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समुद्र के रास्ते सिंगापुर पहुंचा भारत का सफेदा आम, आखिर क्यों दुनिया दीवानी है बैगनपल्ली आम की?

भारत ने पहली बार समुद्री मार्ग से 5 मीट्रिक टन बैगनपल्ली (सफेदा) आम सिंगापुर भेजकर नया रिकॉर्ड बनाया है. यह दुनिया के आम बाजार में भारतीय आमों की बढ़ती ताकत की कहानी है. जानिए, आखिर क्यों दुनिया इस आम की दीवानी है.

समुद्र के रास्ते सिंगापुर पहुंचा भारत का सफेदा आम, आखिर क्यों दुनिया दीवानी है बैगनपल्ली आम की?
सफेदा आम
ANI/NDTV
  • सिंगापुर के आयातक ने भारत से भेजे गए बैगनपल्ली यानी सफेदा आमों की तारीफ की है.
  • उन्होंने सफेदा आमों की मिठास, एक जैसी पकने की क्षमता, लंबी शेल्फ लाइफ और बेहतरीन गुणवत्ता की खुलकर तारीफ की.
  • घरेलू बाजार में सफेदा आमों से किसानों को 26 रुपये प्रति किलो मिल रही थी, जबकि निर्यात से 50 रुपये.

भारत में गर्मियों का नाम आते ही अगर किसी फल की सबसे ज्यादा चर्चा होती है तो वह है आम. लेकिन हर आम एक जैसा नहीं होता. कुछ आम स्वाद के लिए मशहूर हैं, कुछ खुशबू के लिए और कुछ अपनी लंबी शेल्फ लाइफ और निर्यात क्षमता के लिए. इन्हीं खास किस्मों में शामिल है दक्षिण भारत का मशहूर बैगनपल्ली आम, जिसे उत्तर भारत में ज्यादातर लोग सफेदा आम के नाम से जानते हैं.

अब इस आम ने एक और बड़ी उपलब्धि अपने नाम कर ली है.

भारत ने पहली बार समुद्री रास्ते से बैगनपल्ली आम की व्यावसायिक खेप सिंगापुर भेजी है. यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि अब तक प्रीमियम आमों को अधिकतर हवाई मार्ग से भेजा जाता था. समुद्री रास्ता सस्ता भी है, पर्यावरण के लिहाज से बेहतर भी और बड़े पैमाने पर निर्यात की नई संभावनाएं भी खोलता है.

आंध्र प्रदेश के GAP प्रमाणित बागानों से चुने गए 5 मीट्रिक टन बैगनपल्ली आमों की खेप पिछले महीने सिंगापुर पहुंची, पूरी खेप APEDA द्वारा मान्यता प्राप्त पैकहाउस में वैज्ञानिक तरीके से तैयार की गई. लखनऊ स्थित ICAR-CISH के विशेषज्ञों ने भी इस पूरी प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाई.

सिंगापुर के आयातक ने आमों की मिठास, एक जैसी पकने की क्षमता, लंबी शेल्फ लाइफ और बेहतरीन गुणवत्ता की खुलकर तारीफ की. इससे साफ हो गया कि अगर वैज्ञानिक तरीके से कटाई के बाद फलों को संभाला जाए और मजबूत कोल्ड चेन का इस्तेमाल किया जाए तो भारतीय आम समुद्री यात्रा के बाद भी अपनी गुणवत्ता बरकरार रख सकते हैं.

इस सफलता का सबसे बड़ा फायदा किसानों को मिला. जहां घरेलू बाजार में इन्हीं आमों की कीमत लगभग 25 से 26 रुपये प्रति किलो मिल रही थी, वहीं निर्यात में किसानों को करीब 50 रुपये प्रति किलो का भाव मिला. यही वजह है कि एक्सपर्ट इसे भारतीय बागवानी के लिए नई शुरुआत मान रहे हैं.

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Photo Credit: Ministry of Agriculture and Farmers Welfare, GOI

आखिर बैगनपल्ली आम इतना खास क्यों है?

अगर आपने कभी सफेदा आम खाया है, तो आपको इसकी सबसे बड़ी पहचान जरूर याद होगी. इसका सुनहरा पीला रंग, बेहद मीठा स्वाद, बिना रेशों वाला मुलायम गूदा और हल्की खुशबू.

भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के मुताबिक, बैगनपल्ली देश के बेहतरीन डेजर्ट मैंगो में गिना जाता है. इसका गूदा क्रीमी होता है, आकार तिरछा अंडाकार होता है और एक पका हुआ आम बिना फ्रिज के लगभग 7 दिन तक सुरक्षित रह सकता है. यही लंबी शेल्फ लाइफ इसे निर्यातकों की पहली पसंद बनाती है. यही वजह है कि विदेशी बाजारों में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है.

सिर्फ स्वाद नहीं, पहचान भी खास

भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के मुताबिक, बैगनपल्ली आम को तेलंगाना में GI टैग भी मिला हुआ है. इसे बेनेशान, बनेशन, चप्पाटाई और सफेदा जैसे कई नामों से भी जाना जाता है और राज्य में इसकी खेती 100 साल से भी अधिक समय से की जा रही है. 

GI टैग का मतलब सिर्फ पहचान नहीं बल्कि यह भरोसा भी है कि इस आम की गुणवत्ता और स्वाद उस भौगोलिक क्षेत्र से जुड़ा हुआ है जहां इसकी खेती होती है.

बैगनपल्ली आम

बैगनपल्ली आम
Photo Credit: Ministry of Agriculture and Farmers Welfare, GOI

दुनिया के बाजारों में क्यों बढ़ रही है मांग?

भारत दुनिया का सबसे बड़ा आम उत्पादक देश है. हर साल करीब 2.8 करोड़ मीट्रिक टन आम का उत्पादन होता है. हालांकि इसके बड़े हिस्से की देश में ही खपत हो जाती है, लेकिन जो आम विदेश भेजे जाते हैं, उनमें बैगनपल्ली की खास जगह है.

यूएई, सऊदी अरब, कतर, ओमान, कुवैत और बहरीन जैसे खाड़ी देशों में भारतीय आमों की अच्छी मांग है. ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस, नीदरलैंड, अमेरिका और कनाडा जैसे बाजारों में भी भारतीय आम लोकप्रिय हैं. अब सिंगापुर तक समुद्री रास्ते से सफलतापूर्वक पहुंची आम की इस खेप ने एक नई उपलब्धि को जोड़ दिया है.

वैज्ञानिक खेती और निर्यात का नया मॉडल

इस सफलता के पीछे छिपी है पूरी वैज्ञानिक प्रक्रिया. बागानों का GAP प्रमाणन, सही समय पर तुड़ाई, वैज्ञानिक पैकिंग, कोल्ड चेन, गुणवत्ता जांच और अंतरराष्ट्रीय फाइटोसैनिटरी मानकों का पालन. यही वजह रही कि समुद्र के लंबे सफर के बाद भी आम पूरी गुणवत्ता के साथ सिंगापुर पहुंचे.

भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के मुताबिक, निर्यात के लिए आमों को 12 से 16 डिग्री सेल्सियस तापमान पर रखा जाता है. विशेष ग्रेडिंग, पैकेजिंग और गुणवत्ता मानकों का पालन किया जाता है. समुद्री निर्यात के लिए फलों का कम से कम 85 प्रतिशत परिपक्व होना जरूरी माना जाता है.

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पोषण का भी खजाना

बैगनपल्ली स्वाद में तो बेहद लाजवाब है ही, ये पोषण भी भरपूर देता है.

भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के मुताबिक, इसमें विटामिन A, C, E, K, कई प्रकार के B विटामिन, आयरन, पोटैशियम, फाइबर और अन्य जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं. यह पाचन बेहतर बनाने, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, आंखों की सेहत सुधारने और हार्ट के स्वास्थ्य के लिहाज से भी फायदेमंद माना जाता है.

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यह कैसे फायदेमंद है?

बीते महीने में ही जापान और नेपाल की ओर से भारतीय आमों पर लगाए गए प्रतिबंधों की खबरों ने निर्यातकों की चिंता बढ़ाई थी. ऐसे समय में सिंगापुर तक समुद्री रास्ते से सफल निर्यात यह संकेत देता है कि भारत नए बाजारों और नई लॉजिस्टिक्स रणनीतियों के जरिए अपने आमों की वैश्विक मौजूदगी और मजबूत कर सकता है.

सरकार का मानना है कि समुद्री परिवहन लागत कम करेगा, पर्यावरण के अनुकूल होगा और भविष्य में बड़ी मात्रा में ताजे फलों के निर्यात का रास्ता खोलेगा. इससे किसानों की आय बढ़ाने और भारतीय बागवानी उत्पादों की वैश्विक पहचान मजबूत करने में भी मदद मिलेगी.

अल्फांसो अपनी खुशबू के लिए मशहूर है. केसर अपने स्वाद के लिए. दशहरी और चौसा अपनी मिठास के लिए.

लेकिन अगर बात ऐसे आम की हो जो स्वाद, गुणवत्ता, लंबी शेल्फ लाइफ, निर्यात क्षमता और किसानों की बेहतर कमाई, इन सभी कसौटियों पर खरा उतरता हो, तो बैगनपल्ली यानी सफेदा आम आज भारत की सबसे मजबूत दावेदार किस्मों में शामिल है.

सिंगापुर तक समुद्री सफर इसकी सिर्फ पहली मंजिल है. आने वाले वर्षों में यही सफर भारतीय आमों को दुनिया के और भी बड़े बाजारों तक पहुंचा सकता है.

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