- हवाई तस्वीरों में दो अस्थायी झीलें दिखीं, जिससे खतरे की आशंका जताई जा रही है.
- आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष ने बताया कि अस्थायी झील ओवरफ्लो के बाद खतरा बढ़ सकता है.
- नेपाल तबाही के बीच बैंक लॉकर बहकर त्रिशूली नदी किनारे पहुंचे, लोग लूटने लगे पैसे.
पिछले दिनों नेपाल में आई तबाही ने सैकड़ों जिंदगियां खत्म कर दी. हजारों लोग अभी भी लापता हैं. लेकिन इस आपदा की शुरुआत कैसे हुई? पहले ग्लेशियार टूटा, पानी बढ़ा और फिर तबाही आ गई. ग्लेशियर का टूट कर गिरने वाला हिस्सा 800 मीटर से ज्यादा था. इसकी एक्सक्लूसिव तस्वीर सामने आई है. ग्लेशियर टूटने के बाद नेपाल में सैलाब और बाढ़ आई, फिर चारों तरफ तबाही मच गई. नेपाल में तबाही की दो झीलों से खतरा भी बरकरार है. इस तरह की दो झीलें हैं, जिसमें पानी ठहरा हुआ है. हवाई तस्वीरों से एक दूसरी झील भी दिखाई देने लगी, इससे इलाके में फिर बाढ़ आने का खतरा बना हुआ है.

ग्लेशियर टूटने का वीडियो सामने आया.
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चीन ने झील से जुड़े खतरे की जानकारी नेपाल से साझा की है. यह झील नेपाल और तिब्बत में आई भीषण बाढ़ के बाद बन गई है. ग्लेशियर टूटने के बाद भारी मात्रा में मलबा नीचे आ गया है और मलबे की वजह से नदी का रास्ता बंद हो गया और उस जगह पर एक प्राकृतिक बांध बन गया है.

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क्या कहते हैं जानकार?
आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष विनेद शर्मा ने एनडीटीवी से बातचीत में कहा, "ग्लेशियर लेक आउटबर्स्ट अभी नेपाल में हुआ. उसके बाद भी जो एक झील जो कि पहले नहीं थी एक अस्थाई झील है. वो ओवरफ्लो करती है या उसका ब्लॉकेज वहां से हट जाता है, तो सारा पानी नदियों में आएगा और वो रेस्क्यू ऑपरेशन को प्रभावित करेगा.
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बाढ़ में बह गया बैंक का लॉकर
आपदा के बीच भी बहुत से लूट देखने लगे. कोई सोना लूट रहा है, कोई पैसा लूट रहा है. इसी तरह एक बैंक तबाह हो गया और बैंक का लॉकर बहकर बाढ़ के बीच पहुंच गया. लोगों दो लॉकर मिले. इन दोनों लॉकर से नोटो की गड्डियां और सोना निकला. ये लॉकर रसुआ में बाढ़ के सैलाब में बहकर आए थे. बैंक लॉकर त्रिशूली नदी के किनारे पहुंचा. इसके बाद बैंक लॉकर में कैश की लूट मच गई. बैंक लॉकर में 92 लाख से ज्यादा नेपाली रुपए थे. पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही है. पुलिस ने वायरल वीडियो के आधार पर कार्रवाई की है. पुलिस पता लगा रही है कि लॉकर तोड़ने और पैसे चोरी करने के मामले में कौन लोग शामिल थे.

आपदा के बीच फंसे लोगों पर क्या बोले सदगुरु?
आपदा आने से पहले सदगुरु से जुड़े हुए बहुत से लोग नेपाल गए थे. कैलाश मान सरोवर यात्रा के लिए उनका भी कोई अता पता नहीं है. सदगुरु ने खुद इसके बारे में जानकारी दी थी. वे बोलते हुए भावुक हो गए.
आध्यात्मिक गुरू सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने कहा, "गहरे दुख और पीड़ा के साथ मैं ध्यान दिलाना चाहता हूं कि तिब्बत और नेपाल की सीमा के बीच एक भयंकर फ्लैश फ्लड आई है. मैं खुद वहां जाने के लिए निकला था लेकिन सभी फोन बंद हैं. दूर संचार सेवाएं ठप हैं और सड़कें अवरुद्ध हैं."

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300 से ज्यादा भारतीय लापता...
नेपाल में तबाही के बीच 320 भारतीय अभी भी लापता हैं. करीब चार सौ भारतीय अभी तिब्बत में फंसे हुए हैं. आध्यात्मिक गुरु सदगुरु के ईशा फाउंडेशन के 77 सदस्य लापता हैं. नेपाल में तबाही के बाद उन्होंने अपने सदस्यों के लापता होने की बात कही. खुद को बचाव अभियान में शामिल होने के लिए तैयार बताया.

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तबाही में रसुआ का हाइड्रो प्रोजेक्ट भी प्रभावित हुआ है. यहां कई भारतीय कर्मचारी बाढ़ की चपेट में आ गए. इन भारतीयों से संपर्क नहीं हो पा रहा है. ये लोग अभी तक जिंदा हैं या नहीं इसके बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पा रही है.
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