- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे में होर्मुज खोलने का अल्टीमेटम दिया है
- ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह अमेरिकी दबाव में नहीं आएगा और समुद्री मार्ग को बंद कर सकता है
- ईरान अपने सहयोगी हिज्बुल्लाह और हूतियों के जरिए इजरायल व अमेरिकी ठिकानों पर हमले बढ़ा सकता है
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले ही संकेत दिया है कि अगर ईरान ने उनके 48 घंटे में होर्मुज खोलने के अल्टीमेटम को नहीं माना तो अमेरिका ईरान के ऊर्जा ढांचे (Energy Infrastructure) और पावर ग्रिड्स को निशाना बना सकता है. उनका मकसद ईरान की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ना है, न कि पूर्ण युद्ध शुरू करना. ईरान ने साफ कर दिया है कि वह पीछे नहीं हटेगा. अगर अमेरिका हमला करता है, तो ईरान इस समुद्री रास्ते को पूरी तरह ब्लॉक कर सकता है, जिससे दुनिया की बची हुई तेल सप्लाई भी रुक जाएगी और वैश्विक मंदी का खतरा पैदा हो जाएगा.
क्या करेगा ईरान?
अमेरिका के हमले की स्थिति में ईरान अपने सहयोगियों (हिजबुल्लाह, हूतियों) के जरिए इजरायल और क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों पर हमले तेज कर सकता है. इससे यह संकट केवल दो देशों तक सीमित नहीं रहेगा. ट्रंप के इस सख्त रुख के खिलाफ ईरान को चीन और रूस का कूटनीतिक और संभवतः सैन्य सहयोग मिल सकता है, जिससे यह एक बड़े वैश्विक ध्रुवीकरण (Global Polarization) का रूप ले लेगा.
रूस-चीन युद्ध में उतरेंगे?
अगर ऐसा हुआ तो अमेरिका के लिए मुश्किल और बढ़ जाएगी, क्योंकि नाटो देशों सहित अमेरिका के सहयोगियों ने इस युद्ध में शामिल होने से अभी तक अपनी अनिच्छा ही जाहिर की है. चीन और रूस भी सीधे तौर पर तो अमेरिका से युद्ध में शामिल नहीं होंगे, लेकिन उम्मीद है कि वो ईरान को अपना सहयोग बढ़ा देंगे. इतने से ही ईरान अमेरिका को कई महीनों या कहें कि सालों तक युद्ध में उलझाए रह सकता है.
युद्ध लंबा खिंचा तो क्या होगा?
ऐसे में ईरान को तो जाहिर तौर पर काफी नुकसान होगा, लेकिन अमेरिका की ताकत भी बहुत हद तक कमजोर हो जाएगी. रूस और चीन पहले से ही अमेरिका को टक्कर दे रहे हैं. यूरोप भी उससे अलग हो चुका है. अगर युद्ध लंबा खिंचा तो ईरान को अन्य देशों का सहयोग भी बढ़ सकता है. इससे अमेरिका की सुपरपावर वाली इमेज एक तरह से धाराशायी हो सकती है. वहीं ईरान अपने तेल के कारण अपनी स्थिति को धीरे-धीरे सकता है.
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