- भारतीय विदेश मंत्री डॉ. जयशंकर और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास आराघची के बीच उच्च‑स्तरीय कूटनीतिक बातचीत सफल रही.
- ईरान ने भारत‑झंडाधारी टैंकरों को स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से सुरक्षित गुजरने की अनुमति प्रदान की है.
- दो भारतीय टैंकर ‘Pushpak’ और ‘Parimal’ को कूटनीतिक सहमति के बाद सुरक्षित मार्ग में गुजरते देखा गया.
ईरान ने उन रिपोर्ट को खारिज कर दिया है जिसमें दावा किया जा रहा था कि तेहरान ने भारतीय जहाजों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने की इजाजत दे दी है. रिपोर्ट में दावा किया गया था कि विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास आरागाची से बातचीत की थी और इसके बाद तेहरान ने भारतीय जहाजों को गुजरने देने की इजाजत दी थी. जब एनडीटीवी ने तेहरान में सूत्रों से बात की तो उन्होंने कहा कि ये सही नहीं है.
इससे पहले न्यूज एजेंसी IANS की रिपोर्ट में दावा किया गया था कब से कम दो भारतीय जहाजों को 'पुष्पक' और 'परिमल' को होर्मुज से सुरक्षित रूप से गुजरने दिया गया था.
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यह राहत ऐसे समय में आई है जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास हमलों की घटनाएं तेज हुई हैं. कई विदेशी जहाजों पर मिसाइल और ड्रोन हमले हो चुके हैं और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ा है.
ईरान की भू‑रणनीति, होर्मुज को हथियार की तरह इस्तेमाल
ईरान ने सीधे कहा है कि वह अमेरिका और उसके सहयोगियों के हित वाले तेल को होर्मुज से गुजरने नहीं देगा. ईरान ने कहा, 'हम एक भी लीटर तेल को अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए गुजरने नहीं देंगे.' यह बयान खुद साबित करता है कि ईरान इस जलडमरूमध्य को रणनीतिक हथियार की तरह उपयोग कर रहा है. दूसरे शब्दों में, होर्मुज को नियंत्रित कर ईरान दुनिया की ऊर्जा व्यवस्था को झकझोरने की क्षमता रखता है.
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कूटनीति की मदद से भारत को मिली राहत
युद्ध और नाकेबंदी के बीच, भारत ने ईरान के साथ उच्च‑स्तरीय वार्ता की और भारत‑झंडाधारी जहाजों को सुरक्षित मार्ग मिल गया. इससे यह साफ है कि युद्ध के बीच भी कूटनीति की भूमिका अहम है.
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