते वक्त सीमा पर अपराधियों जैसा बर्ताव झेलती हैं. अगर ये नया नियम जारी रहा तो भारत और नेपाल की रोटी बेटी संबंध पर भी गहरा असर पड़ेगा. 

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