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जिस नेपाल में 50 साल से गांजा पीना गैरकानूनी, वहां अब गांजे की खेती को मिली कानूनी मंजूरी

नेपाल के गंडकी प्रांत ने दवा और औद्योगिक इस्तेमाल के लिए गांजे की खेती को कानूनी मंजूरी दे दी है. वैसे नेपाल में 1976 से गांजे का व्यक्तिगत इस्तेमाल और उसकी बिक्री गैरकानूनी है.

जिस नेपाल में 50 साल से गांजा पीना गैरकानूनी, वहां अब गांजे की खेती को मिली कानूनी मंजूरी
नेपाल के गंडकी प्रांत में गांजे की खेती को कानूनी मंजूरी (फोटो- NDTV)
  • नेपाल के गंडकी प्रांत ने दवा और औद्योगिक इस्तेमाल के लिए गांजे की खेती को कानूनी मंजूरी दे दी
  • नेपाल में 1976 से गांजे का व्यक्तिगत इस्तेमाल और उसकी बिक्री गैरकानूनी है
  • गंडकी का मौसम और जमीन गांजे की खेती के लिए अनुकूल है और यहां पहले से भी कई तरीकों से इसकी खेती होती रही है

जिस नेपाल में गांजा रखना, बेचना और पीना 50 सालों से गैरकानूनी है, वहीं अब एक प्रांत ने बड़ा फैसला लिया है. नेपाल के गंडकी प्रांत ने दवा और औद्योगिक इस्तेमाल के लिए गांजे की खेती को कानूनी मंजूरी दे दी है. हालांकि यह खेती सख्त सरकारी नियमों और निगरानी में ही होगी. यानी अब इस प्रांत में तय नियमों के तहत गांजे की खेती और उसका व्यावसायिक उत्पादन किया जा सकेगा. यह रिपोर्ट न्यूज एजेंसी पीटीआई ने छापी है.

गंडकी में क्या फैसला लिया गया

"दवा और औद्योगिक इस्तेमाल के लिए गांजा खेती के रेगुलेशन और मैनेजमेंट से जुड़ा विधेयक" गंडकी प्रांत की उद्योग और पर्यटन मंत्री यशोदा रिमाल ने विधानसभा में पेश किया था. गंडकी प्रांत विधानसभा के अध्यक्ष कृष्ण प्रसाद धिताल ने घोषणा की कि सभी संशोधन सर्वसम्मति से मंजूर कर लिए गए हैं. इस नए कानून के बाद गंडकी प्रांत में दवाइयों और औद्योगिक सामान बनाने के लिए गांजे की खेती की अनुमति होगी. लेकिन खेती सिर्फ उन्हीं इलाकों में की जा सकेगी, जिन्हें प्रांतीय सरकार तय करेगी. इसके लिए पहले से सरकारी मंजूरी लेना जरूरी होगा और पूरी खेती पर सरकार की सख्त निगरानी रहेगी.

मंत्री यशोदा रिमाल ने विधानसभा में कहा कि गंडकी प्रांत की भौगोलिक स्थिति और मौसम गांजे की खेती के लिए बहुत अच्छे हैं.

उन्होंने कहा कि गंडकी प्रांत का मौसम और जमीन गांजे की खेती के लिए अनुकूल है और यहां पहले से भी कई तरीकों से इसकी खेती होती रही है. यह फसल जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौती का भी अच्छी तरह सामना कर सकती है. इसकी खेती में बहुत कम पानी लगता है, इसलिए यह इस प्रांत के लिए ज्यादा उपयुक्त है. इसमें मेहनत भी कम लगती है, लेकिन पैदावार ज्यादा होती है. जो जमीनें अभी खाली पड़ी हैं, वहां भी इसकी खेती की जा सकती है. बंदर इस फसल को नुकसान नहीं पहुंचाते, इसलिए यह सुरक्षित फसल मानी जाती है. इसमें कीटनाशकों की जरूरत भी नहीं पड़ती और इसकी जैविक खेती की जा सकती है. उन्होंने कहा कि यह फसल प्रांत के सभी 11 जिलों के लिए उपयुक्त है.

नियम जान लीजिए

नए कानून के अनुसार, उगाए जाने वाले गांजे में THC (टेट्राहाइड्रोकैनाबिनॉल) की मात्रा 3 प्रतिशत से कम होनी चाहिए. खेती सिर्फ सरकार द्वारा तय किए गए इलाकों में और उसकी सीधी निगरानी में ही होगी.

जो लोग या संस्थाएं गांजे की खेती करना चाहेंगी, उन्हें पहले सरकार से अनुमति लेनी होगी. कानून में यह भी कहा गया है कि गांजे से बने हर उत्पाद की बिक्री या इस्तेमाल से पहले उसकी रासायनिक जांच होगी. इसके लिए प्रांतीय सरकार अपने लैब बना सकती है या किसी दूसरी संस्था की मदद ले सकती है. मंत्री ने बताया कि इस कानून में गांजे के गलत इस्तेमाल को रोकने, इलाज और नशा छोड़ने की सुविधा से जुड़े प्रावधान भी शामिल किए गए हैं.

नेपाल में बैन है गांजा

नेपाल में 1976 से गांजे का व्यक्तिगत इस्तेमाल और उसकी बिक्री गैरकानूनी है. मौजूदा कानून के तहत गांजे से जुड़े मामलों में उसकी मात्रा के हिसाब से एक महीने से लेकर 10 साल तक की जेल हो सकती है. हालांकि नेपाल का गृह मंत्रालय कुछ खास परिस्थितियों में सीमित इस्तेमाल की व्यवस्था बनाने पर काम कर रहा है, लेकिन अभी तक इसके लिए कोई आधिकारिक नियम लागू नहीं किए गए हैं.

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