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चीनी पटाखे फिर फुस्स : चीन के एयर डिफेंस सिस्टम पर भरोसा करना पाकिस्तान की तरह ईरान को भी महंगा पड़ा 

ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान में तैनात चीन के इसी HQ-9P एयर डिफेंस सिस्टम को भारत ने तबाह किया था.

चीनी पटाखे फिर फुस्स : चीन के एयर डिफेंस सिस्टम पर भरोसा करना पाकिस्तान की तरह ईरान को भी महंगा पड़ा 
  • अमेरिका और इजरायल के हवाई हमलों में ईरान का HQ-9B एयर डिफेंस सिस्टम पूरी तरह असफल रहा है.
  • ईरान ने जुलाई 2025 में चीन से HQ-9B सिस्टम खरीदा था, लेकिन यह मिसाइल हमलों को रोकने में नाकाम रहा.
  • HQ-9B को चीन की प्रमुख हवाई सुरक्षा प्रणाली माना जाता है, जो 260 किलोमीटर दूरी तक दुश्मनों को निशाना बनाती है.
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ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने पाकिस्तानी एयर डिफेंस सिस्टम को तबाह कर दिया था. इस सिस्टम का नाम HQ-9P था. ये सिस्टम भारत की ओर से दागी गई मिसाइल्स और ड्रोन्स को ट्रैक करने और मार गिराने में नाकाम रहा था. और अब एक बार फिर इसकी नाकामी सामने आई है. ईरान के पास भी HQ-9 सीरीज के B वेरिएंट का एयर डिफेंस सिस्टम है. इसकी अनुमानित रेंज लगभग 250 किलोमीटर बताई जाती है. लेकिन ताज्जुब की बात है कि इजरायली और अमेरिकन जेट्स एक बार फिर अपने मकसद में कामयाब हो गए. और ईरान का एयर डिफेंस वैसा प्रदर्शन नहीं कर पाया जैसा कि उम्मीद थी. यही वजह है कि ईरान ने अपने सबसे पॉपुलर नेता और सुप्रीम लीडर को खो दिया.

ईरान ने अपनी सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए बड़े भरोसे के साथ चीन से HQ-9B एयर डिफेंस सिस्टम खरीदा था. लेकिन युद्ध के मैदान में यह फिसड्डी साबित हुआ. यह पहली बार नहीं है जब चीनी तकनीक फेल हुई हो. इससे पहले जब भारत ने पहलगाम आतंकी हमले का जवाब देने के लिए 'ऑपरेशन सिंदूर' चलाया था, तब भी पाकिस्तान में तैनात यही सिस्टम भारतीय प्रहार को रोकने में नाकाम रहा था. ईरान में हुए इस ताजा विनाश के बाद अब रक्षा विशेषज्ञों ने चीनी हथियारों की गुणवत्ता और उनकी असली ताकत पर गंभीर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं.

HQ-9B कैसा है?

चीन की'चाइना एयरोस्पेस साइंस एंड इंडस्ट्री कॉर्पोरेशन'की ओर से विकसित यह मिसाइल प्रणाली रूस के S-300 और अमेरिका के पैट्रियट (PAC-2) से काफी प्रेरित है. हालांकि, चीन इसे पूरी तरह 'स्वदेशी' कहता है. इसका पहला परीक्षण साल 2006 में किया गया था और पिछले 10 सालों से चीन इसका बड़े स्तर पर इस्तेमाल कर रहा है.

रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया है कि इस सिस्टम की मिसाइलें 260 किलोमीटर की दूरी तक दुश्मन को ढेर कर सकती हैं. यह जमीन से 50 किलोमीटर की ऊंचाई तक जाकर हमला करने में सक्षम है, जो इसे ऊंचे उड़ने वाले लक्ष्यों के लिए खतरनाक बनाता है. इसमें आधुनिक 'रडार' और 'इन्फ्रारेड सीकर' लगे हैं, जो उन विमानों (स्टील्थ) को भी पकड़ सकते हैं जिन्हें रडार पर देख पाना मुश्किल होता है.

चीन का यह डिफेंस सिस्टम सवालों के घेरे में

HQ-9B को लेकर दावा यह भी है कि एक साथ 100 दुश्मनों (मिसाइल या विमान) पर नजर रख सकता है और उनमें से 6 से 8 लक्ष्यों पर एक साथ हमला कर सकता है. चीन ने अपनी सुरक्षा के लिए इसे बीजिंग, तिब्बत और दक्षिण चीन सागर जैसे बेहद संवेदनशील इलाकों में तैनात कर रखा है, जिससे पता चलता है कि यह चीन के हवाई रक्षा नेटवर्क की मुख्य रीढ़ है. हालांकि , चीन का यह डिफेंस सिस्टम सवालों के घेरे में हैं. 

जुलाई 2025 में ईरान ने अपनी हवाई सुरक्षा को अभेद्य बनाने के इरादे से चीन से HQ-9B डिफेंस सिस्टम हासिल किया था. तेहरान को उम्मीद थी कि यह तकनीक उसे किसी भी बाहरी हमले से सुरक्षित रखेगी, लेकिन हालिया हकीकत इसके उलट रही. जब ईरान के शहरों पर भीषण हवाई हमले हुए, तब यह सिस्टम पूरी तरह सक्रिय होने के बावजूद आक्रमणकारी मिसाइलों को रोकने में नाकाम रहा, जिससे देश में भारी तबाही हुई.

इस निराशाजनक प्रदर्शन ने अब युद्ध विश्लेषकों को हैरान कर दिया है. जानकारों का मानना है कि HQ-9B की जिन क्षमताओं का चीन गुणगान करता था, वे असल युद्ध की परिस्थितियों में फेल साबित हुई हैं. सिस्टम के 'एक्टिव' होने के बाद भी हमलों का न रुक पाना अब सीधे तौर पर इसकी तकनीक और विश्वसनीयता पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है.

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