उत्तर कोरियाई के तानाशाह किम जोंग उन ने एक बार फिर दुनिया को अपनी सैन्य ताकत की नुमाइश कर खुली चुनौती दी है. एक तरफ किम जोंग उन मिसाइल बनाने वाली फैक्ट्री का दौरा कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ उनकी ताकतवर बहन किम यो जोंग ने साफ लफ्जों में कह दिया है कि परमाणु हथियारों को खत्म करने का अब कोई सवाल ही नहीं उठता.
उत्तर कोरिया की सरकारी मीडिया एजेंसी KCNA ने कुछ तस्वीरें जारी की हैं, जिनमें किम जोंग उन अधिकारियों के साथ एक मिसाइल प्रोडक्शन फैसिलिटी का मुआयना करते दिख रहे हैं. तस्वीरों में किम बड़ी-बड़ी मिसाइलों के बीच चलते नजर आ रहे हैं, हालांकि सुरक्षा कारणों से इस जगह के नाम का खुलासा नहीं किया गया है. सरकारी मीडिया के मुताबिक, किम जोंग उन का यह दौरा शनिवार, 6 जून को हुआ था.
मिसाइल प्रोडक्शन ढाई गुना बढ़ाने का टारगेट
इस दौरे के दौरान किम जोंग उन ने देश की मिसाइल क्षमता को दोगुने से भी ज्यादा करने का आदेश दिया. मिसाइल एडमिनिस्ट्रेशन की लॉन्ग टर्म प्लानिंग की रिपोर्ट देखने के बाद उन्होंने अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए. किम ने कहा कि मौजूदा पंचवर्षीय योजना के तहत सालाना आधार पर मिसाइलों के उत्पादन को 2.5 गुना तक बढ़ाया जाना बेहद जरूरी है, ताकि सेना को जरूरत के मुताबिक मिसाइलें सप्लाई की जा सकें.
हालांकि, केसीएनए की इन तस्वीरों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है. सरकारी मीडिया ने यह भी साफ नहीं किया है कि फैक्ट्रियों में किस तरह की बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलें तैयार की जा रही हैं. उत्तर कोरिया अक्सर अपनी सैन्य तैयारियों को बेहद गुप्त रखता है और इस बार भी मिसाइलों की सटीक खूबियों को छिपाकर रखा गया है.

परमाणु हथियारों पर बहन का दोटूक जवाब
मिसाइल फैक्ट्री के इस दौरे के बीच ही किम जोंग उन की प्रभावशाली बहन किम यो जोंग का एक तीखा बयान भी सामने आया है. उन्होंने अमेरिका को आड़े हाथों लेते हुए साफ कहा कि उत्तर कोरिया को परमाणु हथियारों से मुक्त करने की बातें करना पूरी तरह बेकार है. उन्होंने जोर देकर कहा कि उत्तर कोरिया एक परमाणु संपन्न देश है और वह अपने इस दर्जे से पीछे हटने वाला नहीं है.
किम यो जोंग का यह बयान ऐसे समय पर आया है जब अमेरिका और उसके सहयोगी देश लगातार उत्तर कोरिया पर परमाणु कार्यक्रम बंद करने का दबाव बना रहे हैं. उनके इस बयान ने यह साफ कर दिया है कि उत्तर कोरिया अब किसी भी अंतरराष्ट्रीय दबाव के आगे झुकने के मूड में नहीं है और वह अपनी परमाणु नीति को और आक्रामक बनाएगा.

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के दौरे से ठीक पहले हलचल
उत्तर कोरिया की यह आक्रामकता ऐसे वक्त में देखने को मिल रही है, जब चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग प्योंगयांग के दौरे पर जाने वाले हैं. शी जिनपिंग का साल 2019 के बाद यह पहला उत्तर कोरिया दौरा है और इस साल की उनकी यह पहली विदेश यात्रा भी है. शी जिनपिंग के इस बेहद अहम दौरे से ठीक एक दिन पहले उत्तर कोरिया का यह कदम कई बड़े कूटनीतिक संकेत दे रहा है.
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