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जिस तिब्बत-नेपाल सीमा से आया 'जलसैलाब', वहां सबसे पहले पहुंचा NDTV, पढ़ें- ग्राउंड जीरो से ये रिपोर्ट

स्थानीय निवासियों को यहां आने की इजाजत बिल्कुल नहीं दी जा रही है. नेपाल पुलिस लगातार ये अपील कर रही है. सभी लोगों से ऊपरी इलाकों में रहने को कहा है.

नेपाल-तिब्बत सीमा पर पहुंचकर एनडीटीवी ने वहां की स्थिति का जायजा लिया.
  • बारिश और बाढ़ के कारण इलाके का संपर्क कई दिनों तक कट गया था, जिससे जरूरी वस्तुएं नहीं पहुंच पाईं थीं
  • तिब्बत से भोटकोशी नदी के प्रवाह ने नेपाल में व्यापक तबाही मचाई और स्थानीय बस्तियों को पूरी तरह नष्ट कर दिया है
  • हेलीकॉप्टर के माध्यम से राहत कार्य जारी है और फंसे हुए लोगों को सुरक्षित काठमांडू तक पहुंचाया जा रहा है

एनडीटीवी की नेपाल पर ग्राउंड कवरेज लगातार पिछले 5 दिनों से जारी है. इस वक्त एनडीटीवी की टीम रसुवा जिले के एक इलाके में मौजूद है, जो सरहद से बेहद करीब है. ये इलाका नेपाल-तिब्बत बॉर्डर के ठीक करीब है. यहीं स्याप्रू और तिमूर बाजार है. एनडीटीवी पहला मीडिया क्रू है, जो इस इलाके में आया है. यहां लगातार बारिश हो रही है. इस इलाके में बाढ़ के अलर्ट के बीच में लोगों की दिक्कत खत्म नहीं हो रही. पिछले कई दिनों से ये पूरा इलाका कटा हुआ था. इसलिए जो जरूरी चीजें है, वो कई दिनों से नहीं पहुंच पाईं थीं. अब एक कच्चा रास्ता खुला है तो धीरे-धीरे ये सभी चीजें यहां पहुंच रही हैं.

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तिब्बत से इसी इलाके से होते हुए बाढ़ के पानी ने आगे नेपाल के अंदर दाखिल होकर पूरा तांडव मचाया था. इस वक्त हेलीकॉप्टर के जरिए लगातार इस इलाके में राहत और बचाव का काम भी चल रहा है. अगर कोई फंसा हुआ दिखता है तो उन्हें तुरंत काठमांडू पहुंचाया जा रहा है. तिमूर बाजार में ही कस्टम्स का ऑफिस हुआ करता था. यहां से आगे तिब्बत शुरू हो जाता है. बाढ़ ने यहां सब बर्बाद कर दिया है. स्थानीय लोगों ने सैलाब वाले दिन बहुत कुछ यहां पर बर्बाद होते देखा. यहीं तिब्बत की तरफ से आ रही भोटकोशी नदी है. इस नदी के बहाव का शोर इतना तेज है कि किसी की बात यहां खड़े होकर सुन पाना असंभव है. नदी का बहाव इतना तेज है कि पास खड़े होने में भी किसी को डर लगेगा.

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इसीलिए स्थानीय निवासियों को यहां आने की इजाजत बिल्कुल नहीं दी जा रही है. नेपाल पुलिस लगातार ये अपील कर रही है. सभी लोगों से ऊपरी इलाकों में रहने को कहा है. नदी के आसपास अभी देखकर अंदाजा लगाना भी मुश्किल है कि इस नदी के आसपास घर हुआ करते थे. लोग यहां रहते थे. अब ये नदी इतनी चौड़ी हो चुकी है कि सड़कें कहीं दिख नहीं रही हैं. हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट भी यहां पर थे. रसुवा एक बहुत ही अंदरूनी इलाका है. रसुवा के बाद नुवाकोट आता है, जहां भोटकोशी नदी त्रिशुली नदी में बदल जाती है. प्रकृति के आगे सब कुछ बौना हो गया है. कई लोग हैं, जिन्होंने उस सैलाब को अपनी आंखों से देखा और किसी तरह बच गए. लेकिन उनके अपने इस बाढ़ में उनकी आंखों के सामने बहते चले गए. वो दर्द उनकी आंखों में साफ दिख रहा है. 

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