नेपाल में जल प्रलय से हुई तबाही के बाद अब इस मुल्क को दोबारा खड़े होने के लिए बड़े पैमाने पर आर्थिक सहायता की जरूरत है. इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान पहुंचा है. कहीं घर तबाह हो चुके हैं, तो कहीं सड़कें और पुल बह गए हैं. अब नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वाग्ले ने मीडिया से बात करते हुए कहा है कि नेपाल को अगर दोबारा टिकाऊ इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करना है तो उसे कम से कम 6 अरब डॉलर तक की मदद चाहिए.
6 अरब डॉलर भारतीय रुपये में करीब 50 हजार करोड़ रुपये के आसपास बैठते हैं. नेपाल के वित्त मंत्री के मुताबिक, इस राशि की जरूरत इसलिए है, ताकि ऐसी इमारतों और इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण किया जा सके जो भविष्य में आने वाली आपदाओं के लिए ज्यादा बेहतर तरीके से तैयार रहें.
जानकारी के लिए बता दें कि नेपाल में आई इस जल प्रलय में अब तक 1200 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि हजारों लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं. बाढ़ के बाद हुए नुकसान को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक आंकड़ा जारी नहीं किया गया है और इसका आकलन किया जा रहा है.
बीबीसी से बात करते हुए राष्ट्रीय योजना आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. गुनाकर भट्टा ने जानकारी दी है कि डेढ़ महीने के भीतर व्यापक तौर पर नुकसान का आकलन किया जाएगा. इसके लिए उपलब्ध संसाधनों और अन्य माध्यमों का इस्तेमाल किया जाएगा.
वैसे बताया जा रहा है कि नेपाल त्रासदी के बाद सबसे पहले मदद का हाथ भारत की तरफ से बढ़ाया गया. भारत ने एक अरब डॉलर की सहायता देने का वादा किया है. इसके अलावा चीन, एशियन डेवलपमेंट बैंक, विश्व बैंक, जापान और अमेरिका ने भी अपनी तरफ से सहायता का आश्वासन दिया है.
बताया जा रहा है कि बाढ़ की वजह से अकेले हाइड्रोइलेक्ट्रिक सेक्टर को ही 100 अरब नेपाली रुपये से ज्यादा का नुकसान हो चुका है. इसके अलावा करीब 74,500 घर तबाह हुए हैं. 40 किलोमीटर से ज्यादा लंबी सड़कें और 30 से ज्यादा पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं.
अभी के लिए भारत की तरफ से अलग-अलग चरणों में राहत सामग्री भेजी गई है. इसके अलावा चीन ने भी 30 करोड़ नेपाली रुपये की लागत की राहत सामग्री दी है. श्रीलंका, बांग्लादेश और अमेरिका जैसे देशों ने भी मदद का हाथ बढ़ाया है.
ऑस्ट्रेलिया की तरफ से 10 लाख डॉलर की नकद सहायता देने का ऐलान किया गया है. इसके अलावा संयुक्त अरब अमीरात ने राहत सामग्री भेजी है और 10 मिलियन डॉलर तक की सहायता देने का आश्वासन दिया है. कतर की तरफ से भी राहत सामग्री भेजी गई है. ब्रिटेन ने 50 लाख पाउंड की मदद की घोषणा की है, जबकि यूरोपीय संघ पहले ही 20 लाख यूरो देने का वादा कर चुका है.
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