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जापान के लोग नहीं चख पाएंगे भारतीय आमों का स्वाद, 20 साल बाद लगाया बैन, जानें वजह

Japan Ban Indian Mangoes: दुनिया के बहुत से देश हर साल मुंह में घुल जाने वाले भारतीय आमों का लुत्फ उठाते हैं. जापान भी इस लिस्ट में शामिल है. लेकिन अब जापान के लोग भारतीय आमों का स्वाद नहीं चख सकेंगे. इसकी वजह भी सामने आई है.

जापान के लोग नहीं चख पाएंगे भारतीय आमों का स्वाद, 20 साल बाद लगाया बैन, जानें वजह
जापान ने भारतीय आमों के आयात पर लगाया प्रतिबंध.
  • जापान ने करीब 20 साल बाद भारतीय आमों के निर्यात पर फिर से प्रतिबंध लगाया है, जिससे निर्यात प्रभावित हुआ है
  • जापानी क्वारंटीन अधिकारियों ने भारत के वाष्प ताप उपचार केंद्रों में कीट नियंत्रण प्रक्रिया में खामियां पाई हैं
  • प्रतिबंध का असर अल्फोंसो, केसर, लंगड़ा और बंगनपल्ली जैसी प्रीमियम भारतीय आमों की निर्यात खेपों पर पड़ा है

भारत में हर साल बड़ी तादाद में आमों की पैदावार होती है. ये आम सिर्फ देश में भी नहीं खाये जाते बल्कि विदेशों के लोग भी इसका स्वाद चखते हैं. इस बीच खबर सामने आई है कि जापान ने भारतीय आमों को बैन कर दिया है. करीब 20 साल बाद जापान ने आमों पर प्रतिबंध लगाया है. जापान ने आखिर ऐसा किया क्यों, सबकुछ डिटेल में जानें.

जापान ने भारतीय आमों के इंपोर्ट पर बैन लगा दिया. इसकी वजह कुछ खामियों का पाया जाना है. बताया जा रहा है कि इस साल की शुरुआत में निरीक्षण के दौरान जापान के क्वारंटाइन ऑफिसर्स ने इंडियन ट्रीटमेंट फेसिलिटीज में पेस्ट कंट्रोल प्रक्रिया में खामियां पाई थीं. इसी वजह से जापान में भारत के आमों को प्रतिबंधित किया गया है. इसका असर अल्फोंसो, केसर, लंगड़ा और बंगनपल्ली जैसी आमों की प्रीमियम भारतीय किस्मों पर पड़ा है.

20 सालों में पहली बार भारतीय आम बैन

जापान ने पिछले दो दशकों में पहली बार भारतीय आमों पर प्रतिबंध लगाया है. जापान ने पहले फल मक्खी के खतरे की वजह से भारतीय आमों पर बैन लगाया था. भारत ने जब अपने उपचार प्रोटोकॉल को मजबूत कर लिया था उसके बाद जापान ने साल 2006 में इन प्रतिबंधों को हटाया था. अब, जापानी अधिकारियों ने एक बार फिर इस बात पर चिंता जताई है कि क्या भारतीय आमों की खेप देश के सख्त पौध स्वास्थ्य मानकों को पूरा कर रही है?  जापान फल मक्खियों जैसे आक्रामक कीटों के लिए जीरो टॉलरेंस की नीति का पालन करता है, जिनको घरेलू कृषि के लिए एक बड़ा खतरा माना जाता है.

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जापानी निरीक्षकों ने क्या पाया?

हर एक्सपोर्ट सीजन से पहले जापान आम को जांचने के लिए अपने क्वारंटीन अधिकारियों को भारत के वाष्प ताप उपचार (वीएचटी) केंद्रों पर भेजता है. इन केंद्रों पर आमों को निर्यात से पहले कीटाणुरहित किया जाता है. VHT एक नॉन-केमिकल प्रॉसेस है. जिसमें कीटों और फलों के कीड़ों के लार्वा को मारने के लिए आमों को नियंत्रित गर्म और आर्द्र हवा के संपर्क में रखा जाता है. भारत-जापान एक्सपोर्ट समझौते के तहत यह बहुत ही जरूरी काम है. 

जापान ने भारतीय आमों को क्यों किया बैन?

इस साल का निरीक्षण उत्तर प्रदेश के रहमानपुर स्थित वीएचटी सुविधा केंद्र में मार्च में किया गया था. रिपोर्टों के मुताबिक, जापानी अधिकारियों ने सुविधा केंद्र में फ्यूमिगेशन और डिसइंफेक्शन प्रक्रियाओं से संबंधित कमियां पाईं. लेकिन बड़ी बात यह है कि अब तक न तो भारत ने और न ही जापानी अधिकारियों ने निरीक्षण के दौरान पाई गई सटीक तकनीकी समस्याओं का सार्वजनिक रूप से खुलासा किया है. यूपी के वीएचटी सुविधा केंद्र के दौरे के बाद, जापान के योकोहामा प्लांट प्रोटेक्शन एसोसिएशन ने घोषणा की कि 25 मार्च, 2026 के बाद जारी किए गए निरीक्षण प्रमाणपत्रों वाले भारतीय आमों की खेप अब स्वीकार नहीं की जाएगी. 

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आम निर्यातकों को झटका

जापान के इस कदम से भारतीय आम निर्यातकों को बड़ा झटका लगा है. भले ही जापान भारत का सबसे बड़ा आम बाजार नहीं है, लेकिन निर्यातकों का कहना है कि यह बैन फिर भी गंभीर झटके से कम नहीं है. क्यों कि वहां भारतीय आमों की बढ़िया कीमतें मिलती हैं. भारत हर साल दुनिया का सबसे ज्यादा करीब 28 करोड़ मीट्रिक टन आम का उत्पादन करता है. ज्यादातर खपत को देश के भीतर ही हो जाती है. लेकिन जापान जैसे हाई लेवल मार्केट्स में एक्सपोर्ट से उत्पादकों और व्यापारियों को बहुत फायदा होता है. एक्सपोर्टर्स को अब आशंका है कि इस प्रतिबंध से भारत की कृषि गुणवत्ता नियंत्रण प्रणालियों पर भरोसा कम हो सकता है. दूसरे आयातक देश भी इस बात से चिंतित हो सकते हैं. 

किसानों पर पहले से ही भारी दबाव

जापान के इस प्रतिबंध ने खासकर  महाराष्ट्र के अल्फोंसो क्षेत्र के किसानों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं. किसान पहले ही इस साल भीषण गर्मी और अल नीनो जलवायु पैटर्न से जुड़ी अनियमित मौसम स्थितियों की वजह से फसलों के भारी नुकसान से जूझ रहे हैं. कुछ सरकारी सर्वेक्षणों में कुछ क्षेत्रों में 85-90 प्रतिशत तक नुकसान का अनुमान लगाया गया है. अब ये प्रतिबंध उन पर दोहरी मार है. वहीं निर्यातकों का कहना है कि जापानी प्रतिबंध उनकी कमाई को प्रभावित कर सकता है.

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लेखक के बारे में
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श्वेता गुप्ता
Chief Sub Editor
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