- अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने ईशा मसीह की कहानी सुनाते हुए युद्ध के बीच धार्मिक संदर्भ प्रस्तुत किए
- पोप लियो XIV ने ईस्टर के दिन हथियारों को त्यागने और संवाद से विवाद सुलझाने की विश्वव्यापी अपील की है
- अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को धमकी देते हुए अल्हम्दुलिल्लाह शब्द का प्रयोग किया, जो विवादास्पद माना गया
ईरान से जंग के बीच आज अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो ईशा मसीह की कहानी सुनाते नजर आए. वो बताने लगे कि जब पाप बढ़ गया तो ईश्वर खुद इंसान के रूप में यीशु बनकर आए और फिर उन्हें जान भी देनी पड़ी, मगर वो फिर जिंदा हो गए. ईशा मसीह की ये कहानी तो दुनिया को राह दिखाती है, मगर इससे बड़ी विडंबना और क्या हो सकती है कि कहानी सुनाने वाला ही खुद युद्ध का फैसला लेने वालों में शामिल हो. और उससे भी बढ़कर ये कि ईशा मसीह के बनाए धर्म के अभी सबसे बड़े गुरु पोप लियो की जंग रोकने की अपील को भी अनसुना कर रहा हो.
पोप लियो की अपील
आज ही पोप लियो XIV ने पोप के रूप में अपना पहले ईस्टर पर हथियारों को त्यागने और संवाद के माध्यम से विवादों को सुलझाने की अपील की. पोप ने अपने संदेश में कहा, “आइए हम अपने हृदय को उनके असीम प्रेम से रूपांतरित होने दें! जिनके पास हथियार हैं, वे उन्हें त्याग दें! जिनके पास युद्ध छेड़ने की शक्ति है, वे शांति का मार्ग चुनें! बलपूर्वक थोपी गई शांति नहीं, बल्कि संवाद के माध्यम से! दूसरों पर प्रभुत्व स्थापित करने की इच्छा से नहीं, बल्कि उनसे संवाद स्थापित करने की इच्छा से!”

क्या ये अपील मार्को रूबियो ने नहीं सुनी? क्या वो अमेरिका को युद्ध से निकलने के लिए प्रेरित करेंगे? शायद नहीं... क्योंकि आज ही रूबियो के बॉस और अमेरिका के राष्ट्रपति ने ईरान को धमकाते हुए अंग्रेजी में 'अल्हम्दुलिल्लाह' का उपयोग किया. अल्हम्दुलिल्लाह का मतलब होता है अल्लाह का शुक्रिया. ट्रंप ने भले ही ये तंज में लिखा हो, लेकिन इसके मायने उतने ही गहरे हैं, जितने उनके विदेश मंत्री मार्को रूबियो के शेयर किए गए वीडियो के. कारण ट्रंप के 'अल्हम्दुलिल्लाह' वाले ट्वीट के कुछ देर बाद ही मार्को रूबियो ने ईशा मसीह की कहानी वाला वीडियो शेयर किया.
क्या ध्यान भटकाने की कोशिश
तो क्या मार्को रूबियो ईरान युद्ध को अपने बॉस ट्रंप की तरह धर्म की जंग में बदलना चाहते हैं? क्या वे कहना कहना चाहते हैं कि ईशा मसीह फिर से जिंदा होने के बाद इस तरह से पाप को खत्म करेंगे? ऐसा तो सोचना भी पाप होगा, मगर ऐसा हो रहा है. रूस-यूक्रेन से लेकर ईरान-गाजा-लेबनान-इजरायल में हर दिन कई जानें जा रही हैं. लोग भूखमरी के करीब पहुंच रहे हैं. मगर हर ताकतवर अपने से कमजोर को मार रहा है. आखिर इसका धर्म से क्या लेना-देना है? क्या ये वोट बैंक की राजनीति है? क्योंकि अमेरिका में ही इस युद्ध के खिलाफ लोग प्रदर्शन कर रहे हैं और अमेरिका को भी इस युद्ध में काफी नुकसान हुआ है. तो क्या ध्यान भटकाने के लिए धर्म का सहारा लिया जा रहा है.
He is Risen. pic.twitter.com/Dcop5hOFk1
— Secretary Marco Rubio (@SecRubio) April 5, 2026
ऐसा नहीं है कि धर्म को लेकर ट्रंप प्रशासन ने आज पहली बार कोई कमेंट किया है. ईरान युद्ध शुरू होने के बाद अभी मार्च में ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने देशभर से आए पादरियों के एक समूह को व्हाइट हाउस बुलाया. ओवल ऑफिस में हुई इस प्रार्थना सभा में पादरी ट्रंप के चारों ओर खड़े होकर उनके लिए प्रार्थना करते दिखे. कई पादरियों ने ट्रंप के कंधों और हाथों पर हाथ रखकर उनके लिए ईश्वर से मार्गदर्शन और समझदारी की दुआ मांगी. इस दौरान लीड पादरी टॉम मुलिंस कहते नजर आ रहे हैं कि, 'हम प्रार्थना करते हैं कि ऊपर से मिलने वाली समझदारी उनके दिल और दिमाग में आए. इन मुश्किल हालात में आप उन्हें रास्ता दिखाएं. हम उन पर आपकी कृपा और सुरक्षा की दुआ करते हैं.'
ट्रंप ने ऑफिस बुलाए पादरी
Happening Now in the Oval Office at the @WhiteHouse.
— Dan Scavino (@Scavino47) March 5, 2026
God Bless the USA!
🙏❤️🇺🇸🦅 pic.twitter.com/Ebi7DnAnhK
क्या लीड पादरी टॉम मुलिंस की बात को ट्रंप और रूबियो ने समझा. उन्होंने ईश्वर से मार्गदर्शन और समझदारी की दुआ मांगी. उन्होंने ये नहीं मांगा कि अमेरिका दूसरे देशों पर हमले कर लोगों की जान ले. वो ये मांगेंगे भी नहीं. ट्रंप की पूजा का ये वीडियो व्हाइट हाउस में ट्रंप के सहायक और व्हाइट हाउस में डिप्टी चीफ और स्टाफ डेन स्केविनो ने सोशल मीडिया पर शेयर कर लिखा- God Bless The America. अमेरिका सुरक्षित रहे, इस पर तो किसी को ऐतराज नहीं, लेकिन क्या किसी और देश में कत्लेआम मचाना यीशु मसीह के संदेश को समझना कहा जाएगा. ये तो उनके विचारों को त्यागने वाली बात है. उम्मीद है यीशु मसीह शायद किसी तरह ट्रंप और रूबियो को ये बात समझा पाएं.
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