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बांग्लादेश चुनाव में जमात के चक्कर में 'फेल' होगी स्टूडेंट पार्टी? छात्र आंदोलन से सियासी अखाड़े तक की कहानी

Bangladesh Election 2026: शेख हसीना की सरकार गिराने वाले छात्र आंदोलन से ही नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) बनी है. इसके नेता नाहिद इस्लाम हैं, जो आंदोलन का जाना-पहचाना चेहरा रहे हैं. इसने जमात-ए-इस्लामी के साथ गठबंधन किया है.

बांग्लादेश चुनाव में जमात के चक्कर में 'फेल' होगी स्टूडेंट पार्टी? छात्र आंदोलन से सियासी अखाड़े तक की कहानी
Bangladesh Election 2026: छात्र आंदोलन से ही नेशनल सिटिजन पार्टी बनी है, जिसके नेता नाहिद इस्लाम हैं
  • बांग्लादेश में 12 फरवरी को चुनाव होगा. यह छात्र आंदोलन के बाद पहला चुनाव है, जिसने शेख हसीना से सत्ता छीन ली
  • NCP का गठन छात्र नेताओं ने किया, जो भ्रष्टाचार और तानाशाही के खिलाफ नए राजनीतिक विकल्प के रूप में उभरी
  • नेशनल सिटिजन पार्टी ने जमात से गठबंधन किया, जिससे पार्टी में फूट पड़ी और कुछ महिला नेताओं ने इस्तीफा दिया

बांग्लादेश में 12 फरवरी को ऐतिहासिक चुनाव होने जा रहा है. यह उस बड़े छात्र आंदोलन के बाद का पहला चुनाव होगा जिसने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को इस्तीफा देने और देश छोड़ने पर मजबूर कर दिया था. डेढ़ साल पहले बांग्लादेश की सड़कों पर हुए भारी प्रदर्शन और वहां की यूनिवर्सिटीज में हुई हिंसा से एक नई राजनीतिक ताकत उभरी थी, जो अब पहली बार चुनाव में अपनी परीक्षा देने जा रही है. इस नई पार्टी का नाम जातीय नागरिक पार्टी (JNP) है, जिसे नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) भी कहा जाता है. यह पार्टी उन छात्र नेताओं ने बनाई है, जिन्होंने शेख हसीना के 16 साल लंबे शासन को खत्म करने में अहम भूमिका निभाई थी.

बांग्लादेश चुनाव से पहले हम आपके लिए यह सीरिज लाए हैं जिसमें हम आपको मैदान में दांव ठोक रहे एक-एक राजनीतिक प्लेयर्स के बारे में बताएंगे. उनका अतीत बताएंगे, उनका वर्तमान बताएंगे. इसी कड़ी में बारी है BNP और जमात-ए-इस्लामी के बाद नेशनल सिटीजन पार्टी की कहानी जानने की है. 

बांग्लादेश में छात्रों ने शेख हसीना को कैसे हटाया?

यह आंदोलन जुलाई 2024 में शुरू हुआ था. शुरुआत में छात्र सरकारी नौकरियों में भेदभाव वाले आरक्षण के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे. यह मुद्दा लंबे समय से छात्रों और युवाओं में नाराजगी का कारण था. लेकिन धीरे-धीरे यह आंदोलन भ्रष्टाचार, दमन और निष्पक्ष चुनाव न होने के खिलाफ एक बड़े विद्रोह में बदल गया. शेख हसीना सरकार ने इसका जवाब बहुत सख्ती से दिया. पुलिस, अर्धसैनिक बलों और सत्ताधारी पार्टी के छात्र संगठन ने प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई की. कर्फ्यू लगाया गया और सेना सड़कों पर उतारी गई. संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, इसमें करीब 1,400 लोग मारे गए, जिनमें ज्यादातर कॉलेज स्टूडेंड और युवा थे.

शेख हसीना के निर्देश पर जब पुलिस कार्रवाई कर रही थी तब गोलीबारी और घायल प्रदर्शनकारियों के वीडियो सोशल मीडिया पर फैल गए. कुछ ही हफ्तों में यह आंदोलन पूरे बांग्लादेश में फैल गया. हिंसा बढ़ती गई, युवाओं का आंदोलन उग्र होता गया. आखिर में 5 अगस्त 2024 को शेख हसीना ने इस्तीफा दिया और भारत चली गईं. नवंबर 2025 में बांग्लादेश की एक अदालत ने उन्हें मानवता के खिलाफ अपराध के मामले में मौत की सजा सुनाई.

फिर बनी अंतरिम सरकार

हसीना के जाने के बाद, नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में एक अंतरिम सरकार बनी. छात्र आंदोलन के कई नेता इसमें सलाहकार बने. यूनुस सरकार ने चुनाव आयोग, न्यायपालिका, पुलिस, प्रशासन और भ्रष्टाचार विरोधी संस्थाओं में बड़े सुधार का वादा किया. हालांकि यह सरकार हिंसा को रोकने में नाकामयाब रही. बांग्लादेश में कट्टरपंथी तत्वों की ताकत बढ़ती गई. अल्पसंख्यकों (खासकर हिंदुओं) और महिलाओं के खिलाफ उन्होंने हिंसा को बढ़ाने का काम किया.

नेशनल सिटिजन पार्टी का जन्म

छात्र आंदोलन से ही नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) बनी. इसके नेता नाहिद इस्लाम हैं, जो आंदोलन का जाना-पहचाना चेहरा रहे हैं. पार्टी खुद को भ्रष्टाचार और तानाशाही के खिलाफ एक नया विकल्प बताती है. पार्टी ने युवाओं को रोजगार, हिंसा के पीड़ितों को न्याय और संस्थागत सुधार जैसे मुद्दे उठाए हैं. उसने मतदान की उम्र 18 से घटाकर 16 साल करने की बात भी कही. हालांकि चुनाव पास आने पर पार्टी को संगठन, अनुभव और पैसों की कमी का सामना करना पड़ा है. इसके बाद उसने जमात-ए-इस्लामी के साथ चुनावी गठबंधन किया, जिससे छात्र आंदोलन में गहरी फूट पड़ गई. कई महिला नेताओं ने इस्तीफा दे दिया और कहा कि उन्हें नजरअंदाज किया गया.

इस बीच कुछ छात्र नेता BNP की ओर भी जा रहे हैं. अवामी लीग के चुनाव से बाहर होने के कारण, सबसे ज्यादा फायदा बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) को मिल सकता है, जो अब फिर से एक मजबूत दावेदार बनकर उभरी है.

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