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कौन हैं कृष्णा नंदी? बांग्लादेश की कट्टरपंथी इस्लामिक पार्टी के इकलौते हिंदू कैंडिडेट, 80 अल्पसंख्यकों को टिकट

बांग्लादेश के 12 फरवरी के चुनाव में अल्पसंख्यक समुदायों के 80 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनमें 12 स्वतंत्र और 10 महिलाएं शामिल हैं. आवामी लीग के बाहर होने से BNP-Jamaat की भूमिका बढ़ी है. जमात ने पहली बार हिंदू उम्मीदवार कृष्ण नंदी को उतारा, जबकि गोबिंद प्रमाणिक स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ रहे हैं.

कौन हैं कृष्णा नंदी? बांग्लादेश की कट्टरपंथी इस्लामिक पार्टी के इकलौते हिंदू कैंडिडेट, 80 अल्पसंख्यकों को टिकट

बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले राष्ट्रीय संसदीय चुनावों में इस बार धार्मिक और जातीय अल्पसंख्यक समुदायों की अभूतपूर्व भागीदारी देखने को मिल रही है. चुनाव आयोग के अनुसार कुल 80 अल्पसंख्यक उम्मीदवार इस बार चुनाव लड़ रहे हैं, जिनमें 12 स्वतंत्र उम्मीदवार और 10 महिलाएं शामिल हैं.

22 राजनीतिक दलों ने उतारे 68 अल्पसंख्यक उम्मीदवार

बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) और जमात-ए-इस्लामी सहित 22 पार्टियों ने कुल 68 अल्पसंख्यक उम्मीदवारों को टिकट दिया है. सबसे अधिक उम्मीदवार बांग्लादेश कम्युनिस्ट पार्टी (CPB) ने उतारे हैं. CPB ने कुल 17 उम्मीदवार उतारे हैं.

आवामी लीग चुनाव से बाहर, BNP-Jamaat की भूमिका मजबूत

बता दें कि पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी आवामी लीग को चुनाव लड़ने से बाहर कर दिया गया है, उसकी पार्टी गतिविधियां और पंजीकरण दोनों निलंबित हैं. BNP ने इस चुनाव में 6 अल्पसंख्यक उम्मीदवारों को टिकट दिया है.

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जमात-ए-इस्लामी ने पहली बार उतारा हिंदू उम्मीदवार

इस चुनाव की सबसे बड़ी राजनीतिक घटनाओं में से एक है. जमात-ए-इस्लामी द्वारा पहली बार किसी अल्पसंख्यक उम्मीदवार को टिकट देना. कृष्ण नंदी, एक हिंदू व्यवसायी, Khulna-1 सीट से जमात के प्रत्याशी हैं. वे 2003 से जमात से जुड़े हुए हैं. यह सीट हिंदू बहुल क्षेत्र होने के कारण जमात की रणनीतिक कोशिश मानी जा रही है.

गोबिंद चंद्र प्रमाणिक, स्वतंत्र हिंदू उम्मीदवार की दावेदारी मजबूत

बांग्लादेश चुनाव में एक और महत्वपूर्ण उम्मीदवार हैं- गोबिंद चंद्र प्रमाणिक, जो बांग्लादेश नेशनल हिंदू महासंघ (Hindu Mahajot) के महासचिव हैं. वे Gopalganj-3 से स्वतंत्र उम्मीदवार (Independent Candidate) के रूप में मैदान में हैं. पहले उनकी नामांकन पर्ची खारिज हुई थी, लेकिन अपील के बाद चुनाव आयोग ने इसे बहाल कर दिया.

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चुनावी समीकरण: कौन कहां खड़ा?

बांग्लादेश में कुल 60 राजनीतिक दल चुनाव आयोग में रजिस्टर्ड हैं, लेकिन आवामी लीग के बाहर होने से मैदान पूरी तरह BNP, Jamaat, CPB और नवोदित दलों के लिए खुल चुका है. गौरतलब है कि यह चुनाव पिछले साल अगस्त में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद हो रहा है और BNP इस बार प्रमुख दावेदार के रूप में देखी जा रही है.

अल्पसंख्यक समुदायों की भूमिका क्यों अहम?

विशेषज्ञों का मानना है कि इस चुनाव में अल्पसंख्यक नेतृत्व की भागीदारी बढ़ी है. आवामी लीग के बाहर होने के चलते नए राजनीतिक समीकरण बन रहे हैं और विपक्षी दलों की बदली रणनीति चुनाव को अप्रत्याशित और बेहद रोचक बना रहे हैं.

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