नेपाल में बड़े बदलाव का वादा करके सत्ता में आए पीएम बालेन्द्र शाह ने सिर्फ 100 दिनों में ही सरकार के काम करने का तरीका पूरी तरह बदल दिया है. रैपर से पीएम बने 'बालेन शाह' ने रविवार को अपने कार्यकाल के 100 दिन पूरे किए. जेन-जेड की हिंसक आंदोलन के बाद बालेन की सरकार बनी है और उससे नेपाल के युवाओं को बड़ी उम्मीदें हैं. अपने ताबड़तोड़ फैसलों के लिए जाने जाने वाले बालेन सरकार पर कई सवाल भी उठ रहे हैं. चलिए जानते हैं कि सत्ता संभालने के बाद से उन्होंने कौन से फैसले लिए हैं और उनपर क्या सवाल उठे हैं.
बालेन का रिपोर्ट कार्ड
बालेन के पीएम पद की शपथ लेने के सिर्फ एक दिन बाद ही पुलिस ने पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और उनके पूर्व गृह मंत्री को गिरफ्तार कर लिया था. विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार का यही पहला कदम आगे की पूरी कार्यशैली की पहचान बन गया. फैसले तेजी से लिए गए, उनमें बड़े राजनीतिक संदेश भी थे, लेकिन कई फैसलों को कानूनी चुनौती मिली और अक्सर संस्थागत प्रक्रियाओं का पूरा इंतजार नहीं किया गया.
बालेन शाह ने खुद को लोगों की नजरों से काफी दूर रखा है. वह ज्यादातर सोशल मीडिया के जरिए ही बात करते हैं. यहां तक कि उन्होंने अपनी जीत का भाषण भी रैप गाने के रूप में दिया था. उन्होंने विदेशी राजदूतों से मुलाकात करने से भी परहेज किया है. भारत और चीन जैसे पड़ोसी देशों की यात्रा खुद करने के बजाए, उन्होंने अपने विदेश मंत्री को भेजा. आमतौर पर किसी नेपाली प्रधानमंत्री की यह पहली विदेश यात्राएं होती हैं.
नेपाल में तेजी से बदलाव की राह
बहुत कम लोगों ने अनुमान लगाया था कि 5 मार्च के आम चुनाव में बलेन्द्र शाह इतनी बड़ी जीत हासिल करेंगे. यह चुनाव उस जेन-जेड आंदोलन के बाद हुआ था, जिसने भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए केपी शर्मा ओली की सरकार को गिरा दिया था. बालेन सरकार ने आते ही 100 सूत्रीय सुधार कार्यक्रम शुरू किया, जिसमें बेहतर शासन, भ्रष्टाचार पर रोक, सरकारी सेवाओं में सुधार और डिजिटल व्यवस्था जैसे मुद्दे शामिल हैं. सरकार के अनुसार, इनमें से करीब 70 सुधार लागू किए जा चुके हैं, जबकि बाकी पर काम चल रहा है.
जून में देश की सत्ताधारी पार्टी- RSP की बैठक में दिए गए अपने एक दुर्लभ सार्वजनिक भाषण में बालेन शाह ने कहा कि उनकी सरकार बदलाव की दिशा में एक्सप्रेसवे पर दौड़ रही है. उन्होंने कहा कि ब्रेक तभी लगाए जाएंगे, जब हम अपनी मंजिल तक पहुंच जाएंगे.
लेकिन सवाल भी उठे
यह सही है कि बालेन शाह की तेज काम करने के स्टाइल के कई फैन्स हैं लेकिन लेकिन उनके आलोचक भी कम नहीं हैं. केपी शर्मा ओली की पार्टी सीपीएन-यूएमएल ने शुक्रवार को बयान जारी कर कहा कि सरकार का काम बहुत कमजोर, अपरिपक्व और विवादों से भरा हुआ रहा है.
बालेन शाह सरकार ने कई सुधारों को जल्दी लागू करने के लिए अध्यादेशों का सहारा लिया, जबकि संसद में उसके पास कानून पास कराने के लिए पर्याप्त बहुमत मौजूद है. कुछ लोगों को चिंता है कि इससे लोकतांत्रिक संतुलन और संस्थाओं की निगरानी की व्यवस्था कमजोर हो सकती है. एएफपी की इस रिपोर्ट के अनुसार राजनीतिक शोधकर्ता अनुषा खनाल ने कहा, "काम तो हुआ है, लेकिन उसे करने का तरीका अलग नजर आता है. हमें सतर्क रहना होगा."
एक अध्यादेश के तहत संवैधानिक परिषद अब साधारण बहुमत से फैसले ले सकती है. इसमें न्यायपालिका में नियुक्तियां जैसे अहम फैसले भी शामिल हैं. इस परिषद की अध्यक्षता बलेन्द्र शाह करते हैं और वह अपने हिसाब से न्यायपालिका में नियुक्तियां कर रहे हैं. इसके अलावा संविधान में संशोधन और नेपाल की संघीय व्यवस्था में बदलाव को लेकर चल रही चर्चाओं ने भी राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है.
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